दशानन का दसवां सिर – गॉसिपोल

| December 6, 2017 | 0 Comments

दशानन का दसवां सिर है….. गॉसिपोल।

कुदरत ने इसे पौधे को इसलिए दिया था कि यह कीड़ें-मकोड़ों से पौधे की रक्षा कर सके। इसे खाने वाले कीड़ें-मकोड़े इनफर्टाइल हो जाते थे। यह सिर वैसे तो किचन में कम ही दिखाई देता है मगर कुछ इन्नोवेटिव महिलाएं उस चीज की खीर बनाती हैं जिसमें गॉसिपोल प्रचुर मात्रा में उपस्थिति है।

गॉसिपोल का प्रमुख स्रोत है बिनौला। बिनौले के बीज में गॉसिपोल खूब होता है। इसी बिनौले से निकाले गए ‘अनरिफाइंड तेल’ में भी गॉसिपोल होता है और तेल निकालने के बाद बची खली में भी गॉसिपोल होता है। जब इस खली को पशुओं को खिलाया जाता है तो उनमें गॉसिपोल टॉक्सिसिटी के लक्षण दिखाई देते हैं।

मनुष्यों को कैसे प्रभावित करता है यह गॉसिपोल? इसके प्रभाव से पुरुषों में ‘पुरुषत्व’ समाप्त हो जाता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के लिए घातक होता है। इसके प्रभाव से लाल रक्त कोशिकाओं की मृत्यु हो जाती है जिसे ‘हीमोलीटिक एनीमिया’ कहते हैं।

1929 में चीन में पुरुषों में फर्टीलिटी की समस्या देखी गई। जब मामले की तहकीकात हुई तो पता चला कि सब ‘अनरिफाइंड कॉटन सीड ऑयल’ खा रहे थे। बस फिर क्या था… लग गए चाईनीज ‘कॉन्ट्रासेप्टिव’ बनाने में और 1980 में बना भी लिया। इस कॉन्ट्रासेप्टिव से पुरुषों में ‘हॉर्मोनल इमबेलेन्स’ तो नहीं हुआ मगर उनके रक्त में पोटैशियम का स्तर कम हो गया। जिसके कारण उन्हें थकान रहने लगी, मसल्स कमजोर हो गई और किसी-किसी को पैरालिसिस भी हो गया। तो बाद में इस आइडिया को ड्राप कर दिया गया।

अब दशानन अगर दानव है तो देवता भी है। यह सिर भी अन्य सिरों की तरह पूजने योग्य है क्योंकि यह कैंसर के लिए दी जाने वाली कीमोथेरेपी की इफिकेसी बढ़ा देता है। और तो और यह एचआइवी-1 वायरस के रेप्लिकेशन को भी इनहिबिट करता है। बोले तो एड्स का फैलाव रोकता है।

दशानन के इस सिर का अंत भी आग से ही सम्भव है। रोस्टिंग या बोइलिंग करने से गॉसिपोल काफी हद तक कम हो जाता है। इसलिए बिनौले की खीर का जायका आप ले सकते हैं बिना डरे। एक आग्रह पशुपालकों से अवश्य करूँगा कि अगर पशुओं को बिनौला या बिनौले की खली खिलानी है तो खिलाने से पहले उसे उबाल जरूर लें।

वैसे गाय या भैंस काफी हद तक गॉसिपोल डाइजेस्ट कर लेती हैं मगर फिर भी कुछ गॉसिपोल रह ही जाता है जो पशुओं में इनफर्टिलिटी की समस्या का कारण बन सकता है। इसलिए बिनौले या बिनौले के किसी भी उत्पाद को पका कर ही प्रयोग करें।

बोलो दशानन महाराज की जय।

बंशी विचारक

इस सीरीज का प्रथम लेख था, दशानन का पहला सिर…. प्रोटीएज इनहिबिटर।”

और द्वितीय लेख था – दशानन का दूसरा सिर: लाइपेज इनहिबिटर।

तीसरा लेख – दशानन का तीसरा सिर: एमाइलेज इनहिबिटर

चौथा लेख – दशानन का चौथा सिर: फाइटिक एसिड या फाइटेट।

दशानन का पांचवा सिर: ऑक्जेलिक एसिड या ऑक्सालेट

दशानन का छठा सिर था…. ग्लूकोसिनोलेट।

दशानन का सप्तम सिर: लेक्टिंस

दशानन का आठवां सिर: पॉलीफिनोल्स व टैनिन्स

दशानन का नौवाँ सिर: सैपोनिन

रावण

दशानन के दस सिर सीरीज का दसवा लेख

Cite this Article


Sanjeev Kumar Verma. दशानन का दसवां सिर – गॉसिपोल. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/1596/. Retrieved January 20, 2018.

Tags:

blank

About the Author ()

डॉ संजीव कुमार वर्मा, पीएचडी (पशु पोषण), पीजीडीटीएमए; एआरएस भारतीय कृषि अनुसंधान सेवा (ARS) के 1996 बैच के वैज्ञानिक हैं और वर्तमान में भाकृअनुप – केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं| इससे पूर्व डॉ वर्मा अनेक भारतीय संस्थानों में वैज्ञानिक सेवाएं दे चुके हैं। डॉ वर्मा ने लगभग नौ वर्ष तक पहाड़ी और पर्वतीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध के उपरांत लगभग 5 वर्ष तक द्वीपीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध कार्य किया। इसके बाद लगभग पांच वर्ष तक उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में गोवंश पर अनुसंधान करने के बाद लगभग एक वर्ष तक दक्षिणी कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में मुर्गीपालन पर अध्ययन किया। डॉ वर्मा कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त पुस्तकों के लेखक होने के साथ-साथ वर्तमान में ‘एनिमल न्यूट्रिशन सोसायटी ऑफ इंडिया’, करनाल के ‘वाइस प्रेजीडेंट’ भी हैं और पशु पोषण के क्षेत्र में लगातार उच्च कोटि के अनुसन्धान एवं आम लोगों, किसानों एवं विद्यार्थियों तक विज्ञान के प्रचार प्रसार में कार्यरत हैं | सोशल मीडिया में डॉ वर्मा “बंशी विचारक” के नाम से जाने जाते हैं और देश के हजारों वैज्ञानिकों, छात्रों, एवं किसानों द्वारा लगातार फॉलो किये जाते हैं |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *