दशानन का नौवाँ सिर: सैपोनिन।

| November 26, 2017 | 0 Comments

दशानन का नौवाँ सिर है…. सैपोनिन।

यह वह फाईटोकेमिकल है जो पानी में घुलने पर झाग पैदा करता है। इसी के कारण पौधों के बीजों में थोड़ा कडुआ स्वाद आता है और इसी कड़वेपन के कारण वह चिड़ियों और कीड़े मकोड़ों से बच रहता हैं।

पौधों में सैपोनिन की मात्रा बहुत ही कम होती है इसलिए मनुष्यों के लिए यह कोई खास परेशानी की बात नहीं है मगर सैपोनिन युक्त पौधों को खाने वाले पशुओं में यह काफी नुकसान करता है। इसीलिए इसे एन्टीन्यूट्रिशनल फैक्टर का नाम दिया जाता है। अगर मनुष्यों में इसके हानिकारक प्रभाव को देखें तो यह मात्र जिंक और आयरन के अवशोषण में परेशानी पैदा करता है। मगर इसके विपरीत इसके फायदे कहीं ज्यादा हैं। इसीलिए इसे दानव के रूप में कम और देवता के रूप में अधिक पूजा जाता है।

दशानन के इस नौंवे रूप को जड़ी बूटियों के रूप में प्रयोग किया जाता है। जिनसिंग का नाम तो आप सभी ने सुना ही होगा। जिनसिंग की जान ये सैपोनिन ही है। जिनसिंग खाने से मानव स्पर्म की वायबिलिटी और मोटेलिटी दोनों बढ़ जाती हैं। मेथी के अंदर मौजूद सैपोनिन का हाइपोग्लाइसिमिक प्रभाव है। बोले तो यह खून में ग्लूकोज के स्तर को कम करता है।

सैपोनिन कोलेस्ट्रॉल मेटाबोलिज्म में भी बहुत इन्वॉल्व है। एक तो भोजन में उपस्थिति कोलेस्ट्रॉल का अवशोषण नहीं होने देता। दूसरे लीवर में कोलेस्ट्रॉल बनने नहीं देता। दोनों ही वजहों से ब्लड में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम हो जाता है। इसके अलावा यह एन्टीऑक्सीडेंट का काम करता है और इम्युनिटी बढ़ाता है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक तो यह एन्टीकैंसर भी है और एन्टीएजिंग भी है।

सैपोनिन मिलता है सोयाबीन, चना, ऐस्पैरागस, टमाटर, आलू और जई में। इसके अलावा जिनसिंग और क्विनोवा में बहुतायत में उपलब्ध है। क्विनोवा इम्पोरटिड अनाज है। कुछ-कुछ चौलाई जैसा होता है और आजकल इंडियन मार्किट में भी उपलब्ध है। क्विनोवा की एक और खासियत है कि यह ग्लूटेन फ्री है। इसलिए जिन लोगों को ग्लूटेन से एलर्जी होती है उनके लिए क्विनोवा बहुत कारगर है।

कुल मिलाकर यह निष्कर्ष निकलता है कि दशानन के अन्य सिरों के मुकाबले यह रहमदिल है और नुकसान के बजाय फायदा ज्यादा करता है। इसलिए दशानन के इस स्वरूप को शत शत नमन।

बंशी विचारक

इस सीरीज का प्रथम लेख था, दशानन का पहला सिर…. प्रोटीएज इनहिबिटर।”

और द्वितीय लेख था – दशानन का दूसरा सिर: लाइपेज इनहिबिटर।

तीसरा लेख – दशानन का तीसरा सिर: एमाइलेज इनहिबिटर

चौथा लेख – दशानन का चौथा सिर: फाइटिक एसिड या फाइटेट।

दशानन का पांचवा सिर: ऑक्जेलिक एसिड या ऑक्सालेट

दशानन का छठा सिर था…. ग्लूकोसिनोलेट।

दशानन का सप्तम सिर: लेक्टिंस

दशानन का आठवां सिर: पॉलीफिनोल्स व टैनिन्स

क्रमश:

रावण

दशानन के दस सिर सीरीज का नवम लेख

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Sanjeev Kumar Verma. दशानन का नौवाँ सिर: सैपोनिन।. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/1585/. Retrieved January 20, 2018.

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About the Author ()

डॉ संजीव कुमार वर्मा, पीएचडी (पशु पोषण), पीजीडीटीएमए; एआरएस भारतीय कृषि अनुसंधान सेवा (ARS) के 1996 बैच के वैज्ञानिक हैं और वर्तमान में भाकृअनुप – केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं| इससे पूर्व डॉ वर्मा अनेक भारतीय संस्थानों में वैज्ञानिक सेवाएं दे चुके हैं। डॉ वर्मा ने लगभग नौ वर्ष तक पहाड़ी और पर्वतीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध के उपरांत लगभग 5 वर्ष तक द्वीपीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध कार्य किया। इसके बाद लगभग पांच वर्ष तक उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में गोवंश पर अनुसंधान करने के बाद लगभग एक वर्ष तक दक्षिणी कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में मुर्गीपालन पर अध्ययन किया। डॉ वर्मा कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त पुस्तकों के लेखक होने के साथ-साथ वर्तमान में ‘एनिमल न्यूट्रिशन सोसायटी ऑफ इंडिया’, करनाल के ‘वाइस प्रेजीडेंट’ भी हैं और पशु पोषण के क्षेत्र में लगातार उच्च कोटि के अनुसन्धान एवं आम लोगों, किसानों एवं विद्यार्थियों तक विज्ञान के प्रचार प्रसार में कार्यरत हैं | सोशल मीडिया में डॉ वर्मा “बंशी विचारक” के नाम से जाने जाते हैं और देश के हजारों वैज्ञानिकों, छात्रों, एवं किसानों द्वारा लगातार फॉलो किये जाते हैं |

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