नॉन वेज की वेज बात – बंशी बाबा के साथ

| June 1, 2017 | 0 Comments

आज नॉन-वेज की वेज बात !

तो ज़नाब मुर्गी 🐔 पकाओ या मुर्गा 🐓, हैं दोनों ‘चिकन’ ही।

मगर ‘मटन’ ने बड़ा कन्फ्यूजन कर रखा है। ‘मटन’ होता है नर भेड़ 🐑 या मादा भेड़ 🐏 का मांस।

जबकि नर या मादा बकरे के मांस को बोलते हैं ‘चेवोन’। अर ताऊ बकरे का मांस खाकै मूच्छों पै ताव देकै बोल्लै…भाई ‘मटन’ बणा तो बड़ा सुथरा था।

‘बीफ’ ने तो ग़दर ही मचा रखा है। वयस्क गोवंशी पशुओं (नर या मादा) के मांस को ‘बीफ’ कहते हैं तथा बछड़े या बछिया के मांस को ‘वील’ कहते हैं।

जबकि महिषी वंशी पशुओं 🐃 के मांस को ‘काराबीफ़’ कहते हैं।

‘पोर्क’ तो सब जानते ही हैं, सूअर 🐷 के मांस को मोटे तौर पर ‘पोर्क’ कहते हैं। वैसे सूअर के शरीर के हर हिस्से के मांस का अलग-अलग नाम होता है। मगर जिस गली जाना ही नहीं तो उसका नंबर भी क्या पूछना?

हिरण के मांस को ‘वेनिसन’ कहते है मगर थोड़ा दूर ही रहना। थोड़ा खट्टा होता है, दांत खट्टे भी कर सकता है!

और हाँ…..कबूतर जा जा जा…….. के मांस को कहते हैं स्क्वाब

और हाँ….. इस बार जब किसी के फ़्रिज से मांस बरामद करवाओगे, तो सही से बताना क्या खा रहा था वो!!!!!!

अमा यार आठ घंटे के काम में आठ महीने गला दिए हो। हैदराबाद भिजवाय दिये होते तो आठ घंटे में रिपोर्टवा आ जाती। दूध का दूध पानी का पानी हो जाता।

बंशी बाबा

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Sanjeev Kumar Verma. नॉन वेज की वेज बात – बंशी बाबा के साथ. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/983/. Retrieved November 17, 2017.

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About the Author ()

डॉ संजीव कुमार वर्मा, पीएचडी (पशु पोषण), पीजीडीटीएमए; एआरएस भारतीय कृषि अनुसंधान सेवा (ARS) के 1996 बैच के वैज्ञानिक हैं और वर्तमान में भाकृअनुप – केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं| इससे पूर्व डॉ वर्मा अनेक भारतीय संस्थानों में वैज्ञानिक सेवाएं दे चुके हैं। डॉ वर्मा ने लगभग नौ वर्ष तक पहाड़ी और पर्वतीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध के उपरांत लगभग 5 वर्ष तक द्वीपीय कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में पशुपालन पर शोध कार्य किया। इसके बाद लगभग पांच वर्ष तक उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में गोवंश पर अनुसंधान करने के बाद लगभग एक वर्ष तक दक्षिणी कृषि पारिस्थितिकीतंत्र में मुर्गीपालन पर अध्ययन किया। डॉ वर्मा कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त पुस्तकों के लेखक होने के साथ-साथ वर्तमान में ‘एनिमल न्यूट्रिशन सोसायटी ऑफ इंडिया’, करनाल के ‘वाइस प्रेजीडेंट’ भी हैं और पशु पोषण के क्षेत्र में लगातार उच्च कोटि के अनुसन्धान एवं आम लोगों, किसानों एवं विद्यार्थियों तक विज्ञान के प्रचार प्रसार में कार्यरत हैं | सोशल मीडिया में डॉ वर्मा “बंशी विचारक” के नाम से जाने जाते हैं और देश के हजारों वैज्ञानिकों, छात्रों, एवं किसानों द्वारा लगातार फॉलो किये जाते हैं |

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