भारत में गोवंश: एक गहन चिंतन – भाग 1

| June 1, 2017 | 0 Comments

चलो एक बछड़ा तो अख़लाक ने मार दिया या नहीं मार दिया और खा लिया या नहीं खा लिया। पर इसकी सज़ा तो उसे न्यायपालिका से भी पहले समाज़ ने दे ही दी।

पहले अल्पसंख्यकों के सरपरस्त यह सिद्ध करने में लगे रहे, कि जो मांस फ्रिज़ में पाया गया वह तो मटन था (उत्तर प्रदेश में चिकन भी मटन होता है, और मटन भी मटन -देखें बाबा का यह आर्टिकल)

चलो जो भी कहो। वो दोहराते रहे कि वह गोमांस नहीं था, मगर बाद में मथुरा लैब की एक रिपोर्ट ने साबित कर ही दिया कि वह मांस ‘गोमांस’ ही था। इसके भी कई वर्जन पब्लिक न्यूज़ में आते जाते रहे | कैसे फ्रिज में रखा बीफ, चिकन, मटन बन जाता है, और कैसे ये बीफ बाद में मटन और एक बार फिर से बीफ इत्यादि बनता रहता है….ये अपने समझ से बाहर की बात है, शायद मथुरा लैब वाले ज्यादा सही बता सकें…..

इस लेख का मुद्दा यह नहीं है कि अखलाख ने किसको मारा और क्या खाया |

मुद्दा है, कि किसी ने एक को मारा और खा लिया, तो बाकी हल्ला काटने लगे खा लिया खा लिया; तो उन बछड़ों का क्या जो बिना किसी का भोजन बने ही कालकवलित हो जाते हैं? उनके प्रति किसी की जबाबदेही नहीं है क्या?

वर्ष 2012 की 19 वीं पशुगणना के मुताबिक भारत में गाय की विदेशी प्रजाति (exotic cattle माने आम बोलचाल की भाषा में अमरीकन गाय) के कुल 5971 हज़ार नर पशु उपस्थित थे। जबकि गाय की ही विदेशी प्रजाति के कुल 33760 हज़ार मादा पशु उपस्थित थे।

देशी गाय के नर पशुओं की संख्या देखें तो कुल 61949 हज़ार नर पशु उपस्थित थे। जबकि देशी गाय के कुल 89224 हज़ार मादा पशु उपस्थित थे।

अगर यमराज के वाहन (भैसा) की बात करें तो कुल 16103 हज़ार नर पशु उपस्थित थे, जबकि मादा पशुओं की संख्या 92599 हज़ार थी।

तो मुझे यह समझ नहीं आता कि भारत देश में नर पशुओं और मादा पशुओं की संख्या में इतना भारी अंतर क्यों है? क्या सभी नर पशु अख़लाक टाइप लोगों ने खा डाले; या कुछ और भी कारण है इनकी घटती संख्या का?

थोडा गौर करिये – विदेशी गाय के नर पशुओं व विदेशी गाय के मादा पशुओं के अनुपात पर।

इनमें है 1 : 5.65 का अनुपात ।

जबकि देशी गाय में यह अनुपात है 1 : 1.44 का।

महिषीवंशी पशुओं में यह अनुपात है 1 : 5.75 का।

तो देशी गाय के केस में तो यह अनुपात फिर भी ठीक ही है, मगर विदेशी गाय के नर पशुओं और मादा पशुओं की संख्या में इतना भारी अंतर क्यों?

क्या विदेशी गाय – मादा बच्चे ज्यादा देती है? क्या देशी गाय नर बच्चे ज्यादा देती है?

क्या देशी गाय के नर बच्चों में मृत्युदर कम है? क्या विदेशी गाय के नर बच्चों में मृत्युदर बहुत ज्यादा है?

या फिर गाय भैसों नें भी अल्ट्रासाउंड इत्यादि करवाकर दौपायों की तर्ज में भ्रूण-हत्या इत्यादि का गोरखधंधा तो शुरू नहीं कर दिया?

या तो माज़रा कुछ और ही है? कहीं विदेशी गाय के नर बच्चों को तिल तिलकर मरने के लिए आवारा सड़कों पर तो नहीं छोड़ दिया जाता? कहीं उनको खूंटे से बाँध कर भूखे प्यासे मरने के लिए तो नहीं मजबूर कर दिया जाता?

उल्लेखनीय है कि 2007 की पशु गणना की तुलना में 2012 की गणना में नर/मादा का यह अनुपात और भी ज्यादा बिगड़ा है (1)  –

2007 में विदेशी गाय के नर पशुओं व विदेशी गाय के मादा पशुओं का अनुपात 1:3.83 था मतलब 3.83 मादा पशुओं पर सिर्फ एक नर | वर्ष 2012 में यह अनुपात और ज्यादा बिगड़ कर 1 : 5.65  हो गया |

2007 में देशी गाय के नर पशुओं व देशी गाय के मादा पशुओं का अनुपात 1 :1.16 था मतलब 1.16 मादा पशुओं पर एक नर| वर्ष 2012 में यह अनुपात थोडा बिगड़ कर 1 : 1.44 हो गया |

2007 में भैसों के नर पशुओं व भैसों के मादा पशुओं का अनुपात 1 :4.37 था मतलब 4.37 मादा पशुओं पर एक नर| वर्ष 2012 में यह अनुपात थोडा और बिगड़ कर 1 : 5.75 हो गया |

मुद्दा बहुत संवेदनशील है मगर है बहुत महत्वपूर्ण। अगर इस मुद्दे पर निष्पक्ष रूप से बुद्धिजीवी, समाज़ के ठेकेदार, धर्म के ठेकेदार, राजनीति के ठेकेदार और सरकार के नुमाइंदे मिलबैठ कर गंभीरता से मनन करें |

और हाँ अगर नर पशुओ की संख्या इसी प्रकार घटती रही – तो वह दिन दूर नहीं जब यमराज को भी इस दुपाए के प्राणों का हरण करने के लिए मेरु कैब और ओला कैब वालों की  शरण में जाना पड़ेगा।

क्योकि यमराज के पास अपने वाहन तो बस 16103 हज़ार अर्थात 1 करोड़ 61 लाख और तीन हज़ार ही बचे हैं जबकि दुपाए हैं 130 करोड़ यानि कि एक-एक भैंसे को 80 चक्कर मारने पड़ेंगे मृत्यलोक से यमलोक तक के……..

बंशी बाबा

Cpw and Calf

File Photo: Cow and Calf. Copyright – Unknown

Bibliography and Notes

1.
Salient Features of 19th Livestock Census. Access date: 02 June 2017. http://pib.nic.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=109280.

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Sanjeev Kumar Verma. भारत में गोवंश: एक गहन चिंतन – भाग 1. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/985/. Retrieved September 23, 2017.

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