किड़नी स्टोन उर्फ़ पथरी

| June 12, 2017 | 5 Comments

एक थे मलिक साहब। हमारे साथ पढ़ते थे पंतनगर विश्वविद्यालय में।

अविभाजित उत्तर प्रदेश के सबसे खूबसूरत शहर से थे, जहाँ कालान्तर में हमने अपनी ज़िन्दगी के 8 साल 8 महीने और 18 दिन बड़ी शान से गुजारे। जी हाँ, दून वैली। पहाड़ों की रानी मसूरी से मात्र 35 किलोमीटर दूर।

उनकी बस एक ही समस्या थी – भाई पथरी हो गी!

अरे मलिक साहब कैसे हो गई?

भाई वो देहरादून का पाणी है ना, बोहोत हार्ड है, ससुरे में कैल्शियम बोहोत है। जिब पाणी मै कैल्शियम जादै हो तो पथरी हो जा।

कम-ओ-बेश यही ख़यालात ज्यादातर लोगों के होते हैं। तो ऐसी ग़लतफ़हमी पाले सभी भाई-बहन आज ही यह ग़लतफ़हमी दिमाग से निकाल दें कि पानी के कैल्शियम का आपके किड़नी में बनने वाली पथरी से कोई सम्बन्ध है।

कोई सम्बन्ध नहीं है। अगर ऐसा होता तो सारे गढ़वालियों और कुमाउनियों और हिमाचलियों और कश्मीरियों को गुर्दे की पथरी हो चुकी होती। ऐसा है क्या? नहीं है।

वास्तव में पानी का कैल्शियम इसके लिए जिम्मेदार है ही नहीं। जिम्मेदार हैं आप स्वयं। जो पानी पीते ही नहीं।

अगर आप दिन में 10 गिलास अर्थात साढ़े तीन लीटर से कम पानी पीयेंगे तो आपको प्रसाद में पत्थर ही मिलेंगे। फिर घूमते रहना किडनी हॉस्पिटल के चक्कर काटते।

किडनी स्टोन के लिए मूलतः जिम्मेदार है पानी का कम पीया जाना। सोने में सुहागा तब हो जाता है जब आप प्रोटीन खाते हैं ज्यादा और पानी पीते हैं कम। तो यूरिक एसिड बनता है खूब और पानी ना पीने के कारण बाहर वह निकल नहीं पाता और निर्माण करता है किडनी स्टोन का।

किडनी में यूरिक एसिड की मात्रा ज्यादा होने से किडनी के वातावरण की पीएच हो जाती है कम, और पीएच कम होते ही किडनी स्टोन बनने लगते हैं।

अब बात करते हैं दूसरे शिगूफ़े की… डॉक्टर के पास जाओ, हर दूसरे तीसरे मरीज को बोलेगा कि खून में कैल्शियम और विटामिन डी की जाँच कराओ, और ज्यादातर लैब रिपोर्ट में कैल्शियम और विटामिन डी बताया जाता है कि कम है।

अब डॉक्टर लिख देता है कि कैल्शियम की गोली खाओ, और विटामिन डी के कैप्सूल खाओ – या ज्यादातर केस में कहता है कि विटामिन डी का टीका लगवाओ।

और बस खेल चालू। कैल्शियम की गोली खिलवाने लगता है और जोर देता है कि विटामिन डी का टीका लिया जाए। सात हज़ार रूपये का आता है। खुले बाजार में भी नहीं बिकता। कुछ खास कंपनियों के रिप्रेजेंटेटिव से ही खरीदना पड़ता है। बस डॉ साहब के iphone की क़िस्त का तो इंतज़ाम हो गया। अब साल भर तक क़िस्त आप भरना डॉ साहब के मोबाइल की। फिर साल भर बाद किडनी हस्पताल के डॉक्टर की नई गाड़ी की क़िस्त आप ही भरेंगे। उस पट्ठे ने अपना भी जुगाड़ कर लिया और अपने दोस्त का भी।

एक दिन में 800 इंटरनेशनल यूनिट विटामिन डी और 800 से 1200 मिलीग्राम कैल्शियम से ज्यादा खाओगे तो मोबाइल और गाड़ी दोनों की क़िस्तें आप ही भरेंगे।

कितने डॉक्टर हैं जो कैल्शियम और विटामिन डी चालू करने के बाद समय-समय पर इन दोनों की आपके खून में जाँच करवाते हैं। अगर कोई भला डॉक्टर करने की सिफारिश करता भी है तो आप सुपर डॉक्टर बन जाते हैं और सोचते हैं कि अभी तो जाँच करवाई थी। बार-बार क्या करवाना!! ये डॉक्टर तो जाँच-वाचं लिखते ही रहते हैं।

अरे भाई अगर खून में कैल्सियम का स्तर बढ़ गया तो किडनी स्टोन हो जायेगा।

चलो कोई बात नहीं। तुड़वा लेना पत्थर……डॉक्टर से। डॉक्टर को भी जीने का अधिकार है कि नहीं!!!!

इसके अलावा दो हॉर्मोन और हैं। एक है कैल्सीटोनिन और दूसरा है पैराथाइरॉइड हॉर्मोन। इन दोनों में से कोई भी रूठ जाये तो बस खामियाज़ा आपको भुगतना पड़ता है।

इन दोनों का काम है ब्लड प्लाज्मा में कैल्शियम के संतुलन को बनाए रखना। जैसे ही खून में आयोनाइज़्ड कैल्शियम का स्तर एक निश्चित बिंदु से ऊपर जाता है तो थाइरोइड ग्रंथि से कैल्सीटोनिन आकर उसे नार्मल कर देता है और अगर यह स्तर नीचे गिर जाए तो पैराथाइरॉइड ग्रंथि से पैराथाइरॉइड हॉर्मोन आकर इसे बढ़ा देता है।

अगर थाइरोइड ग्रंथि या पैराथाइरॉइड ग्रंथि ठीक से काम ना कर रही हों तो आप समझ सकते है कि कैल्सीटोनिन और पैराथाइरॉइड हॉर्मोन की उपलब्धता प्रभावित होगी – जो फाइनली किड़नी स्टोन को जन्म दे सकती है।

आप सोच रहे होंगे कि पैराथाइरॉइड हॉर्मोन कोई जादुगर है। ब्लड प्लाज्मा में आयोनाइज़्ड कैल्शियम कम हुआ तो ये पैराथाइरॉइड हॉर्मोन जादू की छड़ी घुमाएगा और कैल्शियम पैदा।

नहीं ऐसा नहीं है। है वैसे जादू ही, भगवान् का जादू। कैसे? यह पैराथाइरॉइड हॉर्मोन आँतों से कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ा देता है। बहुत लंबी प्रक्रिया है इसकी। किसी और पोस्ट में बताऊंगा। आप बस अभी इतना समझ लो कि अगर थाइरोइड ग्रंथि से कैल्सीटोनिन ना आये तो ब्लड प्लाज्मा में कैल्शियम का स्तर खतरनाक तऱीके से बढ़ जाता है। जो किड़नी स्टोन को जन्म देता है।

और अगर पैराथाइरॉइड ग्रंथि से ज्यादा पैराथाइरॉइड हॉर्मोन आ जाये तो? तो भी वही होगा। ब्लड प्लाज्मा में आयोनाइज़्ड कैल्शियम बढ़ जायेगा। जो किड़नी स्टोन को जन्म देगा।

पैराथाइरॉइड हॉर्मोन कब ज्यादा आएगा? अगर पैराथाइरॉइड ग्रंथि किसी ट्यूमर आदि की वजह से हायपरएक्टिव हो गई है तो पैराथाइरॉइड हॉर्मोन का उत्पादन ज्यादा होगा। कैल्शियम मेटाबोलिज्म इतना आसान नहीं है बाबु मोशाय!!!!

और हाँ…….मस्त होकर पानी पीयो, पानी में कैल्शियम ज्यादा हो या कम। टेंशन नक्को। किड़नी स्टोन हो ही जाये तो मुझसे संपर्क कर लेना।

Kidney Stone

फोटो: बंशी बाबा के शरीर के खनिजों से बना पत्थर (वर्ष 2005)

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Sanjeev Kumar Verma. किड़नी स्टोन उर्फ़ पथरी. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/1079/. Retrieved September 23, 2017.

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Comments (5)

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  1. Dr. Piyush Chaudhary says:

    Uric acid is not main pathologic agent for renal calculi. These calculi are of various compostions like oxalates and phosphates.
    Dietary habits and predisposition are also responsible. As you mentioned Calcium and Vit D3 supplements are responsible for calculi – but I differ from this view. Renal calculi can be formed in young adults and also teenage. While calcium & vit D3 is generally prescribed in patients who fall in totally different category

    • Sunil Kumar Verma says:

      Sir,

      I did quick search on this and found different views based on scientific studies:

      1. People with a history of kidney stones may have a higher risk of recurrence if they use calcium supplements.
      This study was based on data from more than 2000 patients. (https://goo.gl/2v0Eze)

      2. Long-term calcium and vitamin D supplement use may be linked to increased risk of kidney stones.
      Calcium and vitamin D supplements are associated with high calcium levels in the blood and urine, which could increase the risk of kidney stones (https://www.sciencedaily.com/releases/2012/06/120626131744.htm)

      3. Vitamin D Supplements May Not Raise Risk for Kidney Stones

      According to this study – taking ‘vitamin D’ does not increase the risk for kidney stones. People’s age, gender and weight, however, may play a role in developing the condition. (https://goo.gl/e6HWFT)

      There are two recent studies that tell a completely opposite story –

      “Calcium stone-forming patients have lower mean levels of vitamin D and a higher percentage of hypovitaminosis D than in non-stone-forming patients. This was only related to increased iPTH levels, with urine calcium and other lithogenic parameters having no obvious effect.”

      i.e. Deficiency of Vit D can also cause kidney stone!

      Read this – https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/27093967
      and this – https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/26494294

      Dr Sunil Kumar Verma

    • Banshi Baba says:

      You are very much correct Dr. Piyush. Calculi may be due to so many factors and may be made-up of several compounds. Summing up all these in a single article is not possible. Let the public start thinking on these lines…

  2. डॉ सुनील कुमार वर्मा says:

    और हाँ एक और खास स्टडी है जो इस सब्जेक्ट को अलग ही एंगल देती है –

    इस स्टडी के अनुसार – Increased exposure to sunlight seems to be the most likely cause of the hypercalciuria.
    अर्थात – ज्यादा दिनों तक धूंप में रहने वालो को भी किडनी स्टोन होने का खतरा बढ़ जाता है (http://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S0140673675918309)
    वैसे इसको भी शरीर में पानी की कमी से जोड़कर देखा जा सकता है, क्योकि ज्यादा धूंप में रहने से ज्यादातर पानी पसीना बनकर ही निकल जाता है |

    हालाँकि पानी की हार्डनेस के कारण – पेशाब में तो कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है – किन्तु इसका ज्यादा पथरी होने से लिंक कम ही नजर आता है| (http://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S0022534701636954)

    अतः संक्षेप में हम यह कह सकते हैं कि – पानी चाहे हार्ड हो या मिनरल वाटर – बस पीये जाओ (एक दिन में कम से कम 3 लीटर)|

    एक और नियम – अगर आपको कोई गिलास में पानी दे – तो गिलास में थोडा सा भी छोड़ना नहीं है| पूरा पी लेना है

  3. Bhaskar Ganguly says:

    I uphold Dr. Piyush’s comments.

    Other than drinking water, taking 4-5 drops of a urinary alkalizer, especially during summers, really helps. However, those with compromised kidney function must choose the alkalizer with care.

    A homoepathic combination drug, Stonil, and a herb, locally known as Pattharchatti (पत्थरचट्टी), works wonders.

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