भारतीय बेल – Aegle marmelos

| May 16, 2017 | 1 Comment

मांग आयी है ‘बेल’ पर कुछ प्रकाश डालने की…..

तो एक फल है ‘बेल’ जिसे देश के कुछ भागों में ‘कैथ’ भी कहा जाता है।अंगरेजी में इसे Aegle marmelos  कहते हैं ।

‘भोले बाबा’ को बेल बहुत पसंद हैं। इसीलिए हर एक शिवमन्दिर में बेल का पेड़ अवश्य पाया जाता है।

बेल की तीन प्रजातियां पाई जाती हैं। 1. जंगली 2. सेमी वाइल्ड और 3. कागज़ी।

पहली प्रजाति के फल का छिलका बहुत मोटा होता है। दूसरी प्रजाति के फल का छिलका थोड़ा कम मोटा होता है। कागज़ी प्रजाति का छिलका बहुत पतला होता है।

इस पेड़ का कोई भाग ऐसा नहीं है जिसका आयुर्वेद में प्रयोग ना किया गया हो। इस पौधे के सभी भाग दिव्य गुणों से भरपूर हैं और विभिन्न बीमारियों को दूर करने के लिए प्रयोग किये जाते हैं।

बेल के पेड़ की जड़ कान के रोगों में बहुत कारगर है। बेल के पेड़ के पल्प का प्रयोग थाईलैंड और म्यामांर की स्त्रियां सौंदर्य प्रसाधन के रूप में करती हैं। इसके अलावा यह पल्प मलेरिया ठीक करने के लिए भी त्वचा पर लगाया जाता है।

बेल की पत्तियों का जूस कोलेस्ट्रॉल कम करता है। बेल का जूस दिल के रोगों से बचाता है। बेल के फल के गूदे में कार्बोहाईड्रेट 31.8%, वसा 0.3%, प्रोटीन 1.8% फाइबर 2.9% और पानी 61.5 प्रतिशत होता है। एक सौ ग्राम गूदे में विटामिन ए 55 मिलीग्राम, विटामिन सी 60 मिलीग्राम, थायमीन 0.13 मिलीग्राम, राइबोफ्लेविन 1.19 मिलीग्राम, नियासिन 1.1 मिलीग्राम और कैरोटीन 55 मिलीग्राम, कैल्शियम 85 मिलीग्राम और पोटेशियम 600 मिलीग्राम होता है।

बेल का फल एकमात्र ऐसा फल है जो स्टमक की इंटरनल ट्यूनिंग कर देता है। किसी को दस्त लगे हों तो उसे भी बंद कर देगा और अगर किसी को कब्ज ही गया हो तो उसे भी ठीक कर देगा।

बेल के गूदे में मौजूद टैनिन डायरिया और हैज़ा तक को ठीक कर देता है। बेल के फल के गूदे को सुखाकर इसका चूर्ण बना कर लेने से पुराना डायरिया भी ठीक हो जाता है। कच्चे बेल का चूर्ण बवासीर को भी ठीक कर देता है। पुराने जमाने में तो बेल चूर्ण, घी और हल्दी का लेप टूटी हड्डियों को जोड़ने के भी काम आता था।

बेल के कारण सूजन बहुत जल्दी उतर जाती थी। बेल के फल के गूदे में मौजूद पॉलीफिनोलिक कंपाउंड्स गैस्ट्रिक अल्सर तक को ठीक कर देते हैं। बेल का जूस एन्टी माइक्रोबियल, एन्टी वायरल और एन्टी फंगल भी है।

गूदे में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होने के कारण स्कर्वि रोग भी ठीक हो जाता है। इसके अतिरिक्त डायबिटिक लोगों के लिए भी बेल का जूस बहुत लाभप्रद है।

वैसे तो बेल की कोई सिस्टेमेटिक खेती नहीं की जाती मगर उत्तर प्रदेश के नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय ने नरेंद्र बेल -1 और नरेंद्र बेल – 2 किस्में जारी की हैं और उत्तर प्रदेश में अब इसका व्यवसायिक उत्पादन होने लगा है।

तो अभी पता चला ना कि क्यों बेल को हिन्दू पौराणिक ग्रंथों में बहुत ऊँचे स्थान पर जगह दी गयी है | बेल के अनगिनत अमूल्य गुणों के कारण ही इसे संस्कृत में ‘श्रीफलम’ भी कहा गया है |

तो इस बार गर्मियों में कार्बोनेटिड पेय पदार्थों को छोड़िये और बेल जूस पीजिये। शुरू शुरू में थोड़ा बकबका लगेगा मगर धीरे धीरे आदत हो जाएगी।

Aegle marmelos बेल

File Photo: भारतीय बेल – Aegle marmelos. License AttributionShare AlikeSome rights reserved by dinesh_valke

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Sanjeev Kumar Verma. भारतीय बेल – Aegle marmelos. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/662/. Retrieved November 20, 2017.

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About the Author ()

डॉ संजीव कुमार वर्मा, पीएचडी (पशु पोषण), पीजीडीटीएमए; एआरएस भारतीय कृषि अनुसंधान सेवा (ARS) के 1996 बैच के वैज्ञानिक हैं और वर्तमान में भाकृअनुप – केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं| इससे पूर्व डॉ वर्मा अनेक भारतीय संस्थानों में वैज्ञानिक सेवाएं दे चुके हैं। डॉ वर्मा ने लगभग नौ वर्ष तक पहाड़ी और पर्वतीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध के उपरांत लगभग 5 वर्ष तक द्वीपीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध कार्य किया। इसके बाद लगभग पांच वर्ष तक उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में गोवंश पर अनुसंधान करने के बाद लगभग एक वर्ष तक दक्षिणी कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में मुर्गीपालन पर अध्ययन किया। डॉ वर्मा कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त पुस्तकों के लेखक होने के साथ-साथ वर्तमान में ‘एनिमल न्यूट्रिशन सोसायटी ऑफ इंडिया’, करनाल के ‘वाइस प्रेजीडेंट’ भी हैं और पशु पोषण के क्षेत्र में लगातार उच्च कोटि के अनुसन्धान एवं आम लोगों, किसानों एवं विद्यार्थियों तक विज्ञान के प्रचार प्रसार में कार्यरत हैं | सोशल मीडिया में डॉ वर्मा “बंशी विचारक” के नाम से जाने जाते हैं और देश के हजारों वैज्ञानिकों, छात्रों, एवं किसानों द्वारा लगातार फॉलो किये जाते हैं |

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  1. Piyush says:

    A medicine in Ayurveda बिल्वादि चूर्ण is widely used for treatment of IBS and other intestinal disorders

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