कुछ तो है इस एप्पल में..

| May 14, 2017 | 0 Comments

वर्णमाला कोई सी भी हो शुरू होती है फलों से ही।

‘अ’ से ‘अनार’ और ‘A’ फ़ॉर ‘Apple’….

पिछली पोस्ट में हमने बताया कि किस तरह तीन सेबों ने मानव जाति का इतिहास बदल दिया…

पहला सेब जो आदम-हव्वा ने ईडन गार्डन में खाया। दूसरा सेब जो न्यूटन के सिर पर गिरा और तीसरा जिसे स्टीव जॉब्स ने खाया…. हर कोई दीवाना है उस अध खाए सेब का। कहावत भी बनी …. ‘An apple a day keeps doctor away’.

पिछली पोस्ट में हमने कहा था कि आंगन में किलकारियां ना गूंज रही हो तो रोज एक एप्पल खाएं। एक खुद खाएं और एक अपनी अर्धांगिनी को खिलाएं। कुछ तो है इस एप्पल में…. कोई ऐसा तत्व जो प्रजनन में सहायक है।

वर्ष 1958 में डॉ डी फारेस्ट सी जार्विस, एम.डी. की एक पुस्तक प्रकाशित हुई जिसमें उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि सेब का सिरका मानव प्रजनन में बहुत कारगर है। उन्होंने अपने मरीजों को सुबह सवेरे सेब का सिरका लेने का आग्रह किया और उन सभी दंपत्तियों को संतान की प्राप्ति हुई। फिर एक पशु प्रेमी उनके पास आया कि उसकी कुतिया बच्चे नहीं दे रही है। उन्होंने उसे भी सेब का सिरका पिलाने की सलाह दी तो कुतिया ने थोड़े समय बाद कई पिल्लों को जन्म दिया।

फिर एक डेरी का मालिक उनके पास आया कि उसकी 43 प्रतिशत गायें बांझ हो गयी हैं। उसने उन गायों को भी सेब का सिरका पिलाने की सलाह दी। चार महीने बाद ही 23 गायें गर्भवती हो गयी।

सेब का सिरका वैसे तो अम्लीय होता है। मगर शायद पाचन तंत्र में जाकर यह प्रजनन तंत्र के माध्यम को क्षारीय कर देता है। और क्षारीय माध्यम में शुक्राणुओं की गतिशीलता अधिक होती है। या तो उस क्षारीयता का कमाल है या फिर सेब में कुछ ऐसे फाइटोकेमिकल्स पाए जाते हैं जो सिरके में आ जाते हैं और प्रजनन पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

Apple for fertility, फर्टिलिटी सेब

File photo: Apple Vs Fertility. Source Flickr. License Public Domain WorkSome rights reserved by Landscape/ People in oil paint watercolor etching

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Sanjeev Kumar Verma. कुछ तो है इस एप्पल में... In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/633/. Retrieved November 17, 2017.

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About the Author ()

डॉ संजीव कुमार वर्मा, पीएचडी (पशु पोषण), पीजीडीटीएमए; एआरएस भारतीय कृषि अनुसंधान सेवा (ARS) के 1996 बैच के वैज्ञानिक हैं और वर्तमान में भाकृअनुप – केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं| इससे पूर्व डॉ वर्मा अनेक भारतीय संस्थानों में वैज्ञानिक सेवाएं दे चुके हैं। डॉ वर्मा ने लगभग नौ वर्ष तक पहाड़ी और पर्वतीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध के उपरांत लगभग 5 वर्ष तक द्वीपीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध कार्य किया। इसके बाद लगभग पांच वर्ष तक उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में गोवंश पर अनुसंधान करने के बाद लगभग एक वर्ष तक दक्षिणी कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में मुर्गीपालन पर अध्ययन किया। डॉ वर्मा कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त पुस्तकों के लेखक होने के साथ-साथ वर्तमान में ‘एनिमल न्यूट्रिशन सोसायटी ऑफ इंडिया’, करनाल के ‘वाइस प्रेजीडेंट’ भी हैं और पशु पोषण के क्षेत्र में लगातार उच्च कोटि के अनुसन्धान एवं आम लोगों, किसानों एवं विद्यार्थियों तक विज्ञान के प्रचार प्रसार में कार्यरत हैं | सोशल मीडिया में डॉ वर्मा “बंशी विचारक” के नाम से जाने जाते हैं और देश के हजारों वैज्ञानिकों, छात्रों, एवं किसानों द्वारा लगातार फॉलो किये जाते हैं |

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