कनोला आयल, कनाडा आयल और बंशी बाबा का शुद्ध भारतीय ‘सूर्यवंशम आयल’

| May 28, 2017 | 6 Comments

बचपन में चींटियों को सरसों का तेल पिलाना बहुत अच्छा लगता था।

जहाँ कहीं ढेर सारी चीटियाँ दिखी तो अम्मा तुरंत कहती थी बेटा जाओ चींटियों को थोड़ा तेल पिला कर भगा कर आओ |

हम दौड़ कर किचन में जाते सरसों के तेल की बोतल से एक कटोरी में थोड़ा सा तेल निकालते और जहाँ चीटियाँ होती वहां जाकर कुछ छींटे मारते और चीटियाँ गायब ।

उस समय इतना ज्ञान नहीं था कि चीटियाँ तेल पीकर नहीं, तेल सूंघ कर भाग रही हैं | अब इतने दिनों बाद वैज्ञानिक बनने के बाद समझ में आया है कि चीटियाँ तेल पीकर खुश होकर वहां से नहीं जाती थी, बल्कि तेल के अंदर मौजूद ‘अलाईल आइसोथायोसायनेट’ की गंध से परेशान होकर भाग खड़ी होती थी।

यह ‘अलाईल आइसोथायोसायनेट’  बड़ी करामाती चीज़ है | इसकी बात करने से पहले आपको बता दूँ कि सरसों के तेल में तो यह फिर भी थोडा कम होता है मगर तोरिया (तोरिया/ लाही/ लहिया -Toria/ Lahi; English name: Rapeseed; botanical name: Brassica napus) के तेल में उससे भी ज्यादा |

किन्तु तोरिया में एक तत्व और होता है  – ‘एरुसिक एसिड’ (Erucic acid)। कीड़े मकोड़ों के लिए जहर है यह एरुसिक एसिड | मानव हृदय पर भी इसके अनेक प्रतिकूल प्रभाव होते हैं |

एरुसिक एसिड ही तोरिया तेल को इतना विषैला बना देता है कि 1956 में FDA ने तोरिया तेल के मानव उपभोग पर प्रतिबन्ध लगा दिया था।

मगर वर्ष 1972 में के कनाडा के वैज्ञानिकों ने Indian mustard अर्थात ‘Brassica juncea‘ (Other Common names: brown mustard, Chinese mustard, leaf mustard, Oriental mustard and vegetable mustard) और Brassica napus (तोरिया/ लाही/ लहिया -Toria/ Lahi; English name: Rapeseed) के पौधों की एक नई प्रजाति विकसित की जिसमें एरुसिक एसिड की मात्रा बहुत कम (2% से भी कम) थी |

कनाडा वालों ने भारतीय सरसों एवं तोरिया की उस प्रजाति से निकले तेल को एक फैंसी नाम दिया – ‘कनोला आयल’। कनोला (Canola) बोले तो ‘कनाडा आयल’ लो एसिड (Can)ada + o(il) + l(ow) + a(cid) |

बाद में सरसों एवं तोरिया की इस प्रजाति के तेल को FDA नें भी हरी झंडी दे दी | उन्होंने इस तेल के तरह-तरह के पेटेंट भी ले लिए हैं ताकि कोई और इस तेल को पैदा ही ना कर सके, और करने की सोचे भी, तो पहले अपनी सारी धन-दौलत -रोयल्टी के नाम पर उनको दे दे |

आज, कनाडा जैसे देशों में तोरिया की इस प्रजाति से निकले तेल को सबसे ज्यादा खाया जाता है, और इसे वे लोग बड़ी शान से ‘कनाडा गोल्ड’ अर्थान ‘कनाडा का सोना’ बोलते हैं | भारत में रहने वाले NRI टाइप लोग भी इस ‘Canada return’ आयल को मंगवा कर बड़ी शान से खाते देखे गए हैं|

इस विडियो में ‘Canola Council of Canada’ केनोला आयल की महिमा का गुणगान कर रही है – देखिये


साभार: Canola Council of Canada Youtube channel

वर्ष 1985 में इटली के एक इकोनॉमिस्ट ‘Augusto Odone’ नें British chemist ‘Don Suddaby’ के साथ मिलकर तोरिया के तेल में ओलिव आयल मिलाकर एक नया तेल बनाया जिसको उन्होंने ‘Lorenzo’s oil’ का नाम दिया | यह ‘Lorenzo’s oil’ दिमाग की खतरनाक बीमारी ‘Adrenoleukodystrophy (ALD)’ की रोकथाम में सहायक पाया गया था |इस तेल की कहानी फिर कभी|

किन्तु यहाँ जो ध्यान देने योग्य विशेष बात है वो यह है कि – आप लोगो के पीछे तो कटखने कुत्ते की तरह ‘रिफाइंड आयल’ छोड़ दिया गया, और खुद वो लोग हमारे पुराने ‘तोरिया’ के तेल को वैज्ञानिक विधियों द्वारा ठीक-ठाक करके उसको खाने लगे |

Suryavansham Oil of Banshi babaकिन्तु अभी सब कुछ ख़त्म नहीं हो गया है | क्योकि हमारे पास है हमारा प्राचीन ‘सरसों का देशी तेल’ |

हम बात कर रहे थे ‘अलाईल आइसोथायोसायनेट’ की जो सरसों और तोरिया के तेल में एक तीखी गंध पैदा करता है।

एरुसिक एसिड के विपरीत यह ‘अलाईल आइसोथायोसायनेट’ है यह बड़ा गुणकारी रसायन।

सरसों के तेल में प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला यह रसायन हमें कैंसर से बचाता है। यह रसायन कीमोप्रिवेंटिव एजेंट है। (1)

कीमोप्रिवेंटिव एजेंट वह तत्व होते हैं जो कैंसर बनने की प्रक्रिया को या तो रोक देते हैं, या डिले कर देते है और या रिवर्स कर देते हैं अर्थात घर वापसी | जिस तेल में जितनी ज्यादा गंध वह उतना ही अधिक गुणकारी।

तो कैंसर से बचना है तो लौट आओ पुराने ज़माने में – जब घरों में पूड़ियाँ रिफाइंड तेल में नहीं बल्कि सरसों के तेल में तली जाती थी।

भारतीय रसोईघर वस्तुतः एक छोटा-मोटा दवाखाना ही हुआ करता था। जब से यह ‘किचन’ बना है तो दवाखाना बदलकर बीमारखाना हो गया है।

पिछले लेख में भाई Kamal Jeet आपको रिफाइंड आयल’ के विभिन्न खतरनाक खेलों’ के बारे में विस्तार से समझा ही चुके हैं |

और हम भारतवंशी हैं कि कैंसर को रोकने या वापस तक कर देने वाला तेल छोड़कर पता नहीं क्या क्या खाये जा रहे हैं |

तो सोच लो, ‘सरसों के देशी शुद्ध तेल’ का पूरा का पूरा पीपा ढूंड देख-परख कर लाना है | और फिर उसी को खाना है|

और अगर आपको सरसों का देसी तेल खाते हुए कुछ पिछड़ापन सा महसूस हो रहा हो – तो ये लो, आज से बंशी बाबा ने ‘VigyaanMag’ पर ‘सरसों के शुद्ध देसी तेल को नया नाम दिया ‘सूर्यवंशम आयल’

तो आज के बाद अगर कोई अंग्रेज टाइप NRI आपको कनाडा रिटर्न ‘कनाडा आयल’ या ‘कनोला आयल’ खाने की शेखी बधारे – तो आप उसे अपने किचन में से तुरंत शुद्ध ‘सूर्यवंशम आयल’ की बोतल लाकर दिखाना ना भूलें | ‘विज्ञान मैग’ का रेफेरेंस भी दे देना |

और हाँ जहाँ ‘सुर्यवंशम आयल’ के तेल का दीपक जलता है वहां कीड़े मकोड़े मक्खी मच्छर भी नहीं आते।

तो उप्पी आळो… बिजली ना हो अर मच्छर तंग कर रे हों तो ‘सूर्यवंशम आयल’ चुपड़ कै सो जाइयो मच्छर धौरे ना आवेंगे।

भरतवंशियों आपके पास टाइम कम है  – लौट आइये वापस अपनी संस्कृति की ओर वरना नष्ट होने में ज्यादा देर नहीं है |

और अंत में –

मैया मोही, मै नहीं रिफाइंड आयल खायो |
अब तो बस बंशी बाबा का ‘सूर्यवंशम आयल’ घर लायो ||

बंशी बाबा

Sarshon ka khet

File Photo: Sarson ka Khet


Editorial comment on: Sanjeev Kumar Verma. कनोला आयल, कनाडा आयल और बंशी बाबा का शुद्ध भारतीय ‘सूर्यवंशम आयल’. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/904/.

संपादक की टिप्पणी:

मैंने पाया है कि लिटरेचर में सरसों, लाही, लाहा, येलो सरसों, ब्राउन सरसों, मस्टर्ड, इंडियन सरसों, रेपसीड, राई, राया, काली सरसों इत्यादि नामो में अच्छा खासा confusion है | जैसे कि Dr. I.P.S. Ahlawat, Head, Division of Agronomy, Indian Agricultural Research Institute का लिखा हुआ एक डॉक्यूमेंट “Rapeseed And Mustard” इन्टरनेट पर उपलब्ध है | (2)  इस डॉक्यूमेंट में रेपसीड एवं मस्टर्ड का निम्नलिखित वर्गीकरण दिया गया है |

Indian group International commercial name Common name Local name Chromosome No.
Sarson Indian colza, colza rape Turnip rape Yellow sarson 20
Turnip rape Brown sarson 20
Toria Indian rape Indian rape Yellow toria or lahi 20
Indian rape Black toria or lahi 20
Rai Mustard Indian mustard Rai or raya or lahi 36
Rugosa Pahari rai 36
Black mustard Banarsi rai 16
Dhauli   rai  (B. hirta) White sarson Ujli sarson
Taramira Rock cress Duan, garden rock salad 11

इस टेबल से स्थिति साफ़ होने के बजाय और ज्यादा कम्प्लेक्स हो गयी है |  ऐसा लगता है कि अगर येलो सीड हैं तो वह सरसों भी हो सकता है और तोरिया भी | लाही – तोरिया भी हो सकती है और राई भी | लाहा, राया इत्यादि, जिनका कि अन्य documents में जिक्र है, यहाँ नहीं दिए गए हैं |

इसी डॉक्यूमेंट में Dr. I.P.S. Ahlawat, IARI ने पेज 11 पर Rapeseed को (Brassica campestris var. sarson and toria) कहा हैं – जबकि विकिपीडिया पर Rapeseed को Brassica napus कहा गया है | (3)

विकिपीडिया पर भी विभिन्न लेखों में इन नामों में अच्छा खासा confusion है | सत्य क्या है – इसकी साफ़-साफ़ वैज्ञानिक व्याख्या तो किसी विद्वान् अग्रोनोमिस्ट को ही करनी पड़ेगी |

यही नहीं, केनोला आयल को भी कही रेपसीड, तो कही Brassica napus तो कही, इसकी किसी सब-स्पीशीज oleifera या फिर B. campestris या Brassica juncea इत्यादि की cultivar से बनाया गया बताया है |

जितना ज्यादा लिटरेचर में ढूढता हूँ, उतना ही ज्यादा confusion होता जा रहा है | इसलिए आगे बढ़ने से पहले अति कृपा होगी अगर बंशी बाबा स्वयं या कोई और विद्वान् agronomist इस स्थिति को विभिन्न रेपसीड एवं मस्टर्ड के पौधों, फूल एवं बीजों के चित्र सहित क्लियर कर दे | और बोटैनिकल नाम के साथ यह भी बता दे, कि वास्तव में वो कौन सी रेपसीड / मस्टर्ड थी, जिसे FDA नें 1956 में प्रतिबंधित कर दिया था |

और अंत में वो कौन सी सरसों /राई / राया /मस्टर्ड / पीली सरसों / पीली राई या फिर Brassica की कौन सी species / variety / sub-variety  है जिसका पीपा हमें खाने के लिए घर में लाना है !

जब तक बाबा या अन्य विद्वान् वैज्ञानिक जवाब दे – मै रेपसीड और मस्टर्ड का निम्नलिखित वर्गीकरण जो मुझे विभिन्न वर्गीकरणों को मिला जुला कर देखने के बाद ठीक ठाक लग रहा है – यहाँ आपकी जानकारी  के लिए दे रहा हूँ – इसकी सत्यता के परख तो किसी अग्रोनोमिस्ट को ही करनी पड़ेगी –

Types of Mustard

There are four types of mustard and rape seed.

a) Rai (Indian Mustard)

1. Botanical name is Brassica juncea.
2. It is locally known as mohair or rai.
3. The plant is tall, erect and much branched.
4. Fruits are slender.
5. The seeds are small and reddish brown in colour.
6. In India about 70% area is under this type of mustard.

b) Sarson:

1. Botanical name is Brassica campestris.
2. The fruits are thicker than those of rai.
3. The seeds are yellow or brown.
4. The seed coat is thin.

c) Toria or rape seed:

1. Botanical name is Brassica napus.
2. Plants are more vigorous and hardy.
3. The seeds are reddish.
4. It is commonly found in Punjab.

d) Taramira of Seoba or tara:

1. Botanical name is Eruca sativa.
2. It is of African origin.
3. The stem is and covered with stiff hair solid .
4. The fruit are shorter and stout.
5. The seeds are in a double row in each compartment of the fruit.

Source of above classification: https://goo.gl/rYV4qR

भारतवर्ष में  रेपसीड एवं मस्टर्ड का full-fledged डायरेक्टरेट है: Directorate of Rapeseed-Mustard Research (http://www.drmr.res.in/aboutdrmr.html)

एक और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी

इसके अलावा 12th January 2016 की खबर ये भी है कि भारत के Indian Council of Agricultural Research के वैज्ञानिकों ने Pusa Double Zero Mustard 31 नाम की मस्टर्ड की एक variety विकसित कर ली है जिसमें <2% Erucic acid है | (4) मस्टर्ड की इस variety का कम्पोजीशन इस प्रकार है:

Erucic acid: <2%; Oleic acid: 45%; Linoleic acid: 29%; Lenolenic acid: 14% and Ecosenoic acid: 3%

इसमें से Lenolenic acid एक अति महत्वपूर्ण रसायन है एवं इसके स्वास्थ्य के ऊपर लाभदायक प्रभावों की चर्चा अगले किसी लेख में की जायेगी |

किन्तु इतना स्पष्ट है – कि Pusa Double Zero Mustard 31 variety की खोज करने के लिए, भारत के ICAR के वैज्ञानिक वास्तव में बधाई के पात्र हैं | भारत के 135 करोड़ नागरिक इस variety से बने शुद्ध सरसों के तेल का बेताबी से इंतज़ार कर रहे हैं |

Dark side of the story

ICAR के एक और ऑनलाइन अपडेट के अनुसार – वैज्ञानिकों ने Pusa Double Zero Mustard 31 variety – वर्ष 2015 में ही रिलीज़ कर दी थी | (5) किन्तु मेरी जानकारी के अनुसार – इस विषय में दो-चार न्यूज़ पेपर कवरेज तो है (6) किन्तु इस variety से निकला तेल अभी बाजार में शायद ही उपलब्ध है |

ICAR के 12th January 2016 के प्रेस रिलीज़ में लिखा है कि एक – राजस्थान की कंपनी M/S Arpan Seeds Private, Ltd को इस variety का license दिया गया है जो ‘LifeGard’ के ब्रांड नाम से इस आयल को मार्किट में उतारने के मंशा रखता है | (4)

किन्तु इन्टरनेट पर खूब ढूंढनें पर भी LifeGard नामक मस्टर्ड का तेल मुझे तो कही नहीं मिला |

इस M/S Arpan Seeds Private, Ltd की वेबसाइट को ढूंढा तो पाया की इनकी तो वेबसाइट भी शायद अभी अंडर कंस्ट्रक्शन पडी है (7)

एक तरफ कनाडा जैसे देश हैं – जो अपने canola oil के प्रचार, प्रसार और इस चमत्कारी आयल से अपने देश के नागरिको ही नहीं पुरे विश्व को चकित किये हुए हैं, और एक तरफ है हम – जो अपने वैज्ञानिको की महान खोज ‘Pusa Double Zero Mustard 31’ जो कनाडा के Canola से भी बेहतर variety साबित हो सकती है, का लाइसेंस एक बेनाम सी किसी कंपनी को देकर बैठे हुए हैं, और शायद किसी चमत्कार की आशा कर रहें हैं |

Press Information Bureau (PIB) की वेबसाइट पर एक छोटी सी न्यूज़ आ जाती है (6) वो भी सिर्फ इसलिए कि यूनियन मिनिस्टर ने अपने भाषण में IARI की ’55th Convocation’ में ICAR की इस variety का नाम ले लिया था | और इसी के साथ हमारी सभी जिम्मेदारियों की इतिश्री हो जाती है शायद |

मेरा मानना है कि अगर वास्तव में ‘विज्ञान’ इस देश का एक एजेंडा है (जो मुझे लगता है कि – है) – तो इस स्पीड से काम करने से बात बनने वाली नहीं है | भारत के कर्णधारों को अपने वैज्ञानिकों एवं उनकी उपलब्धियों का उचित सम्मान करते हुए बहुत aggressive तरीके से उनको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा – और उनको एक उचित माहौल देना होगा जिसमें हमारी वैज्ञानिक उपलब्धियाँ वास्तव में जन-साधारण तक पहुँच सके | बिना उचित माहौल के, बिना योजना के, बिना पोलिटिकल विल के, हमारे वैज्ञानिक चाहे कितना भी श्रम कर लें और चाहे कुछ भी खोज कर डाले, सब की सब PIB की वेबसाइट पर न्यूज़ हाशिये पर पडी नजर आयेंगी |

भारत में विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों की संरक्षक – Scientific एवं political fraternity को समझना होगा कि किसी वैज्ञानिक की किसी खोज की खबर लिखे हुए किसी पुराने न्यूज़ पेपर का मजबूरी में टॉयलेट पेपर तो बन सकता है, किन्तु न्यूज़ की इस कतरन से देश का भला नहीं हो सकता |

हाँ खोज से जुडा वैज्ञानिक विशेष जरुर उस कतरन को दिखा-दिखा कर एक और पद्म भूषण, पद्म विभूषण या भारत रत्न ले सकता है, जो उस वैज्ञानिक विशेष की उपलब्धि तो हो सकती है, किन्तु ‘योगदान’ नहीं |

यह सिर्फ एक उदाहरण – ऐसे ऐसे अनेकोनेक उदहारण भारत के प्राचीन एवं आधुनिक विज्ञान की प्रष्टभूमि में भरे पड़े हैं, जहाँ भारत की अति महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोजें, संरक्षण के अभाव में दम तोड़ देती हैं – आशा करता हूँ कि IARI की ‘Pusa Double Zero Mustard 31 ‘ के साथ ऐसा नहीं होगा और इससे निकला तेल भारत में विदेशी रिफाइंड आयल की कहानी को इतिहास बना देगा |

Dr Sunil Kumar Verma

1.
Zhang Y. Allyl isothiocyanate as a cancer chemopreventive phytochemical [Internet]. Molecular Nutrition & Food Research. Wiley-Blackwell; 2010. p. 127–35. Available from: http://dx.doi.org/10.1002/mnfr.200900323
2.
Rapeseed and Mustard. Access Link – https://goo.gl/cG6kQx . Accessed on 28/05/2017.
4.
Launch of Low (<2%) Erucic Acid Indian Mustard Edible Oil – First of its kind in the World. http://www.icar.org.in/en/node/10078.
5.
See this webpage of ICAR – http://www.icar.org.in/en/node/10174.
6.
Union Minister of Agriculture & Farmers Welfare delivers the 55th convocation address of IARI . http://pib.nic.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=158316.
7.
http://www.arpanseeds.com/ (website accessed on 29/05/2017).

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Sanjeev Kumar Verma. कनोला आयल, कनाडा आयल और बंशी बाबा का शुद्ध भारतीय ‘सूर्यवंशम आयल’. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/904/. Retrieved November 17, 2017.

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About the Author ()

डॉ संजीव कुमार वर्मा, पीएचडी (पशु पोषण), पीजीडीटीएमए; एआरएस भारतीय कृषि अनुसंधान सेवा (ARS) के 1996 बैच के वैज्ञानिक हैं और वर्तमान में भाकृअनुप – केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं| इससे पूर्व डॉ वर्मा अनेक भारतीय संस्थानों में वैज्ञानिक सेवाएं दे चुके हैं। डॉ वर्मा ने लगभग नौ वर्ष तक पहाड़ी और पर्वतीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध के उपरांत लगभग 5 वर्ष तक द्वीपीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध कार्य किया। इसके बाद लगभग पांच वर्ष तक उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में गोवंश पर अनुसंधान करने के बाद लगभग एक वर्ष तक दक्षिणी कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में मुर्गीपालन पर अध्ययन किया। डॉ वर्मा कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त पुस्तकों के लेखक होने के साथ-साथ वर्तमान में ‘एनिमल न्यूट्रिशन सोसायटी ऑफ इंडिया’, करनाल के ‘वाइस प्रेजीडेंट’ भी हैं और पशु पोषण के क्षेत्र में लगातार उच्च कोटि के अनुसन्धान एवं आम लोगों, किसानों एवं विद्यार्थियों तक विज्ञान के प्रचार प्रसार में कार्यरत हैं | सोशल मीडिया में डॉ वर्मा “बंशी विचारक” के नाम से जाने जाते हैं और देश के हजारों वैज्ञानिकों, छात्रों, एवं किसानों द्वारा लगातार फॉलो किये जाते हैं |

Comments (6)

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  1. नागेन्द्र सिंह says:

    कनोला की पोल खोल ।

  2. P C kandpal says:

    Thanks for updating..SK & SK..great efforts…wishing you great success.. Regards.. p.c.kandpal

  3. Dr j k Nigam says:

    Great sir……yes suryvansam oil se hi kalyan hoga.

  4. Giriraj says:

    Bahut khoob Dr. Sahab, ICAR ki hajaro aisi uplabdhiya poor industry linkage’s ke kaaran bekaar chalo jaati hai, ICAR farmers ke liye kaam karta hai aur yahi sochkar sab kuch free mei de diya jata, jisse Na hi ICAR ka fayada hota hai aur naa hi janta ka

  5. D. P. Mishra says:

    A very good initiative to enlighten public towards our own traditional food products. I congatulate Dr. Verma for writing such an informative article.

  6. चेतन राणा says:

    डॉ साहब, बहुत ही लाजवाब आर्टिकल, ना सिर्फ यही बाकी भी| आप जो लीक से हट कर यह काम कर रहे है, काबिले तारीफ़ है… आपके जैसे पेशे में आने के बाद हर किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि इस मार्किट लॉबी को डायरेक्ट चैलेंज कर सके…
    नमन आपके प्रयासों को एवं इतनी डिटेल में जानकरियो को.

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