राइस ब्रान (Rice Bran) आयल का पोस्ट-मार्टम

| May 29, 2017 | 11 Comments

जब हम पंतनगर विश्वविद्यालय में स्नातक पाठ्यक्रम में अध्ययनरत थे तो ‘पशु पोषण के सिद्धांत’ नामक विषय में जब प्रोफ़ेसर साहब ‘पशुओं का खान पान कैसा हो’ पढ़ाते थे तो गेहूं के चोकर (व्हीट ब्रान) और धान के चोकर (राईस ब्रान) की बात भी होती थी।

पशुओं के लिए इनकी बहुत महत्ता है। है तो मनुष्यों के लिए भी मगर भरतवंशी तो गोरी चमड़ी के दीवाने हैं वो कहेंगे गोबर खा लो तो गोबर भी खा लेंगे, और खा कर बोलेंगे….यम्मी, लो शुगर – फाइबर रिच पुडिंग।

तो प्रोफ़ेसर साहब बताते थे कि इस राईस ब्रान में तेल भी होता है जिसे राईस ब्रान आयल कहते हैं।

वैसे तो यह राईस ब्रान में ही रहे, और पशुओं हेतु प्रयोग किया जाए, तो बेहतर है – मगर लक्ष्मी के भूखे मनुष्य ने राईस ब्रान को भी निचोड़ लिया और उसमें से तेल निकाल कर बेच दिया, जिसके कारण राईस ब्रान की गुणवत्ता पशुओं के लिए और भी कम हो जाती है।

हमने पूछा कि राईस ब्रान ऑयल का होता क्या है?

तो प्रोफ़ेसर साहब बताते थे कि यह साबुन उद्योग में काम में लाया जाता है। हम भी संतुष्ट हो गए कि चलो भाई साबुन-वाबुन बन जाता होगा।

फिर किसी गोरी चमड़ी के खुरापाती दिमाग में आया कि साबुन क्यों? इसे तो एशियन देशों के अंड-भक्तों को एडिबल ऑयल के रूप में परोसा जा सकता है। बस कैंपेनिंग ठीक से करो – और वो लग गए राईस ब्रान ऑयल को सबसे बेहतर खाद्य तेल सिद्ध करने में, और उन्होंने कर भी दिया।

सबसे पहले बताया कि – 1) राईस ब्रान ऑयल में PUFA (polyunsaturated fatty acids) बहुतायत में होते हैं। फिर बताया कि – 2) इसमें ऐसा तत्व पाया जाता है जो कैल्शियम का अवशोषण कम कर देता है। इसका फायदा भी बताया कि कैल्शियम का अवशोषण कम होगा तो पथरी कम बनेगी।

अरे भाई…. भरतवंशियों की बुद्धि में ही पत्थर भर दोगे तो पथरी के लिए जगह ही कहाँ बची?

आइये अब दोनों दावों का पोस्टमार्टम करें।

राईस ब्रान ऑयल में PUFA (जो मुझे फूफा का कोई जुड़वाँ भाई लगता है जो कुम्भ के मेले में बिछड़ गया था) अधिकता में होते हैं यह सत्य है। मगर पूफा भी तो दो किस्म के होते हैं – एक होता है ओमेगा-6 फैटी एसिड जिसे कहते हैं लिनोलिक एसिड और दूसरा होता है ओमेगा-3 फैटी एसिड जिसे कहते हैं लिनोलिनिक एसिड

यें दोनों फूफा होने चाहिए 1:1 के अनुपात में।

अब प्रश्न उठता है कि राईस ब्रान ऑयल में हैं क्या सही अनुपात में। उत्तर: नहीं हैं – क्योंकि राईस ब्रान ऑयल में लिनोलिनिक एसिड हैय्ये ही नहीं (और अगर किसी variety में है भी तो नगण्य मात्रा में )।

यही बात छुपा ली गोरी चमड़ी ने अपना साबुन बनाने वाला तेल मूढ़मतियों को बेचने के लिए।

राईस ब्रान ऑयल में ओमेगा 6 फुफ्फा तो होता है मगर ओमेगा 3 फुफ्फा ओह सॉरी पूफा नहीं होता (या नगण्य मात्र में होता है)।

फूफा-6 और फूफा-3  का यही गड़बड़ रेशिओ –  माताओं और बहनों में ब्रेस्ट कैंसर को जन्म देती है और भाइयों में प्रोस्टेट कैंसर को। (1)

इसके अलावा PUPA-3 के अन्य अनगिनत फायदे विज्ञान में बताये गए हैं जैसे कि – हृदय रोगों को कम करनें में, गठिया बाय के दर्द को कम करने में, बच्चो में कई रोगों जैसे Attention deficit hyperactivity disorder (ADHD) एवं Autism के खतरे को कम करने में इत्यादि-इत्यादि |

आजकल के बच्चे फोकस नहीं कर पाते हैं, दो मिनट  एक जगह खड़े तो रह ही नहीं सकते – इसे मेडीकल साइंस की भाषा में – Hyperactivity disorder कहा जाता है | अब आप देखिये अपने आसपास – एक दो हाइपर बच्चा मिल जायेगा – डॉक्टर के पास बाद में जाना पहले आपको ये करना है –  कि किचन में से राइस ब्रान रिफाइंड आयल का खुबसूरत सा पैकेट ढूंढ कर उसे पूरा का पूरा शनि देव के मंदिर में रख आना है शनिवार के दिन – बच्चे को फायदा होने के संयोग बन जायेंगे |

कभी गोरों से सवाल पूछना कि भाई तुम्हारे यहाँ स्तन कैंसर ज्यादा क्यों होते हैं? उनके खून में ओमेगा 6 और ओमेगा 3 का अनुपात 15:1 तक होता है।

भाई जब साबुन बनाने वाला तेल खाओगे तो होगा ही। इतना ही नहीं इस अनुपात का डिस्टर्ब होना डायबिटीज, कैंसर, हार्ट प्रॉब्लम, स्ट्रोक, आर्थराइटिस व त्वचा रोगों वालों के लिए खतरे की घंटी है।

साथ ही साथ ओमेगा 6 पूफा ज्यादा खाने से शरीर फूलने लगता है।

कभी गोरों से यह भी पूछना कि भाई तुम्हारे यहाँ स्किन प्रॉब्लम ज्यादा क्यों होती हैं? तो बोलेंगे कि हमारी त्वचा गोरी है न दूध की सफेदी जैसी, इसलिए हमसे तुम्हारे सूर्य भगवान् झिलते नहीं और हमें त्वचा कैंसर हो जाता है। भाई सब साबुन वाले तेल का कमाल है।

अब आते हैं कैल्शियम पर।

चलो भाई – पथरी तो कम बना दी गोरी चमड़ी ने यह भरमाकर कि कैल्सियम का अवशोषण कम होगा। मगर उन बच्चों और बूढ़ों और माताओं बहनों का क्या जो पहले ही कैल्शियम की कमी से जूझ रही हैं? बच्चे रिकेट्स और बूढ़े और माताएं-बहनें ऑस्टियोपोरोसिस से परेशान हैं, और गर्भवती माताओ बहनों में तो स्थिति और भी गंभीर है।

पहले राईस ब्रान ऑयल खाना उनका, फिर उनकी कैल्शियम की गोली और विटामिन डी के कैप्सूल खाना।

आम भी बेच दिया फिर गुठली के पैसे अलग से भी चार्ज कर लिए और छिलके के भी और साथ में यह भी कह दिया कि मैंगो शेक बना कर दो गिलास मुझे भी दे जाना।

एक और सगुफा छोड़ा कि राईस ब्रान ऑयल में औराईजेनॉल होता है।

राईस का बोटैनिकल नाम है ‘ओराइज़ा सटाइवा’। उसमें मिला एक ऑल। तो उसका नाम रख मारा औराईजेनॉल।

कहा गया कि ये औराईजेनॉल कोलेस्ट्रॉल कम करता है। अरे भाई कोलेस्ट्रोल कम करने के चक्कर में स्तन कैंसर करवा लें क्या? और ऑस्टिओपोरेसिस भी और प्रोस्टेट कैंसर भी और त्वचा कैंसर भी और डायबिटीज भी?

तो मेरे प्यारे भरतवंशियों गोरों को बोलो कि भाई साबुन ही बना लो अपने तेल का हम तो सरसों का तेल (बाबा का सूर्यवंशम आयल ) ही खा लेंगे।

और हाँ…..राईस ब्रान में आर्सेनिक थोड़ा ज्यादा होता है। आर्सेनिक बोले तो संखिया…..थोड़ा ध्यान रखना राईस ब्रान ऑयल में भी होगा ही। आर्सेनिक फिर कभी……

बंशी बाबा

Rice bran oil

File Photo: Rice Bran Oil

Bibliography and Notes

1.
Simopoulos A. The importance of the omega-6/omega-3 fatty acid ratio in cardiovascular disease and other chronic diseases. Exp Biol Med (Maywood). 2008 Jun 1; 233: 674–88. [PubMed]

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Sanjeev Kumar Verma. राइस ब्रान (Rice Bran) आयल का पोस्ट-मार्टम. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/952/. Retrieved September 23, 2017.

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Comments (11)

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  1. SATENDRA sharma says:

    Nice article

  2. P C kandpal says:

    Very nice information

  3. AK Rajput says:

    शानदार पोस्ट

  4. Santosh tolia says:

    सर कैंसर के इलाज पर भी प्रकाश डालें, क्या ये अरबों डॉलर की इंडस्ट्री ही है जो कैंसर का स्थायी इलाज देना नहीं चाहती है ताकि इनकी कमाई पर असर ना पड़े। कैनेबी ऑयल से कैंसर का स्थायी इलाज होने के कई लेख पड़े हैं क्या ये सही है?

  5. aseem gupta says:

    an eye opener

  6. राजवीरसिंह says:

    वाह आँख खोल दी

  7. Giriraj says:

    Agar Baba Ramdev ne apna business badhane ke chakkar mei sarson ke oil ka prachar Na kiya hota to ye Indian kitchen SE hamesha ke liye gayab hi ho jaata.
    Very nice article, we have to educate common people in common language of science , and vigyan mag is good initiative.

    • Ganesh says:

      भाई वो कौनू कम नाही.बाबा भी ले आये राईस ब्रान आईल

  8. नागेन्द्र सिंह says:

    ये फूफ्फा जी बी बड़े विचित्र निकले । इनको तो हम अच्छा समझते ते थे। यदि यह 1:1 का अनुपात ओमेगा 3 के पक्ष में चला जाय तो क्या होगा? Too much of a good thing? क्या इस पर कोई शोध है?

    • डॉ सुनील कुमार वर्मा says:

      Respected नागेन्द्र सिंह sir,

      I know you know everything but for others who don’t know –

      First, I thought to clarify the omega-3 and omega-6 in bit more detail. In fact there are three types of omega-3 fatty acids involved in human physiology:

      1) α-linolenic acid (ALA) (found in plant oils)
      2) eicosapentaenoic acid (EPA)
      3) docosahexaenoic acid (DHA)

      Of the above, first is found in plant oils, and last two are found in marine oils)

      Coming to omega-6 फूफ्फा:

      Other than Linoleic acid (LA) as mentioned by Baba – there is one Gamma-linolenic acid (GLA, 18:3n-6) also which is an omega-6 (n-6) PUFA. Arachidonic acid is also omega-6 PUFA.

      These omega-6 PUFA seems very naughty फूफ्फा since excess of most of them disturb the collagen I/III ratio in our body. It has been found that an increase in the collagen I/III ratio in the mouse myocardium leads to cardiac “stiffening” characterized by impaired transmitral flow indicative of early diastolic dysfunction मतलब हर्ट अटैक का पूरा संयोग बन जाता है सर.

      रही बात ओमेगा-3 फूफ्फा के ज्यादा होने पर होने वाले संभावित नुक्सान की – जहाँ तक मेरा ऑब्जरवेशन है, ओमेगा-3 फूफ्फा, वैसे तो ज्यादा होता ही नहीं यह सदा ओमेगा-6 फूफ्फा से कम ही होता है किसी भी खाद्य पदार्थ में | फिर भी, जब मैंने जानना चाहा कि क्या इसकी अधिकता हानिकारक हो सकती है – तो मुझे इस विषय पर कोई नेगेटिव रिफरेन्स तो नहीं मिला अब तक – लगता है यह वाला फूफ्फा सदैव गुड वाला फूफ्फा ही होता है |

      Lastly – α-linolenic acid (which is good guy) should not be confused with Gamma-linolenic acid (which is a bad guy).

      डॉ सुनील कुमार वर्मा

  9. Ajay Arya says:

    बहुत बढ़िया जानकारी , कुछ मूर्ख भारतीय राइस ब्रान आयल को सरसों के तेल और गाय के घी से भी उत्तम बताने पे तुले हुए हैं

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