भोलेनाथ अघोरीनाथ : एक राष्ट्रसेवक, संसार की भीड़ के बीच एक भरतवंशी शिशु

| November 23, 2017 | 0 Comments

बाबा अघोरी नाथ बाबा अघोरी नाथ कौन हैं, कहाँ रहते हैं, क्या है, क्या थे, शायद बिरले ही जानते होंगें|

आपके लेखन से यह तो विदित है कि आप अपने काल के विख्यात वैज्ञानिक या प्रोफेसर ही रहे होंगें, किन्तु आपकी लेखनी की विद्वता का पुट आपको किसी महामानव से कम सिद्ध नहीं करता |

आज, आप सोशल मीडिया में गुरुदेव भोलेनाथ अघोरी के नाम से विख्यात हैं | विष्णु कुमार के नाम से विभिन्न विषयों पर लिखते हैं और खूब लिखते हैं | फेसबुक आपको ना जाने कितनी बार आपके बेबाक सत्य लेखन के लिए ब्लाक भी कर चुकी है |

अपने परिचय में आप सिर्फ इतना लिखते हैं “एक राष्ट्रसेवक, संसार की भीड़ के बीच एक भरतवंशी शिशु। मातृभूमि के विस्मृत गौरव की खोज में…।”

मुझे आपके परिचय में ये लाइने लिखते हुए अपनी ही लिखी हुयी दो लाइन याद आ रही हैं – कि:

“बेरहम शूलों की उलझनों में उलझे गुलाब,

भले ही कैद हो जाएँ,

किन्तु इनकी सुगंधों को बाँध लेना,

नामुमकिन है ऐ दोस्त…!!”

बाबा, आप जो भी हैं, जहाँ भी हैं, इस समाज के लिए अन्धकार में सितारे की तरह हैं, जो सृष्टि में न जाने कहाँ स्थित होकर, टिमटिमाते हुए पृथ्वी के अन्धकार को लील लेने के लिए दृढ प्रतिज्ञ है|

इन्ही शब्दों के साथ, आपके लेखन को “विज्ञान” पत्रिका के माध्यम से जन साधारण तक पहुंचाने में मुझे अपार हर्ष का अनुभव हो रहा है | आशा है, आप सब को बाबा अघोरीनाथ का विज्ञान विषयों पर विचारशील लेखन पसंद आएगा और मार्गदर्शक सिद्ध होगा |

सम्पादक…”विज्ञान पत्रिका”

aghorinath ki dairy

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About the Author ()

Dr Sunil Kumar Verma is an experienced Principal Scientist with a demonstrated history of working in the research industry for more than 20 years. Skilled in Molecular Medicine, Genetics, Translational Research and Wildlife Forensics, Dr Verma has done his doctorate from the University of Oxford. UK.

He had been the inventor of ‘Universal Primer Technology’ (US Patent 7141364), which led to the establishment of India’s first wildlife forensics cell in the LaCONES of CCMB to provide wildlife forensics services to the nation.

He is also the recipient of several national and international awards and honours, including the 2008 CSIR Technology Award, the 2009 NRDC Meritorious Invention Award of Govt. of India and the 2009 BioAsia Innovation Award in recognition of his contribution to Indian science and technology.

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