Who is reading ‘VigyaanMag’

| June 11, 2017 | 0 Comments

विज्ञान के प्रथम दो अंक काफी सराहे गए | इन दो महीनों में विज्ञान में लिखे गए विभिन्न लेखो एवं ब्लोग्स को वैज्ञानिक समुदाय से लेकर विद्यार्थीगण एवं आम नागरिकों तक नें खूब सराहा | इन लेखों को भारत से लेकर अमेरिका तक और नोर्वे से लेकर साउथ अफ्रीका तक पढ़ा गया | Social media पर भी ‘विज्ञान’ के लेखों की काफी चर्चा रही |

‘विज्ञान’ के इन्ही दो अंको के सफ़र का विश्लेषण आपके समक्ष अवलोकन के लिए प्रस्तुत है :

सबसे पहले पाठकों की मिली जुली प्रतिक्रियाएं….

Satya Prakash Tyagi विज्ञान पत्रिका एक सच्चा दर्पण है जो वास्तव में सच्चाई से परिपूर्ण एवं ज्ञानवर्द्धक है । इस महान कार्य को दिशा देने वाले सभी साथियों को कोटि कोटि नमन् । (प्रतिक्रिया का लिंक)

धरा त्रिपाठी विज्ञान is the bestest ! No comparison with any other govt. Science mag..Its genuine ..Gives true knowledge .And a real eye opener. A big salute to all the scientists involved in the noble work . (प्रतिक्रिया का लिंक)

Yogendra Panwar उम्मीद की किरण। (प्रतिक्रिया का लिंक)

Rajesh Kanchan आपसे जुड़कर शानदार और नयी नयी जानकारियां मिल रही है। आभार (प्रतिक्रिया का लिंक)

B.K. Prasad No doubt all the articles published in Vigyan mag touching problems of common man. It will be better to publish and provide hard copy of magazine in the market. (प्रतिक्रिया का लिंक)

DrLakshmikant Pandey I strongly believe that it may provide opportunity to explore, learn and hone writing skills at this forum. I have found it as an encouraging forum where one can deliberate, discuss and evolve scientific opinion. It has immense potential to bring scientists, thinkers, philosophers, policy makers, common man at a common platform. We all have a moral responsibility to make this planet better by promoting scientific temperament. Science should not be allowed to become slave of riches but a way to serve the humanity. We should make this world hunger free, disease free, terror free where all can live happily. We also have responsibility to set examples for new generation to be more scientific, logical, responsible, and rational. (प्रतिक्रिया का लिंक)

Kanhaiya Srivastava Vigyaan is the hope of all Young as well as tenoned Scientists of India. Wish this achieves good reputation world over within short span of time. (प्रतिक्रिया का लिंक)

Rajesh Ranjan बहुत अच्छी जानकारी मिली सर् आपसे ,बहुत बहुत धन्यबाद । इसी तरह आपका मार्गदर्शन होता रहे हम उद्यमी और किसान भाई आपका आभरी रहेंगे ।आज के इस प्रदूषित वातावरण के लिए आवश्यक जानकारी बहुत महत्व रखता है । (प्रतिक्रिया का लिंक)

Bholalal Srivastava ग्राम स्तर पर सामान्य जन को बताने की आवश्यकता है।पृथ्वी माता को बांझ होने से बचाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।यह लेख सभी जानकारी दे रहा है। (प्रतिक्रिया का लिंक)

Puran Chandra Papnai आ० डा० सुनील जी और डा० संजीव जी आप दोनों की पहल बहुत सराहनीय है क्योंकि यह राष्ट्र के प्राचीन अतुलनीय ग्यानगौरव को उजागर करने वाली और विग्यान के क्षेत्र में नई क्रांति लाने वाली है। हार्दिक बधाई एवं आत्मीय शुभकामनाएँ। सादर (प्रतिक्रिया का लिंक)

R.C. Pant सत्य का अन्वेषण एक अत्यंत दुरूह कार्य है।जिस क्षेत्र में हम अपनी पकड़ मजबूत मानते हैं, एक वक्त ऐसा भी आता है जब हम महसूस करते हैं कि हमारा ज्ञान अधूरा है। (प्रतिक्रिया का लिंक)

Sanjay Goyal यदि ये पत्रिका न्यूज़ स्टैंड पर और प्रिंट प्रति सभी लाइब्रेरी को सुलभ हो तो इसकी सार्थकता सही मायनो में होगी आज भी आम जनो से डिजिटल बहुत दूर हैं | (प्रतिक्रिया का लिंक)

Nagendra Singh लोगों में वैज्ञानिक अवधारणा बढ़ाने में सहायक होगा यह प्रयास, ऐसा मेरा मत है। (प्रतिक्रिया का लिंक)

अब जानेंगे कि वास्तव में ‘विज्ञान’ को पढ़ा कहाँ कहाँ गया –

‘विज्ञान’ के पिछले 2 अंकों के लेखो को कुल 7600 पाठकों ने पढ़ा | भारत (5763 readers) के बाद अमेरिका में ‘विज्ञान’ को सबसे अधिक पढ़ा गया (713 readers); और इसके बाद रहा नंबर अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, UK एवं जर्मनी का |

Readership of Vigyaan

Photo: Cumulative map of the visitors of ‘Vigyaan’

 

Country wise numbers of visitors of Vigyaan

Photo: Country-wise distributions of the visitors of ‘Vigyaan’

अगर states की बात की जाये तो भारत के उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक रीडर्स (1534 readers) आये | इसके बाद नंबर रहा Delhi/New Delhi का (967 रीडर्स) और तीसरे नंबर पर रहे अफ्रीका के states | अमेरिका में – कैलिफ़ोर्निया से सबसे ज्यादा रीडर्स (445 readers) नें विज्ञान के लेखो को पढ़ा |

world-wide states - readers of Vigyaan

Photo: State wise distribution of the readers of ‘Vigyaan’

और अंत में – देखते है कि विज्ञान के रीडर्स किन किन शहरों से आये –

तो नंबर एक पर रहा दिल्ली – और उसके बाद top किया लखनऊ नें | अमेरिका के Pasadena शहर में ‘विज्ञान’ की धूम मची रही|

शहर जहाँ से विज्ञान के पाठक आये

फोटो: विश्व के शहर जहाँ से ‘विज्ञान’ के पाठक आये

चलते-चलते

चलते-चलते एक नजर डाल लेते है ‘विज्ञान’ के सबसे अधिक बार पढ़े गए लेखों पर –

कमल जीत द्वारा लिखा गया – रिफाइंड आयल की कहानी – एक फ़ूड टेक्नोलॉजिस्ट की ज़ुबानी सबसे अधिक (1592) बार पढ़ा गया |

मेरे द्वारा लिखा गया – भारत की हल्दी: एक पुनर्वलोकन (Turmeric of India, a retrospection) दूसरे नंबर पर रहा जो 1219 बार पढ़ा गया |

इसके बाद नंबर रहा जी के – राइस ब्रान (Rice Bran) आयल का पोस्ट-मार्टम (1150 बार) एवं मेरे लेख –  क्या आप अब भी खायेंगे लीची (Will you still eat Litchi) ! का जो 1193 बार पढ़ा गया|

मेरे लिखे हुए – कौन देता है सबसे शुद्ध पानी: UV Water Purifiers की कहानी और प्राचीन भारत के महान वैज्ञानिक: भाग १ तथा   जी का  कनोला आयल, कनाडा आयल और बंशी बाबा का शुद्ध भारतीय ‘सूर्यवंशम आयल’  चौथे स्थान पर रहे जो लगभग 800 – 900 बार पढ़े गए |

‘विज्ञान’ की यें सभी उपलब्धियां बहुत संतुष्टि जनक हैं | इस लेख के माध्यम से मै अपने स्वयं के behalf और विज्ञान के सभी विद्वान् लेखकों के behalf पर आप सभी का आभार व्यक्त करता हूँ | आशा है, भविष्य में ‘विज्ञान’ और ऊँचाइयों को छुएगी और जनसाधारण के लिए और भी उपयोगी साबित होगी |

बहुत बहुत धन्यवाद…

डॉ सुनील कुमार वर्मा

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Dr Sunil Kumar Verma. Who is reading ‘VigyaanMag’. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/article/1070/. Retrieved September 23, 2017.

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About the Author ()

Dr Sunil Kumar Verma is an experienced Principal Scientist with a demonstrated history of working in the research industry for more than 20 years. Skilled in Molecular Medicine, Genetics, Translational Research and Wildlife Forensics, Dr Verma has done his doctorate from the University of Oxford. UK. He had been the inventor of 'Universal Primer Technology' (US Patent 7141364), which led to the establishment of India's first wildlife forensics cell in the LaCONES of CCMB to provide wildlife forensics services to the nation. He is also the recipient of several national and international awards and honours, including the 2008 CSIR Technology Award, the 2009 NRDC Meritorious Invention Award of Govt. of India and the 2009 BioAsia Innovation Award in recognition of his contribution to Indian science and technology.

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