दशानन का आठवां सिर: पॉलीफिनोल्स व टैनिन्स

| November 16, 2017 | 0 Comments

दशानन का आठवां सिर है… पॉलीफिनोल्स व टैनिन्स।

यही वह पदार्थ है जिसके कारण खाने के चीजों में कसैलापन आता है। कुदरत ने इसे भी पौधों को इसलिए दिया था कि वह अपनी रक्षा कर सकें कीड़े- मकोड़ों से और जंगली जानवरों से।

पहले बात करते हैं इसके रावण स्वरुप की।

भोजन में उपस्थित होने पर यह विभिन्न प्रोटीन और खनिज लवणों के साथ गुटबंदी कर लेता है और उनका पाचन और अवशोषण नहीं होने देता। सबसे अधिक प्रभाव डालता है आयरन, जिंक और कैल्शियम पर। मिलता है चाय, लौंग, जीरा, वनीला, दालचीनी, अखरोट, बादाम, स्ट्रॉबेरी, चना आदि में।

आयरन का अवशोषण ना होने से व्यक्ति में खून की कमी हो सकती है। इसके अलावा कब्ज हो सकता है और गम्भीर मामलों में इसोफैगस का कैंसर तक हो सकता है। इसलिए बच्चों और औरतों को चाय पीने से मना किया जाता है। औरतों को खासकर उन विशेष दिनों में।

इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि अगर चाय पीनी हो तो भोजन के एक घंटा पहले और एक घंटा बाद तक चाय बिल्कुल नहीं।

इसके अलावा एक चीज और है जिसके साथ चाय कभी भी पी जा सकती है और वह है लेमन। टैनिन आयरन का अवशोषण घटाता है और विटामिन सी तीन गुना बढ़ाता है। तो लेमन टी की चुस्की कभी भी ली जा सकती है। हाँ ग्रीन टी कभी भी चलेगी। उसमें तो एन्टी ऑक्सीडेंट भी होते हैं और फैट बर्निंग प्रोपर्टी भी।

अब आते हैं इसके रक्षक स्वरूप पर।

तो सबसे पहले बेवड़ों के लिए खुशखबरी। दारू में भी दशानन विराजमान हैं। जितनी महंगी दारू, उसके अंदर उतने ही परोपकारी दशानन। वाइन का रंग और टेक्सचर इसी बात पर निर्भर करता है कि उसकी एजिंग कराने के लिए किस किस्म की लकड़ी का बर्तन प्रयोग किया गया है। बांज की लकड़ी से बने बैरल में वाइन को सालों-साल रखने से उसका रंग और टेक्सचर डवलप होता है क्योंकि इस दौरान उसके अंदर लकड़ी से आकर टैनिन की मात्रा मिल जाती है। यही टैनिन उसे एक खास स्वाद भी देता है और यही टैनिन खुशखबरी का कारण है।

वाइन में मौजूद टैनिन वैस्कुलर हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद है। धमनियों को हार्ड कर देने वाले पेप्टाइड्स के उत्पादन को कम कर देता है यह टैनिन। धमनियों के हार्ड होने की बीमारी को कहते हैं अथेरोस्क्लेरोसिस। इसमें धमनियां धीरे-धीरे हार्ड होने लगती हैं और संकरी होने लगती हैं।

नतीजा हार्ट अटैक, स्ट्रोक्स और पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज। बोले तो कार्डियोवैस्कुलर डिजीज। तो बस बचना चाहते हो तो वाइन पर आ जाओ। मग़र धीरे-धीरे, हौले-हौले। हाई स्पीड यहाँ भी खतरनाक ही होगी।

बंशी विचारक

इस सीरीज का प्रथम लेख था, दशानन का पहला सिर…. प्रोटीएज इनहिबिटर।”

और द्वितीय लेख था – दशानन का दूसरा सिर: लाइपेज इनहिबिटर।

तीसरा लेख – दशानन का तीसरा सिर: एमाइलेज इनहिबिटर

चौथा लेख – दशानन का चौथा सिर: फाइटिक एसिड या फाइटेट।

दशानन का पांचवा सिर: ऑक्जेलिक एसिड या ऑक्सालेट

दशानन का छठा सिर था…. ग्लूकोसिनोलेट।

दशानन का सप्तम सिर: लेक्टिंस

क्रमश:

रावण

दशानन के दस सिर सीरीज का अष्टम लेख

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Sanjeev Kumar Verma. दशानन का आठवां सिर: पॉलीफिनोल्स व टैनिन्स. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/1560/. Retrieved December 14, 2017.

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About the Author ()

डॉ संजीव कुमार वर्मा, पीएचडी (पशु पोषण), पीजीडीटीएमए; एआरएस भारतीय कृषि अनुसंधान सेवा (ARS) के 1996 बैच के वैज्ञानिक हैं और वर्तमान में भाकृअनुप – केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं| इससे पूर्व डॉ वर्मा अनेक भारतीय संस्थानों में वैज्ञानिक सेवाएं दे चुके हैं। डॉ वर्मा ने लगभग नौ वर्ष तक पहाड़ी और पर्वतीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध के उपरांत लगभग 5 वर्ष तक द्वीपीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध कार्य किया। इसके बाद लगभग पांच वर्ष तक उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में गोवंश पर अनुसंधान करने के बाद लगभग एक वर्ष तक दक्षिणी कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में मुर्गीपालन पर अध्ययन किया। डॉ वर्मा कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त पुस्तकों के लेखक होने के साथ-साथ वर्तमान में ‘एनिमल न्यूट्रिशन सोसायटी ऑफ इंडिया’, करनाल के ‘वाइस प्रेजीडेंट’ भी हैं और पशु पोषण के क्षेत्र में लगातार उच्च कोटि के अनुसन्धान एवं आम लोगों, किसानों एवं विद्यार्थियों तक विज्ञान के प्रचार प्रसार में कार्यरत हैं | सोशल मीडिया में डॉ वर्मा “बंशी विचारक” के नाम से जाने जाते हैं और देश के हजारों वैज्ञानिकों, छात्रों, एवं किसानों द्वारा लगातार फॉलो किये जाते हैं |

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