दशानन के दस सिरों की प्रस्तावना

| October 22, 2017 | 0 Comments

जैसे घट-घट में राम है उसी तरह घर-घर में रावण भी है।

दस लेखो की इस सीरीज में हम आपको रावण से मिलवाते हैं। जी हाँ वही प्रकांड पंडित महा विद्वान् राक्षस रावण जिसे दशानन भी कहा जाता है।

हमारा दशानन लंका में नहीं रहता। वह रहता है आपकी रसोई में। आप रोज उसे खाते हैं और आपको पता भी नहीं चलता | प्रकांड पंडित किन्तु वर्ण से राक्षस दशानन आपको हानि भी पहुंचा सकता है और लाभ भी |

कौन है वो रावण? कैसा दिखता है? हम उसे कैसे खाते हैं? जब हम उसे खाते है तो हमें क्या हानि होती है, और क्या लाभ हो सकता है? आइये जानते है दशानन के दस सिरों का यह राज दस लेखो की इस सीरीज में |

यह दशानन रहता है आपके किचन में। इसके सिर हैं दस।

पहले सिर का नाम है प्रोटियेज इन्हिबिटर्स (Protease Inhibitors)

दूसरे का लाइपेज इन्हिबिटर्स (Lipase Inhibitors)

तीसरे का एमाइलेज इन्हिबिटर्स (Amylase Inhibitors)

चौथा रावण है फाइटिक एसिड (Phytic acid)

पांचवा ऑक्सलिक एसिड (Oxalic acid)

छठा रावण ग्लुकोसिनोलेट (Glucosinolate)

सातवें सिर का नाम है लैक्टिनस (Lectins)

आठवें का पोलीफिनॉल्स व टैनिन्स (Polyphenols and Tannins)

नवे सिर का नाम है सैपोनिन्स (Saponins) व दसवां सिर है गॉसिपोल (Gossypol)

ये दशानन आपको चुपके-चुपके हानि पहुँचाता रहता है और आप हंसी ख़ुशी स्वयं अपने हाथों से इसका स्वागत करके इसे अपने पेट में विराजमान कर देते है।

और यह दशानन अपनी आदत से मजबूर अपनी आदत के मुताबिक अपना काम करता रहता है और आपको कमजोर करता रहता है।

आप इससे बच सकते हैं अगर आप इसे पहचानते हो। तो मैं अपनी आने वाली दस पोस्ट्स में आपको इस दशानन के दसों सिरों से परिचित करवाऊंगा। बोलो दशानन महाराज की जय।

बंशी विचारक

Ravan

दशानन के दस सिरों की प्रस्तावना

Cite this Article


Sanjeev Kumar Verma. दशानन के दस सिरों की प्रस्तावना. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/1444/. Retrieved January 20, 2018.

Tags:

blank

About the Author ()

डॉ संजीव कुमार वर्मा, पीएचडी (पशु पोषण), पीजीडीटीएमए; एआरएस भारतीय कृषि अनुसंधान सेवा (ARS) के 1996 बैच के वैज्ञानिक हैं और वर्तमान में भाकृअनुप – केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं| इससे पूर्व डॉ वर्मा अनेक भारतीय संस्थानों में वैज्ञानिक सेवाएं दे चुके हैं। डॉ वर्मा ने लगभग नौ वर्ष तक पहाड़ी और पर्वतीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध के उपरांत लगभग 5 वर्ष तक द्वीपीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध कार्य किया। इसके बाद लगभग पांच वर्ष तक उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में गोवंश पर अनुसंधान करने के बाद लगभग एक वर्ष तक दक्षिणी कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में मुर्गीपालन पर अध्ययन किया। डॉ वर्मा कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त पुस्तकों के लेखक होने के साथ-साथ वर्तमान में ‘एनिमल न्यूट्रिशन सोसायटी ऑफ इंडिया’, करनाल के ‘वाइस प्रेजीडेंट’ भी हैं और पशु पोषण के क्षेत्र में लगातार उच्च कोटि के अनुसन्धान एवं आम लोगों, किसानों एवं विद्यार्थियों तक विज्ञान के प्रचार प्रसार में कार्यरत हैं | सोशल मीडिया में डॉ वर्मा “बंशी विचारक” के नाम से जाने जाते हैं और देश के हजारों वैज्ञानिकों, छात्रों, एवं किसानों द्वारा लगातार फॉलो किये जाते हैं |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *