दशानन के दस सिर
दशानन का दूसरा सिर: लाइपेज इनहिबिटर

| October 23, 2017 | 0 Comments

जैसे घट-घट में राम है उसी तरह घर-घर में रावण भी है।

दस लेखो की इस सीरीज में हम आपको रावण से मिलवाते हैं। जी हाँ वही प्रकांड पंडित महा विद्वान् राक्षस रावण जिसे दशानन भी कहा जाता है।

हमारा दशानन लंका में नहीं रहता। वह रहता है आपकी रसोई में। आप रोज उसे खाते हैं और आपको पता भी नहीं चलता | प्रकांड पंडित किन्तु वर्ण से राक्षस दशानन आपको हानि भी पहुंचा सकता है और लाभ भी |

कौन है वो रावण? कैसा दिखता है? हम उसे कैसे खाते हैं? जब हम उसे खाते है तो हमें क्या हानि होती है, और क्या लाभ हो सकता है? आइये जानते है दशानन के दस सिरों का यह राज दस लेखो की इस सीरीज में |

इस सीरीज का प्रथम लेख था, दशानन का पहला सिर…. प्रोटीएज इनहिबिटर।”

प्रस्तुत है इस सीरीज का द्वितीय लेख – दशानन का दूसरा सिर: लाइपेज इनहिबिटर।

ये वह सब्सटांस होते हैं जो इंटेस्टाइन में पैंक्रियाज द्वारा स्रावित लाइपेज एंजाइम की एक्टिविटी को बाधित करते हैं।

लाइपेज एंजाइम के काम में बाधा उत्पन्न करने से क्या होगा? वसा का पाचन नहीं हो पाएगा और जब वसा का पाचन नहीं होगा तो उससे जो ऊर्जा मिलनी थी वह नहीं मिलेगी और व्यक्ति कमजोर हो जाएगा। वसा या फैट का पाचन ना होने से वह मल के साथ बाहर निकल जायेगा।

दशानन का दूसरा सिर होने के नाते इसका फ़र्ज़ बनता है कि यह दानव का रूप भी दिखाए और देवता का भी। पहले से ही कमजोर और पतले व्यक्ति के लिए यह दानव है तो मोटे-ताजे, खाते-पीते घरों के लोगों के लिए यह देवता है।

लाइपेज इनहिबिटर की एक्टिविटी के कारण पतला व्यक्ति और भी पतला हो जाएगा। इसलिए उसके लिए यह दानव है। इसके प्रभाव से मोटे व्यक्ति का मोटापा कम हो जाएगा तो उसके लिए यह देवता है।

ये मिलता किस-किस पौधे में है? यह मिलता है कच्ची मूंगफली में जिसमें इसकी इनहिबिटरी प्रोपर्टी 42 प्रतिशत तक होती है। इसीलिए दादी माँ बोलती थी ना… मका कच्ची मूमफली मत खा।

यह मिलता है मंकी फ्रूट में। मंकी फ्रूट बोले तो बरहड़। इसमें लाइपेज इनहिबिटर की एक्टिविटी है 82 प्रतिशत।

यह मिलता है कैरमबोला में। अरे वही स्टार फ्रूट या कमरख, खट्टा खट्टा, लड़कियों का पसंदीदा फल।

यह मिलता है हींग, जायफल, काले जीरे, मेथी, सौंफ और इसके जोड़ीदार सनाय में। यह मिलता है चिकोरी में। वही चिकोरी जो कॉफ़ी में मिलाई जाती है। यह मिलता है दालचीनी में। वही दालचीनी जो बिरयानी की जान है। यह मिलता है अनार, नाशपाती, शहतूत, अंजीर, पिस्ता, डियोस्कोरिया बोले तो याम में। यह मिलता है आम के पत्तों और छाल में। मूली, पुदीने, करेले, मोरिंडा बोले तो नोनी में और मोरिंगा बोले तो ड्रमस्टिक में।

अब समझ में आया कि साउथ इंडियन इतने छरहरे क्यों होते हैं! रोजाना ड्रमस्टिक खाते हैं तो ड्रमस्टिक जैसे पतले तो होंगे ही।

यह मिलता है कंगनी बोले तो मंडुआ में। पहाड़ पर उगाया जाता है मंडुआ। रोटी और खीर बनाते हैं वो लोग इसकी। तभी तो पतले होते हैं। लाइपेज इनहिबिटर अगर दुश्मन है तो दोस्त भी है। पसंद अपनी-अपनी ख्याल अपना-अपना। बोलो दशानन महाराज की जय।

बंशी विचारक

रावण

दशानन के दस सिर सीरीज का द्वितीय लेख

Cite this Article


Sanjeev Kumar Verma. दशानन के दस सिर
दशानन का दूसरा सिर: लाइपेज इनहिबिटर
. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/1467/. Retrieved January 20, 2018.

Tags:

blank

About the Author ()

डॉ संजीव कुमार वर्मा, पीएचडी (पशु पोषण), पीजीडीटीएमए; एआरएस भारतीय कृषि अनुसंधान सेवा (ARS) के 1996 बैच के वैज्ञानिक हैं और वर्तमान में भाकृअनुप – केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं| इससे पूर्व डॉ वर्मा अनेक भारतीय संस्थानों में वैज्ञानिक सेवाएं दे चुके हैं। डॉ वर्मा ने लगभग नौ वर्ष तक पहाड़ी और पर्वतीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध के उपरांत लगभग 5 वर्ष तक द्वीपीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध कार्य किया। इसके बाद लगभग पांच वर्ष तक उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में गोवंश पर अनुसंधान करने के बाद लगभग एक वर्ष तक दक्षिणी कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में मुर्गीपालन पर अध्ययन किया। डॉ वर्मा कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त पुस्तकों के लेखक होने के साथ-साथ वर्तमान में ‘एनिमल न्यूट्रिशन सोसायटी ऑफ इंडिया’, करनाल के ‘वाइस प्रेजीडेंट’ भी हैं और पशु पोषण के क्षेत्र में लगातार उच्च कोटि के अनुसन्धान एवं आम लोगों, किसानों एवं विद्यार्थियों तक विज्ञान के प्रचार प्रसार में कार्यरत हैं | सोशल मीडिया में डॉ वर्मा “बंशी विचारक” के नाम से जाने जाते हैं और देश के हजारों वैज्ञानिकों, छात्रों, एवं किसानों द्वारा लगातार फॉलो किये जाते हैं |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *