दशानन का पांचवा सिर: ऑक्जेलिक एसिड या ऑक्सालेट

| November 20, 2017 | 0 Comments

दशानन का पांचवा सिर है ऑक्जेलिक एसिड या ऑक्सालेट।

यह वह पदार्थ है जो पौधों में तो होता ही है। इसके अलावा मानव शरीर भी इसका उत्पादन करता रहता है। जो लोग ऑक्सालेट रिच फ़ूड ज्यादा खाते हैं या जिन व्यक्तियों के शरीर में इसका उत्पादन ज्यादा होने लगता है उन सभी की किडनी में ‘प्रीशियस स्टोन्स’ बनने लगते हैं।

‘प्रीशियस’ इसलिए कहा गया कि उनको निकालने के लिए डॉक्टर बाबू खूब पैसे लेते हैं। ऑक्सालेट की कैल्शियम और आयरन से पक्की दोस्ती है और कैल्शियम के साथ मिलकर यह गट से निकलकर ‘इज्जतघर’ घूमने चला जाता है।

जो लोग कैल्शियम कम खाते हैं, उनके पाचन तंत्र में कैल्शियम की कमी हो जाती है और ऑक्सालेट को कोई साथी ना मिल पाने के कारण यह इंटेस्टाइन से ‘इज्जतघर’ की तरफ ना जाकर अब्सॉर्ब हो जाता है और खून में मिलकर किडनी में पहुंच जाता है और वहीं डेरा जमा लेता है और इसी को ‘किडनी स्टोन’ कहते हैं। ज्यादातर केसों में किडनी स्टोन कैल्शियम ऑक्सालेट के ही बने होते हैं।

इनके बनने का एक और कारण है। भोजन में ‘विटामिन सी’ की अधिकता। जो लोग ज्यादा विटामिन सी खाते हैं, उनमें यह अतिरिक्त विटामिन सी ऑक्सालेट में कन्वर्ट होता रहता है और जाकर किडनी में जम जाता है।

अब इससे बचे कैसे?

पहला बचाव – भोजन में कैल्शियम की मात्रा ज्यादा कर दो। दूसरा बचाव – ऑक्सालेट रिच फ़ूड की मात्रा कम कर दो। तीसरा बचाव – विटामिन सी का सेवन बहुत ज्यादा मत करो। एक हजार मिलीग्राम विटामिन सी प्रतिदिन से ज्यादा बिल्कुल नहीं।

चौथा बचाव – नमक का प्रयोग कम करो। भोजन में नमक ज्यादा होगा तो खून में नमक बढ़ेगा। खून में नमक बढ़ेगा तो उसे बाहर निकालने के लिए किडनी को ज्यादा काम करना पड़ेगा। बस इसी चक्कर में किडनी में कैल्शियम ऑक्सालेट डिपॉजिट होने लगेगा।

हाई ऑक्सालेट वाले फ़ूड हैं कौन-कौन से? ये हैं फल जैसे कीवी, अंजीर, बैंगनी अंगूर आदि। सब्जी जैसे भिंडी, पालक, चकुन्दर आदि। नट्स जैसे बादाम, काजू, मूंगफली आदि और कोको, चॉकलेट और चाय।

दशानन के इस सिर से बचने के लिए उन चीजों का त्याग करो जिनमें ऑक्सालेट ज्यादा है। सब्जियों को उबाल कर खाओ। भोजन में कैल्शियम की मात्रा बढ़ा दो। विटामिन सी का सेवन आवश्यकता से अधिक मत करो। पानी ज्यादा पीओ। तो दशानन आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।

बंशी विचारक

इस सीरीज का प्रथम लेख था, दशानन का पहला सिर…. प्रोटीएज इनहिबिटर।”

और द्वितीय लेख था – दशानन का दूसरा सिर: लाइपेज इनहिबिटर।

तीसरा लेख – दशानन का तीसरा सिर: एमाइलेज इनहिबिटर

चौथा लेख – दशानन का चौथा सिर: फाइटिक एसिड या फाइटेट।

क्रमश:

रावण

दशानन के दस सिर सीरीज का पंचम लेख

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Sanjeev Kumar Verma. दशानन का पांचवा सिर: ऑक्जेलिक एसिड या ऑक्सालेट. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/1571/. Retrieved January 20, 2018.

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About the Author ()

डॉ संजीव कुमार वर्मा, पीएचडी (पशु पोषण), पीजीडीटीएमए; एआरएस भारतीय कृषि अनुसंधान सेवा (ARS) के 1996 बैच के वैज्ञानिक हैं और वर्तमान में भाकृअनुप – केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं| इससे पूर्व डॉ वर्मा अनेक भारतीय संस्थानों में वैज्ञानिक सेवाएं दे चुके हैं। डॉ वर्मा ने लगभग नौ वर्ष तक पहाड़ी और पर्वतीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध के उपरांत लगभग 5 वर्ष तक द्वीपीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध कार्य किया। इसके बाद लगभग पांच वर्ष तक उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में गोवंश पर अनुसंधान करने के बाद लगभग एक वर्ष तक दक्षिणी कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में मुर्गीपालन पर अध्ययन किया। डॉ वर्मा कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त पुस्तकों के लेखक होने के साथ-साथ वर्तमान में ‘एनिमल न्यूट्रिशन सोसायटी ऑफ इंडिया’, करनाल के ‘वाइस प्रेजीडेंट’ भी हैं और पशु पोषण के क्षेत्र में लगातार उच्च कोटि के अनुसन्धान एवं आम लोगों, किसानों एवं विद्यार्थियों तक विज्ञान के प्रचार प्रसार में कार्यरत हैं | सोशल मीडिया में डॉ वर्मा “बंशी विचारक” के नाम से जाने जाते हैं और देश के हजारों वैज्ञानिकों, छात्रों, एवं किसानों द्वारा लगातार फॉलो किये जाते हैं |

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