प्राकृतिक दूध, मिलावटी दूध; एवं सिंथेटिक दूध के भूत का रहस्य

| May 21, 2017 | 1 Comment

दूध क्या है?

दूध की सबसे बेसिक परिभाषा है – एक प्राकृतिक अपारदर्शी सफ़ेद तरल जो वसा और प्रोटीन से भरपूर है और जो किसी मादा की दुग्ध ग्रंथियों से स्रावित होता है ताकि वह अपने नवजात शिशु का पेट भर सके।

यहां पर ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि प्रकृति ने हर एक स्तनपायी मादा को दूध पैदा करने की शक्ति इसलिए दी थी ताकि वह अपने नवजात का पेट भर सके ना कि इसलिए कि आप उसका दुहान करें और उसके खुद के बच्चे के लिए जरा सा छोड़ें।

अब थोड़ा केमिस्ट्री की नज़र से देखें तो…

दूध एक ऐसा इमल्शन या कोलॉइड है जिसमें पानी में वसा के कण घुले होते हैं और साथ ही साथ कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल भी घुले होते हैं। चूंकि यह नवजात के पोषण के लिए बना है इसलिए उसमें इन सभी अवयवों की उतनी ही मात्रा होती है जो कि उस जीव के नवजात के भरण पोषण के लिए आवश्यक होती है।

दूध की अपनी एक पीएच (pH) होती है जो कि 6.4 से 6.8 के बीच होती है। दूध में अगर बैक्टीरियल कंटामिनेशन बढ़ेगा तो उसकी पीएच घट जाएगी।

दूध में वसा होती है 3 से 7 प्रतिशत तक। वसा के साथ ही वसा में घुलनशील विटामिन ए, डी, ई और के भी पाए जाते हैं।
दूध में प्रोटीन होती है केसीन की फॉर्म में। कुल प्रोटीन 3 से 4 प्रतिशत तक।

और होते हैं कुछ साल्ट और खनिज लवण जैसे कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, पोटेशियम, सोडियम, क्लोरीन आदि।

और होते हैं पानी में घुलनशील विटामिन जैसे विटामिन बी6, बी12, सी, थायमीन, नियासिन, बायोटिन, राइबोफ्लेविन, पैंटोथेनिक एसिड, फॉलिक एसिड आदि।

और होती है लैक्टोज शुगर जोकि बनी होती है ग्लूकोज और गलैक्टोज शुगर से।

ये तो हुआ सामान्य दूध। जो था उस प्रजाति के बच्चे के लिए मगर आप बैठ गए बाल्टी लेकर और सारा दूध निकाल लाए और मानव उपभोग हेतु बेच दिया।

चलो यहां तक भी ठीक है। मगर फिर दिमाग में लालच घुस गया। प्रकृति ने जो शुद्ध और सात्विक भोजन नवजात हेतु प्रदान किया था मानव ने अपने फायदे के लिए उसमें मिलावट कर दी और तैयार किया मिलावटी दूध।

क्या क्या मिलावट की?

1. पानी की।- अब दूध हो गया पतला तो क्या करें? कुछ नहीं करना। बोल देंगे गाय/ भैंस ज्यादा पानी पी गई।

2. दूध से क्रीम निकाल ली और उसका घी बना कर बेच दिया तो अब ग्राहक तो कहेगा कि इसमें फैट कम था तो क्या करें? – चलो इसमें वनस्पति घी मिला देते हैं।

3. अरे पानी मिलाने से तो इसकी प्रोटीन कम हो गई अब क्या करें? – चलो इसमें थोड़ी यूरिया मिला देते हैं। इसका प्रोटीन कंटेंट एस्टीमेशन करते टाइम बढ़ा हुआ दिखेगा |

4. अरे पानी मिलाने से तो इसका लैक्टोज कंटेंट भी कम हो गया। ग्राहक को फीका लगेगा तो क्या करें?  – चलो इसमें थोड़ी चीनी मिला दो। लैक्टोज और सुक्रोज दोनों ही तो मीठे होते हैं।

5. अरे दूध को निकाले बहुत देर हो गई इसमें तो बैक्टीरिया पैदा हो गए जो एसिड बना रहे हैं और इसकी तो पीएच डाउन हो जाएगी अब क्या करें? – चलो इसमें खाने का सोड़ा मिला देते हैं या फिर कॉस्टिक सोड़ा। बैक्टीरिया मारने के लिए चलो हाइड्रोजन पेरोक्साइड ही डाल देते हैं।

6. अरे पानी मिलाने से तो इसकी स्पेसिफिक ग्रेविटी चेंज हो गई अब क्या करें? – चलो इसमें थोड़ा अरारोट मिला देते हैं। स्पेसिफिक ग्रेविटी बढ़ जाएगी।

7. आज तो गाय/भैंस ने कम दूध दिया अब ग्राहकों का पूरा कैसे पटेगा? अब क्या करें? – इसमें बकरी का दूध मिला दो। ग्राहक को क्या पता चलेगा!!!!

लो जी हो गया मिलावटी दूध तैयार।

तो ये रिकांस्टीट्यूटिड मिल्क क्या बला है?

अरे गर्मी आ गई। गर्मी के कारण एक तो हरा चारा कम आ रहा है ऊपर से जानवर गर्मी के स्ट्रेस में है तो वैसे ही दूध घट गया है। ऊपर से ये शादी ब्याह वाले। डिमांड खूब है उत्पादन है नहीं। अब क्या करें? वो सर्दियों में जब ज्यादा दूध होता है तब बड़ी बड़ी कंपनियां लिक्विड दूध से मिल्क पाउडर बना देती हैं और गर्मियों में जब उत्पादन कम होता है, और मांग शादी ब्याह के कारण बढ़ जाती है तो यही मिल्क पाउडर पानी में घोलकर दूध बना लिया जाता है और इसे कहते हैं रिकांस्टीट्यूटिड मिल्क।

तो एक हुआ प्राकृतिक दूध, दूसरा हुआ मिलावटी दूध और तीसरा हुआ रिकांस्टीट्यूटिड दूध।

तो ये सिंथेटिक दूध क्या बला है?

सिंथेटिक दूध वह दूध है जो बनते हुए बस टीवी चैनलों वालों ने देखा है।

जिसे बनाने का फार्मूला उस एक आदमी को पता है जो मुँह पर सफेद कपड़ा बांध कर टीवी न्यूज रिपोर्टर से अपनी फिल्म बनवा रहा होता है। और जिस गूगल को सब कुछ पता है उसे भी सिंथेटिक दूध बनाने का ना तो फार्मूला पता है और ना विधि।

और जो पता है वह मिलावटी दूध बनाने का तरीका है ना कि सिंथेटिक दूध। सिंथेटिक दूध वह भूत है जिसे जानते और मानते सब हैं मगर आज तक किसी ने देखा नहीं। बस सब महसूस करते हैं और महसूस कराते हैं मीडिया वाले।

ऐसा क्यों करते हैं मीडिया वाले? ऐसा नहीं करेंगे तो “चैन से सोना है तो जाग जाइये” वाला डायलॉग कैसे बोलेंगे और फिर इंस्पेक्टर दया को भी तो कुछ काम चाहिए कि नहीं!

वास्तविकता यह है कि मिलावटी दूध को सिंथेटिक दूध समझा जा रहा है।

प्राकृतिक दूध, मिलावटी दूध सिंथेटिक दूध

File Photo: Synthetic Milk

Cite this Article


Sanjeev Kumar Verma. प्राकृतिक दूध, मिलावटी दूध; एवं सिंथेटिक दूध के भूत का रहस्य. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/858/. Retrieved November 17, 2017.

Tags: , ,

blank

About the Author ()

डॉ संजीव कुमार वर्मा, पीएचडी (पशु पोषण), पीजीडीटीएमए; एआरएस भारतीय कृषि अनुसंधान सेवा (ARS) के 1996 बैच के वैज्ञानिक हैं और वर्तमान में भाकृअनुप – केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं| इससे पूर्व डॉ वर्मा अनेक भारतीय संस्थानों में वैज्ञानिक सेवाएं दे चुके हैं। डॉ वर्मा ने लगभग नौ वर्ष तक पहाड़ी और पर्वतीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध के उपरांत लगभग 5 वर्ष तक द्वीपीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध कार्य किया। इसके बाद लगभग पांच वर्ष तक उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में गोवंश पर अनुसंधान करने के बाद लगभग एक वर्ष तक दक्षिणी कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में मुर्गीपालन पर अध्ययन किया। डॉ वर्मा कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त पुस्तकों के लेखक होने के साथ-साथ वर्तमान में ‘एनिमल न्यूट्रिशन सोसायटी ऑफ इंडिया’, करनाल के ‘वाइस प्रेजीडेंट’ भी हैं और पशु पोषण के क्षेत्र में लगातार उच्च कोटि के अनुसन्धान एवं आम लोगों, किसानों एवं विद्यार्थियों तक विज्ञान के प्रचार प्रसार में कार्यरत हैं | सोशल मीडिया में डॉ वर्मा “बंशी विचारक” के नाम से जाने जाते हैं और देश के हजारों वैज्ञानिकों, छात्रों, एवं किसानों द्वारा लगातार फॉलो किये जाते हैं |

Comments (1)

Trackback URL | Comments RSS Feed

  1. Sandeep says:

    👍👍बाबा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *