एक विलक्षण जीव: काकरोच

| May 14, 2017 | 0 Comments

पार्लियामेंट्री कमेटी एक बार द्वीपों के भ्रमण पर आई तो कमेटी के सदस्य के रूप में सांसद चौबे जी भी आए।

साथ मे लाए पूरा खानदान। उनके लिए रुकने की व्यवस्था की गई ‘पियरलेस सरोवर पोर्टिको’ में।

कहने को तो ‘चार सितारा’ है मगर पता नहीं कैसे जैसे ही चौबे जी ने कमरे के अंदर प्रवेश किया तो उन्हें दर्शन हुए पृथ्वी के सबसे पुराने बाशिंदे के और उसे देखते ही चौबे जी जोर से चिल्लाए…. तिलचट्टा। हम तो भूल भी चुके थे कि ‘कॉकरोच’ को हिंदी में ‘तिलचट्टा’ भी कहते हैं।

वैसे बचपन में हमने अपनी माता श्री को इस दुर्लभ प्राणी को ‘इस्सर’ भी कहते सुना था। मगर जब से पुनीत इस्सर को फिल्मों में काम मिलना बंद हुआ तब से लोग यह भी भूल गए कि ‘कॉकरोच’ का तीसरा नाम ‘इस्सर’ भी है।

खैर किसी तरह हमने चौबे जी को गोली दी कि सर खैर मनाओ तिलचट्टे के ही दर्शन हुए। वर्ना यहां तो सबसे पहले कनखजूरा आता है नमस्ते करने। चलते चलते हमने उन्हें यह भी समझाया कि कल सुबह जब जूता पहनो तो खूब झाड़ झूड कर पहनना क्योंकि यहां एक जूते में कनखजूरा और दूसरे में बिच्छू छिपा मिल सकता है। ‘हॉट एंड ह्यूमिड प्लेस’ है तो इन सबकी तादाद खूब है। और हाँ रात में सु सु करने जाओ तो बिना लाइट जलाए बेड से नीचे मत उतरना कभी साँप के ऊपर पैर पड़ जाए।

सुनते ही चौबे जी की घिग्गी बंध गई और बोले हम चार दिन चप्पल ही पहिनूँगा। फिर देखता हूँ कैसे छिप कर बैठता है कनखजूरा और बिच्छू और रात में लाइट ऑफ भी नहीं करूंगा। देखता हूँ कैसे आता है सांप और चौबे जी चार दिन चप्पलों में ही घूमे।

तो ये जो तिलचट्टा है ये महाशय पृथ्वी लोक में पिछले 32 करोड़ सालों से विचरण कर रहा है।

कुछ तो खास होगा कि हस्ती मिटती नहीं इनकी। ‘आर्कटिक’ से लेकर ‘ट्रॉपिकल प्लेसेस’ तक में पाए जाते हैं। इतने सख्त जान हैं कि माईनस 122 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान में भी जिंदा रह लेते हैं। पैंतालीस मिनट तक बिना सांस लिए रह सकते हैं और बिना कुछ खाए महीनों तक।

ऐसा कहा जाता है कि जब न्यूक्लियर वार होगा तो बस कॉकरोच ही जिंदा बचेंगे क्योंकि इनकी रेडिएशन सहन करने की शक्ति मनुष्य से 15 गुनी अधिक है। यही एकमात्र ऐसा प्राणी है जिसने पृथ्वी पर तो बच्चे पैदा किये ही हैं। इसने अंतरिक्ष मे भी बच्चे पैदा किए हुए हैं।

रूस ने सितंबर 2007 में अंतरिक्ष में एक कॉकरोच भेजा था। वहां उसने 33 बच्चे दिए। फिर अपने भरे पूरे परिवार को लेकर पृथ्वी पर वापस आया और फिर उन बच्चों के भी बच्चे हुए। उस कॉकरोच का नाम था ‘नाडेज़हद’ और इसी का दूसरा नाम रखा गया था ‘हॉप’।

तो हॉप ने हॉप दिलाई कि माइक्रोग्रेविटी की अवस्था में भी बच्चे पैदा हो सकते हैं। तो बस रहिये हॉपफुल…. और हाँ… लेडी कॉकरोच ही वो सबसे पहली लेडी है जिसने पर्स का उपयोग किया। लेडी कॉकरोच जिस स्ट्रक्चर (पाउच) में अंडे देती है उसे पर्स कहा जाता है। जब भी किसी भद्र ‘बहन जी’ को हाथ में पर्स लटकाए देखता हूँ तो मुझे लेडी कॉकरोच का ख्याल आ जाता है…

Cockroch, काकरोच

File photo: Illustration Hexapod. Source Flickr. License Public Domain Dedication (CC0) Some rights reserved by spongebabyalwaysfull

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Sanjeev Kumar Verma. एक विलक्षण जीव: काकरोच. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/637/. Retrieved September 23, 2017.

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