दशानन के दस सिर
दशानन का तीसरा सिर: एमाइलेज इनहिबिटर

| October 24, 2017 | 0 Comments

जैसे घट-घट में राम है उसी तरह घर-घर में रावण भी है।

दस लेखो की इस सीरीज में हम आपको रावण से मिलवाते हैं। जी हाँ वही प्रकांड पंडित महा विद्वान् राक्षस रावण जिसे दशानन भी कहा जाता है।

हमारा दशानन लंका में नहीं रहता। वह रहता है आपकी रसोई में। आप रोज उसे खाते हैं और आपको पता भी नहीं चलता | प्रकांड पंडित किन्तु वर्ण से राक्षस दशानन आपको हानि भी पहुंचा सकता है और लाभ भी |

कौन है वो रावण? कैसा दिखता है? हम उसे कैसे खाते हैं? जब हम उसे खाते है तो हमें क्या हानि होती है, और क्या लाभ हो सकता है? आइये जानते है दशानन के दस सिरों का यह राज दस लेखो की इस सीरीज में |

इस सीरीज का प्रथम लेख था, दशानन का पहला सिर…. प्रोटीएज इनहिबिटर।”

और द्वितीय लेख था – दशानन का दूसरा सिर: लाइपेज इनहिबिटर। 

प्रस्तुत है इस सीरीज का तीसरा लेख – दशानन का तीसरा सिर: एमाइलेज इनहिबिटर

दशानन का तीसरा सिर है एमाइलेज इनहिबिटर। जो कार्बोहाइड्रेट हम खाते हैं उसके कई रूप हैं। जैसे मोनोसैकराइड्स, डाईसैकराइड्स, पोलिओल्स, ओलिगोसैकराइड्स और पॉलीसैकराइड्स।

पॉलीसैकराइड्स का एक प्रकार है स्टार्च और स्टार्च बना होता है अमाईलोज और अमाईलोपेक्टिन से। आप सब जानते ही हैं कि स्टार्च आलू में खूब होता है और आलू खाने वाले धीरे-धीरे आलू जैसे ही हो जाते हैं गोल मटोल। ये आलू का स्टार्च खूब ऊर्जा देता है जो फाइनली फैट की फॉर्म में शरीर में जमा हो जाती है।

स्टार्च वैसे होता है सभी अनाजों में। इस स्टार्च को पचाने के लिए कुदरत ने एक एंजाइम दिया है सभी को – जिसका नाम है एमाइलेज। कीड़े-मकोड़ों के पास भी एमाइलेज है और हमारे पास भी। बस दोनों में थोड़ा सा अंतर है। पौधों के पास अगर स्टार्च है तो उनको कीड़ों-मकोड़ों से बचाने के लिए कुदरत ने पौधों को एमाइलेज इनहिबिटर भी दिया है। इसी के कारण कुछ अनाजों में कीड़े कम लगते हैं।

चौलाई, रागी, जौ, ज्वार, मक्का, गेहूं और दालों में एमाइलेज इनहिबिटर होता है। मगर इनमें से केवल दालों में मौजूद एमाइलेज इनहिबिटर मनुष्यों में स्रावित होने वाले एमाइलेज का इनहिबिशन करता है।

अनाजों में पाया जाने वाला एमाइलेज इनहिबिटर कीड़ों के एमाइलेज एंजाइम पर ज्यादा काम करता है मनुष्यों के एमाइलेज एंजाइम पर कम।

चूंकि यह दशानन का सिर है तो यह जहर भी है और दवा भी। राक्षस है तो देवता भी है। तो आप इसके दैवीय गुण का फायदा उठाइये और मोटापे से बचने के लिए अपने भोजन में दालों की मात्रा बढाइये।

चूंकि दालों में पाया जाने वाला एमाइलेज इनहिबिटर ही मनुष्यों के एमाइलेज एंजाइम पर काम करता है। जिसके कारण स्टार्च का पाचन सम्भव नहीं हो पाता। लिहाजा कम ऊर्जा की प्राप्ति होती है और कम फैट जमा होता है। अंकुरित दालें और भी बेहतर। सबसे बेहतर राजमा।

आपने सुना भी होगा कि राजमा सबसे बढ़िया फैट कटर है। यह कमाल एमाइलेज इनहिबिटर के कारण ही है। लंच में बस रात भर भिगोया हुआ राजमा खाइये। मराठी खाते हैं ना ‘ऊसल’ बनाकर। चटपटा भी होता है और फैट कटर भी है।

राजमे के अलावा यह मिलता है सेम फली, बाकला, मूंग, उर्द, अरहर, लोबिया, राइसबीन और उन सभी बीन्स में जिनका नाम आपको याद हो।

तो दशानन के तीसरे सिर का सदुपयोग कीजिये। खासतौर से वो सभी लोग जो गोल-मटोल बने घूम रहे हैं। बोलो दशानन महाराज के तीसरे सिर की जय।

बंशी विचारक

रावण

दशानन के दस सिर सीरीज का तृतीय लेख

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Sanjeev Kumar Verma. दशानन के दस सिर
दशानन का तीसरा सिर: एमाइलेज इनहिबिटर
. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/1471/. Retrieved January 20, 2018.

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About the Author ()

डॉ संजीव कुमार वर्मा, पीएचडी (पशु पोषण), पीजीडीटीएमए; एआरएस भारतीय कृषि अनुसंधान सेवा (ARS) के 1996 बैच के वैज्ञानिक हैं और वर्तमान में भाकृअनुप – केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं| इससे पूर्व डॉ वर्मा अनेक भारतीय संस्थानों में वैज्ञानिक सेवाएं दे चुके हैं। डॉ वर्मा ने लगभग नौ वर्ष तक पहाड़ी और पर्वतीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध के उपरांत लगभग 5 वर्ष तक द्वीपीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध कार्य किया। इसके बाद लगभग पांच वर्ष तक उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में गोवंश पर अनुसंधान करने के बाद लगभग एक वर्ष तक दक्षिणी कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में मुर्गीपालन पर अध्ययन किया। डॉ वर्मा कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त पुस्तकों के लेखक होने के साथ-साथ वर्तमान में ‘एनिमल न्यूट्रिशन सोसायटी ऑफ इंडिया’, करनाल के ‘वाइस प्रेजीडेंट’ भी हैं और पशु पोषण के क्षेत्र में लगातार उच्च कोटि के अनुसन्धान एवं आम लोगों, किसानों एवं विद्यार्थियों तक विज्ञान के प्रचार प्रसार में कार्यरत हैं | सोशल मीडिया में डॉ वर्मा “बंशी विचारक” के नाम से जाने जाते हैं और देश के हजारों वैज्ञानिकों, छात्रों, एवं किसानों द्वारा लगातार फॉलो किये जाते हैं |

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