Oxytocin in Milk: कुछ भ्रांतियां, कुछ सत्य

| May 21, 2017 | 2 Comments

लगा दिया लगा दिया, अरे ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगा दिया| गाय को भी लगा दिया| भैंस को भी लगा दिया| बकरी को भी लगा दिया| और तो और तरबूज और ककड़ी को भी लगा दिया| इंसानियत पर जुल्म कर दिया|

तो आइये आज हम बात करते हैं ऑक्सीटोसिन की|

पहले समझते हैं कि ये ऑक्सीटोसिन है क्या? क्या करता है ये शरीर में? क्या वास्तव में यह इतना खतरनाक है जितना हल्ला मचाया जा रहा है? क्या वास्तव में यह दूध में स्रावित होता है?

ऑक्सीटोसिन वास्तव में सभी स्तनधारियों में पाया जाने वाला एक हार्मोन है जो कि मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस नामक हिस्से में पैदा होता है और पिट्यूटरी ग्रंथि में इकठ्ठा रहता है|

नर का मादा के प्रति प्यार (love), सहानुभूति (empathy), एवं सम्बन्ध (connection / bonding) पैदा करने में इसका विशेष रोल है इसीलिए इसको “लव हार्मोन” भी कहा जाता है| ※ (1)

बच्चे के जन्म के समय इसका विशेष महत्त्व है क्योंकि यह बच्चे के बाहर आने के लिए आवश्यक लेबर पेन को आरम्भ करता है व माँ और उसके नवजात बच्चे के बीच बोन्डिंग को बनाता है, और जन्म के बाद दूध उतरने के लिए बहुत ही आवश्यक है|

कुल मिलाकर कुदरत ने ऐसी व्यवस्था कायम की है कि बच्चा भी पैदा हो जाये, माँ और बच्चे के बीच प्यार का रिश्ता भी कायम हो जाये और बच्चे को रोजाना भरपूर दूध भी मिले|

यह कुदरत का करिश्मा माँ के पास ही है बाप के पास नहीं| ※ (1) (2) इसीलिए माँ अपने बच्चों से अधिक प्यार करती है बाप के मुकाबले|

बच्चे के जन्म के बाद माँ के शरीर में रोज ऑक्सीटोसिन बनता है| बच्चा जैसे ही माँ के स्तन को मुख लगाता है तो ऑक्सीटोसिन स्रावित होने लगता है, जिसके प्रभाव से दूध उतरने लगता है और बच्चे का पेट दूध रुपी अमृत से भर जाता है|

अब आते है पशुओं के ऊपर – पशुओं में भी बिलकुल यही होता है| बस अंतर इतना है कि जब किन्ही कारणों से मादा पशु के अन्दर ऑक्सीटोसिन बनना कम हो जाता है या बंद हो जाता है तब इस स्वार्थी मनुष्य ने उस स्थिति का भी तोड़ खोज लिया| अपने मादा पशुओं को प्राकृतिक या कृत्रिम ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन लगाने लगा| इधर इंजेक्शन लगा नहीं उधर दूध बाहर| ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगते ही मादा पशु की मजबूरी बन जाती है दूध देना| है तो वैसे वह उसके बच्चे के लिए| मगर यह लोभी मनुष्य बैठ जाता है बाल्टी लेकर उसके नीचे|

अब आया रोल मीडिया का | इनको तो कुछ चाहिए| और इन्होनें ढूढ लिया| लगा दिया लगा दिया ऑक्सीटोसिन लगा दिया| अरे भाई हुआ क्या?

अरे साहब जो ऑक्सीटोसिन लगाया वो तो दूध में आ जायेगा? आ जायेगा, क्या आ गया| अब कोई इनसे पूछे कि भाई कैसे आ जायेगा? और आ भी जायेगा तो होगा क्या? अरे साहब यही तो समस्या की जड़ है| जहर है जहर| आप समझ नहीं रहे हो ये ऑक्सीटोसिन जब दूध में आएगा तो बच्चे जल्दी जवान हो जायेंगे| उनके दाढ़ी मूछें जल्दी निकल आएँगी| ब्ला ब्ला ब्ला| पता कुछ है नहीं और चले हैं पैरवी करने|

मैं बताता हूँ| कुछ नहीं होगा|

पहली बात जो ऑक्सीटोसिन पशु को लगाया गया था वह दूध को उतारने में खर्च हो गया| मामला ख़त्म| अगर कुछ traces दूध में आ भी गए तो आँतों के अन्दर मौजूद enzymes के द्वारा इसका काम तमाम| ना रहा बांस और ना बजी बांसुरी|

Intestinal Digestion के पश्चात् इसका नाम-ओ-निशान भी नहीं बचता तो आँतों में इसके अवशोषण का तो प्रश्न ही नहीं उठता|

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ न्यूट्रीसन, हैदराबाद में वर्ष 2012 में एक प्रयोग किया गया जिसमें यह देखा गया कि अगर भैंस को दूध उतारने के लिए ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाया गया तो उस भैंस के दूध में क्या ऑक्सीटोसिन की ज्यादा मात्रा थी?

उस भैंस के दूध के मुकाबले जिसे इंजेक्शन नहीं लगाया गया था| तो पाया गया कि चाहे इंजेक्शन लगाया गया हो या ना लगाया गया हो, दूध में कुदरती तौर पर जितना ऑक्सीटोसिन होना चाहिए था बस उतना ही मौजूद पाया गया|

कुदरती तौर पर दूध में ऑक्सीटोसिन 0.015 नैनोग्राम से 0.17 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर पाया जाता है और औसतन 0.06 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर पाया जाता है|

जिन भैंसों को ऑक्सीटोसिन नहीं दिया गया था उनमें भी यह औसतन 0.06 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर पाया और जिन भैंसों को बाहर से ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाया गया था उनमें भी यह औसतन 0.06 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर पाया गया|

इसलिए खुश रहो| खूब दूध पीयो| ऑक्सीटोसिन वहां नहीं है| थोडा मोड़ा है वह डाइजेस्ट हो जाता है| इसलिए वैज्ञानिकों की बात मानों इस मिडिया की मत सुनो जो कभी कहती है – आपके टूथपेस्ट में नमक है? ये लीजिये टूथपेस्ट विद साल्ट| एंड नाउ विद एक्टिव साल्ट|

जब सारे टूथपेस्ट बिक जाते हैं तो कहते है – आपके टूथपेस्ट में नमक है !!!!!!!!!!!!! ये लीजिये बिना नमक वाला टूथपेस्ट| जैसे नमक वाले टूथपेस्ट से ब्लड प्रेशर बढ़ जायेगा| अरे भाई टूथपेस्ट खाना है या दांतों पर घिसना है| वाह रे मेरे देश के मिडिया|

मगर यहाँ सोचने वाली बात यह है कि पशुओं में ऑक्सीटोसिन किन परिस्थितियों में कम बनता है, या नहीं बनता – या बनता तो है मगर स्रावित नहीं होता जिसके फलस्वरूप दूध नहीं उतरता?

जब मादा पशु के नवजात बच्चे की मृत्यु हो जाती है तो अकस्मात माँ और बच्चे की बोन्डिंग टूट जाने के परिणामस्वरूप माँ के अन्दर ऑक्सीटोसिन बनना या तो कम हो जाता है या स्रावित होना| बच्चे की मृत्यु क्यों हो जाती है? इसके कई कारण हैं| अगर बच्चा नर है तो उसकी मृत्यु के चांस ज्यादा होते हैं| कारण मानव का स्वार्थ| बछिया का तो खूब ध्यान रखेगा और बछड़े का? बिलकुल नहीं| कुल मिलाकर| उसको इससे कोई मतलब नहीं कि बच्चा मर जायेगा तो गाय या भैंस दूध नहीं देगी| उसके पास तो इसकी रेमेडी है ना – ऑक्सीटोसिन|

अब बात करते हैं इसके दूसरे पहलू की|

गाय या भैंस को किसान ने ऑक्सीटोसिन लगाकर दूध निकाल लिया| बंशी बाबा ने भी बता दिया कि दूध में कोई खतरा नहीं है| मगर क्या बात यहीं पर समाप्त हो गयी? शायद नहीं|

दूध से इंसान को तो कोई खतरा नहीं है, मगर जिस पशु को ऑक्सीटोसिन लगाया गया उसका तो कबाड़ा कर दिया आपने|

उसके हॉर्मोन सिस्टम को तो बर्बाद कर दिया ना| अब उसे आदत पड़ जाएगी| बिना ऑक्सीटोसिन के वह दूध देगी ही नहीं| और जब बाहर से ऑक्सीटोसिन मिलेगा तो हाइपोथैलेमस ऑक्सीटोसिन पैदा क्यों करेगा?

और हाँ ऑक्सीटोसिन की ज्यादा मात्रा के साइड इफेक्ट्स भी तो होंगे| दूध उतारने के लिए आवश्यकता थी मात्र 1-3 यूनिट ऑक्सीटोसिन की और लगाते हैं कभी कभी तो 20 यूनिट तक|

आप तो बच गए| मगर पशु? बस यहीं पर मीडिया गलत है| जहाँ कोई समस्या नहीं वहां तो समस्या बता रहा है और जहाँ समस्या है, उसका जिक्र तक नहीं| है कोई जो आगे आए? लोगों को समझाए कि मत लगाओ ऑक्सीटोसिन पशुओं को|

हमारा तो नहीं बिगड़ता मगर उस निरीह पशु का बिगड़ता है| क्या-क्या बिगड़ता है ?? किसी और पोस्ट में|

बंशी बाबा

Cow Miliking with Oxytocin

File Photo: Milking Cow

Bibliography

1.
Community Review by Bhaskar Ganguly. “1. Males also produce oxytocin, and 2. oxytocin creates bonding between the male and female, not attraction, as the article states. Instantaneous attraction is under the influence of testosterone; long term attraction is under the influence of dopamine.” https://www.facebook.com/skv.green.oxford/posts/1186190261508296.
2.
Reply by author on 1 – “ नर में ऑक्सिटोसिन बहुत कम मात्रा में बनता है और उसके भी एग्जेक्ट रोल का अभी पता नहीं है।” https://www.facebook.com/skv.green.oxford/posts/1186190261508296.

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Sanjeev Kumar Verma. Oxytocin in Milk: कुछ भ्रांतियां, कुछ सत्य. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/856/. Retrieved September 23, 2017.

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Comments (2)

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  1. DHARMENDRA SINGH HINDUSTANI says:

    Nice lekh and ageke related lekh ka intjar ki animals par kya usrabhav ur hain….. isme jo Bibliography di hai uski link wrong hai..

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