इनफर्टिलिटी एवं मोटापा – एक सीधा सम्बन्ध

| June 22, 2017 | 0 Comments

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पोस्टिंग के दौरान जब मैं ‘फील्ड विजिट’ पर जाता था, तो किसान अक्सर शिकायत करते पाये जाते थे – “देखियो डॉ साहब म्हारी भैंस गाभिन ही ना होत्ती”।

मैं उससे पूछता…क्या क्या खिलाते हो।

“अजी मैं तो हरा चारा बि खूब खुआउँ, भुस बि खुआउँ अर दाणा बि खूब ई दूँ। अजी खल बिनौला अर चणे छिकमा दूँ जी। अजी खाणे पीने की कमी ना म्हारै। खूब ठाड़ी हो री उँ तो। बस गाभिन ही नि होत्ती”।

फिर मैं उन्हें समझाता कि “चौधरी साहब थोड़ा रहम करो इस पर, थोड़ा कम खिलाया करो। या तो घणी मोटी हो गी। अर जिब लो इसकी चर्बी कम ना हो या गाभिन ना होवै”।

फिर मैं उसकी डाइट लिख कर दे देता और अगले विजिट पर वह किसान बताता कि  – काम हो ग्या जी |

द सेम इज एप्लीकेबल फॉर वुमन आल्सो।

आपने लेबर क्लास को इनफर्टिलिटी सेंटर के चक्कर लगाते देखा है? बहुत कम। इनफर्टिलिटी सेंटर पर कौन अधिक मिलता है? खाते-पीते घरों की औरतें।

‘मोटापा’ इन ‘इनफर्टिलिटी सेंटर्स’ के लिए ‘संजीवनी’ का काम करता है। ‘ओबीज वीमेन’ में ओवुलेशन की दर घट जाती है और किसी भी इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट का रेस्पॉन्स भी बहुत ही कम मिलता है

और अगर कन्सेप्शन हो भी जाये तो गर्भपात के चांसेस बढ़ जाते हैं। मोटापा बढ़ने से इन्सुलिन रेसिस्टेन्स बढ़ जाता है जिसके कारण ओवुलेशन ही नहीं होता, और अगर होगा भी तो ओवम की क्वालिटी पुअर होगी।

क्वालिटी भी अगर ‘सो-सो रही तो इम्प्लांटेशन डिफेक्टिव होगा, या फिर फर्टिलाइज़्ड एग का गर्भ में रिसेप्शन पुअर होगा।

यहाँ तक गाड़ी किसी तरह पहुँच भी गई तो प्रेग्नेंसी को स्थापित करने वाले हार्मोन्स का संतुलन गड़बड़ा जायेगा।

कुल मिलाकर भारत की जनसँख्या नहीं बढ़ेगी। जेंडर इकविटी का जमाना है भाई। अकेले औरतें ही प्रभावित नहीं होंगी। जेंट्स में भी मोटापे के कारण ‘टेस्टोस्टिरोन’ का लेवल घट जाता है। इसलिए इनफर्टिलिटी सेंटर के चक्कर लगाने से पहले वजन जरूर कम कर लेना। कृपा शायद वैसे ही आ जाये….

बंशी बाबा

Fat woman - इनफर्टिलिटी, मोटापा

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Sanjeev Kumar Verma. इनफर्टिलिटी एवं मोटापा – एक सीधा सम्बन्ध. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/1154/. Retrieved September 23, 2017.

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