ठंडा ठंडा पानी

| November 14, 2017 | 0 Comments

1978 में एक फ़िल्म आई थी ‘पति पत्नी और वो’। कॉमेडी मूवी थी और स्क्रीनप्ले के लिए कमलेश्वर जी को फ़िल्मफ़ेअर अवार्ड भी मिला था।

इसी का एक गाना था… ठंडे-ठंडे पानी से नहाना चाहिए… उस समय काफी दिमाग लगाया कि आखिर ठंडे पानी से ही क्यों?

मगर समझ नहीं आया। फिर विज्ञान पढ़ा तो पता चला कि यदि सर्दियों में नहाना है तो ठंडे पानी से ही नहाना चाहिए। सर्दियों में गर्म पानी से नहाने से फायदा होने के बजाय नुकसान ज्यादा हैं।

क्या-क्या नुकसान हैं?

1. सबसे पहला नुकसान है कि गर्म पानी से नहाने से फर्टिलिटी प्रभावित होती है। आजकल सभ्रांत घरों में बाथटब भी प्रचलन में आ गए हैं और गर्म पानी से भरे बाथटब में तीस मिनट से अधिक रोजाना गुजारने से आप ‘पापा’ शब्द सुनने से वंचित हो सकते हैं। इसी लिए सलाह दी जाती है कि जिन लोगों को भारत की बेतहाशा बढ़ती हुई जनसंख्या में अपना बहुमूल्य योगदान देना है वह सब अनिवार्य रूप से ठंडे पानी से ही स्नान करें।

2. गर्म पानी से स्नान करने से त्वचा शीघ्रता से रूखी हो जाती है।

3. गर्म पानी से नहाने के बाद चुस्ती आने के बजाय सुस्ती आती है और सोने का दिल करता है। जबकि ठंडे पानी से नहाने पर चुस्ती आती है और व्यक्ति अपने कार्यस्थल पर अलर्ट होकर काम करता है और उसकी उत्पादकता अधिक होती है।

4. गर्म पानी से नहाने वालों की त्वचा पर झुर्रियां जल्दी पड़ती हैं। इसलिए अगर आप ज्यादा समय तक जवान दिखना चाहते हैं तो ठंडे पानी से स्नान करें।

5. गर्म पानी से नहाने से बालों की जड़ों को भारी नुकसान पहुंचता है और बाल ज्यादा टूटते हैं इसलिए अपने चमन को हरा-भरा रखने के लिए ठंडे पानी से स्नान करें।

6. गर्म पानी से नहाने पर इसकी आदत से पड जाती है और फिर आदमी गर्मी के मौसम में भी गर्म पानी से ही नहाना चाहता है। इसलिए स्वयं की आदत खराब मत करें। इसके अलावा प्रयोगों द्वारा यह भी सिद्ध हुआ है कि गर्म पानी से नहाने से त्वचा के नीचे मौजूद रक्त वाहिकाएँ फैल जाती हैं जिसके कारण खून से ज्यादा ऊष्मा वातावरण में चली जाती है जिसके कारण व्यक्ति के शरीर का तापमान और भी कम हो जाता है जिसके कारण व्यक्ति को और भी ज्यादा ठंड लगती है।

इसके विपरीत ठंडे पानी से नहाने पर रक्त वाहिकाएँ सिकुड़ जाती हैं और कम ऊष्मा का क्षरण होता है और व्यक्ति के शरीर में गर्मी बनी रहती है और व्यक्ति को ठंड नहीं लगती। इसलिए कोशिश करें कि ठंडे पानी से ही नहाया जाए।

बंशी विचारक

Cite this Article


Sanjeev Kumar Verma. ठंडा ठंडा पानी. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/1557/. Retrieved January 20, 2018.

Tags:

blank

About the Author ()

डॉ संजीव कुमार वर्मा, पीएचडी (पशु पोषण), पीजीडीटीएमए; एआरएस भारतीय कृषि अनुसंधान सेवा (ARS) के 1996 बैच के वैज्ञानिक हैं और वर्तमान में भाकृअनुप – केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं| इससे पूर्व डॉ वर्मा अनेक भारतीय संस्थानों में वैज्ञानिक सेवाएं दे चुके हैं। डॉ वर्मा ने लगभग नौ वर्ष तक पहाड़ी और पर्वतीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध के उपरांत लगभग 5 वर्ष तक द्वीपीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध कार्य किया। इसके बाद लगभग पांच वर्ष तक उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में गोवंश पर अनुसंधान करने के बाद लगभग एक वर्ष तक दक्षिणी कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में मुर्गीपालन पर अध्ययन किया। डॉ वर्मा कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त पुस्तकों के लेखक होने के साथ-साथ वर्तमान में ‘एनिमल न्यूट्रिशन सोसायटी ऑफ इंडिया’, करनाल के ‘वाइस प्रेजीडेंट’ भी हैं और पशु पोषण के क्षेत्र में लगातार उच्च कोटि के अनुसन्धान एवं आम लोगों, किसानों एवं विद्यार्थियों तक विज्ञान के प्रचार प्रसार में कार्यरत हैं | सोशल मीडिया में डॉ वर्मा “बंशी विचारक” के नाम से जाने जाते हैं और देश के हजारों वैज्ञानिकों, छात्रों, एवं किसानों द्वारा लगातार फॉलो किये जाते हैं |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *