Editorial Comment On भारतीय बेल – Aegle marmelos
भारतीय बेल संहिता: कुछ तथ्य

| June 5, 2017 | 0 Comments

This article is an ‘editorial comment’ on  – भारतीय बेल – Aegle marmelos. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/bb/662/.

अभी कुछ दिन पहले वैज्ञानिक बंशी बाबा का ज्ञान वर्धक लेख “भारतीय बेल – Aegle marmelos” पढने को मिला | इस लेख को विज्ञान के विद्वान् पाठको ने काफी सराहा – किन्तु एक विषय पर भारी मतभेद हो चला था, जिसके ऊपर गहन विचार-विमर्श सोशल मीडिया में भी हुआ |

इस टिप्पणी के माध्यम से, मैं इस विषय में अब तक उपलब्ध सटीक जानकारी ‘विज्ञान’ के पाठकों के साथ साझा करना चाहूँगा –

तो सबसे पहले भारतीय बेल (Aegle marmelos)

भारतीय बेल भगवान् शिव का प्रिय फल है – एवं भगवान् शिव – भारत के कोने कोने में विभिन्न नामो, विभिन्न स्वरूपों में पूजे जाते हैं – इसीलिए बेल के भी अनगिनत नाम होना स्वाभाविक ही है –

शुरू करते है संस्कृत से –

संस्कृत में ‘बेल’ को ‘महाफल (mahaphala) एवं शैल्ब्पत्र (shaibapatra) की संज्ञा दी गयी है |

इसके अलावा, सम्पूर्ण भारत वर्ष में बेल को निम्न लिखित नामो से जाना जाता है: अगर हिंदी में phonetics लिखने में कोई गलती हो गयी हो तो मै अग्रिम में क्षमाप्रार्थी हूँ:

अधरारुहा, अकुवकानममेक्यूमिलाई, ऑलूरम, अलुकैम, अलुविगम, अलुविम, अनिनसिल, अरनपुुकिककररामम, अरकानायती, अरिटकी, असोलम, अमृतबें, परमंगलिया, बेल, बेल चाक्का, बेल गुदा, बेल पत्र, बेल श्रीफल, बेला, बेलियाद, माररा, बालवा, बील, बेलीगिरि, बीली, बिटवा, बेल गिरी, बेल खाम, बेल की छाल, बेलमूल, बेल-पत्र, बेल पत्री, बेल-थे, बेलापत्र, बेलविना, बेलविना मार, बेलेथी, बेलगिरि, बेलगिरि (बेएल), बेल्गुडा, बेली, बेलपात्रे, बेलो, बेलमूल, बेलमूल, बेलेथीई, बेलुआ, बिल्ल, बिल काठ, बिला, बिलापत्री, बिलापत्री-हनु, बिली, बिलीगरभा, बिलीगिरिस, बिलिपत्री, बिल्ला, बिल्लादु, बिल्पत्र मज्जा, बेलपत्थर, बिलेपत्र, बिलपात्रे, बिरू, बिलापत्री, बिल्पपति, बिल्वा, बिल्वा मूल, बिल्वा-पांडु, बिल्वा पत्री, बिल्वा पथरे, बिल्वाचेत्तु, बिल्वा, बिल्वम, बिल्वामू, बिल्पवादु, बिल्पपति, बिल्वफलम, बिल्वा, बिल्वामूल, बिवलवा, बायालादा हन्नु, कैपलिकम, कैटापलम, कैप्प्ट्टिरम, काटल, चाल्बेल, सिरेमटर्मेंटिटी, सर्पिलाम, सर्पिलामराम, सिरीविरुतकैम, शिवंकम, सिविटीरमाराम, शिवतीरूवम, सिवत्तुरुमम, कोवलम, कोवलम, दुररुहा, गंधगरभा, गंधपत्ता, गोखली, ग्रंथिला, गुडा बेल्गिरि तजा, हिखगोग, हिरीखागोक, हरिगंधा, इयालबुडी, इयालपु, इयालपुपति, इयाल्पुती, कणकक्ष्य, कंटकी, कंटापलई, कंटापट्टिरम, कपटाना, कारकटम, कारकत्व, करुवीला, करुवलकिकमम, करुविलकिट्टम, करुवीलाम, कटोरि, कन्टेकरपम, केंटापट्टिरम, कोवलककेयू, कोवलम, कोवलतीला, कोइविलम, कोवलम, कोवरिताकी, कुकापी, कुलकम, कुंबला, कुवलाम, कुवलप-पाज़म, कुविलाई, कुविलम, कुविलम पलम, कुविनाम, कुव्वेलम, लक्ष्मीफला, मालारामू, मडो, महाका, महाक-मार्रा, महाकपीठ, महाकपीठाख्या, महाफला, महाफलाह, मिका, मक्कापिटम, मक्कापलई, मकापलम, मकपिटम, माकावली, माकावलीमाराम, मक्कावल्ली, मालुरा, मलुराह, मलुरम, मलुरमाराम, मलूरमू, मंगलया, मारुदु चुटू, मारुआडू, माररेदी, मारेडू, मारुन्तिर्की, माविलमाराम, माविलाव, मुक्ताकुम, मुकुतेकरमाराम, मिकुत्यियल, मिरियतियाल, मिरुतियाम, मिरुतीमाराम, मुलमुकेकानई, मुंकलंतविरुतकट्टी, म्युटांटमुली, मुविलैची, नवासिकम, निलामलिकम, निलामलिक, निमीलाककत्तुमुली, निन्नमुल्ली, निर्मलम, पंकुनकाम, पंकुनकामराम, पैटिर, पत्रश्रेष्ठ, पट्टिरासीरेटम, पट्टिरी, पिरासिनापनकैम, पिटापलम, पातापाला, पुक्कु, पुक्कुल, पुकुलीमाराम, पुतीराटम, पुतिमरुतम, पुतीमरुतमाराम, पुतीवकम, पुतिविटा, पुतिविटम, पोटीरू, पापजा, सदाफाला, सफारजले-हिंदी, सफारीजलीहिंदी, सैलुसा, सैलुसाह, सैलुशुमू, सलतुह, समीरसारा, सैंडिलीयमू, सैंडिलिया, सैंडिलाह, संग्राह, सत्यधर्म, सत्यपाला, शैलपात्रा, शीलुशा, शलतु, शाल्या, शांडिलियमू, शांडिल्य, शिवद्रम (शिव – भगवान शिव, ड्रम – पेड़, पौधे), शिवस्थ्था, श्रीफलामू, श्रीफला, शूल, सी-फल, सरिपल, सरफल, सितानुना, शिवद्रम (भगवान शिव के वृक्ष), सिवद्रमह, श्री-फला, श्रीफल, श्रीफला, श्रीफलाह, श्रीफलामु, सुनीतिका, सूर्यमो, थापीलिया-अरुंग, तिरिककम, तीरिककमम, तीरिकम, तीरिकिकम, तिरूुकम, त्रिपत्र, त्रिशक्तिपात्र, त्रिशिक्षा, वीलावम, वाल्लागा, वानुमुली, वातकाराम, वातम, वाताराम, वल, विक्रिकनियम, विक्रिकनियमम, विल, विला, विलंकाम, ग्रामीण, विल्वाम, विल्वा, विल्वा-पाज़म, विल्वा, विल्वाका, विल्वम, विल्वापेशिका, विल्वाप्पू, विल्वाम, विरिनिकरवारम, विरिंक, वीरियतकांतम, वियालपुती

देश विदेशों में भी भारतीय बेल की धूम है: विभिन्न देशों में भारतीय बेल (Aegle marmelos) को निम्न नामों से जाना जाता है:

इंडोनेशिया: madja, maja, maja batu
लाओस: toum
मलायन भाषा: bel, bila, bilak, maja
नेपाल: bel
नेवारी भाषा: bya
फिलिपीन्स: bael
थाईलैंड: ma pin, ma tum, matum, pha nong, tum
तिब्बत: bi lva, bil-ba, ka-bed-mo, se-yab
वियतनाम: trái mam
बर्मा: okshit, opesheet
कम्बोडिया: bnau
चाइना: mu ju

इसके अलावा बेल के अंगरेजी नाम निम्नलिखित हैं:

bael fruit, bael fruit of India, bael tree, bel fruit, bel tree, Bengal quince, golden apple, Indian bael fruit, Indian quince, stone apple, wood apple

अब आते हैं भारतीय बेल (Aegle marmelos) के चिकित्सकीय प्रयोग / उपयोगों पर:

वैसे तो इस लेख में बंशी बाबा ने भारतीय बेल के अनेकानेक उपयोग बता दिए हैं | इसके अलावा आयुर्वेद, यूनानी, एवं सिद्धा में बेल के निम्न उपयोग वर्णित हैं:

बेल की जड़ को antidote एवं antivenom के रूप में प्रयोग किया जाता है |

इसके अलवा बेल की जड़ को contact therapy, अथवा touch therapy के लिए भी प्रयोग किया गया है |बेल की जड़ को कलाइ में बाँधने पर हैजे (cholera) से सुरक्षा का प्रावधान है |

बेल के फल, पत्ते, एवं जड़ के पाउडर, जूस, एवं  काढ़े (decoction) को diarrhea के इलाज़ के लिए प्रयोग किया जाता है | इसके अलवा इसका उपयोग दस्त (dysentery), sprue, बवासीर (piles), edema, पीलिया (jaundice), उल्टी (vomiting), मोटापा (obesity), आँख के रोग (eye diseases) बुखार (fever) में भी उल्लेखित है |

बेल के बिना पके फल स्तम्मक (astringent) पाचक (digestive), भूख बढाने वाले (stomachic) होते हैं | बिना पके फलों को पेचिस (diarrhea) एवं पुरानी पेचिस (chronic dysentery) के इलाज़ के लिए भी दिया जाता है |

सिरदर्द के इलाज के लिए – बेल के फलों की राख को पानी के साथ मिला कर माथे पर लेप किया जाता है |

बेल के पके हुए फलों को खाने से पुरानी से पुरानी कब्ज भी ठीक हो जाती है |

Aegle marmelos (बेल) के फलों को Adhatoda vasica की पत्तियों एवं Cyperus rotundus  की जड़ के साथ मिला कर, पाने में उबाल कर – माह्वारी (menstrual disorders) से सम्बंधित रोगों में खिलाया जाता है |

बेल के फलों का गूदा – वीर्यपात (spermatorrhea) के इलाज़ के लिए रामबाण है |

बेल के पके हुए फल एवं बीज – पौधों में कीटनाशक (pesticides) का कार्य करतें है एवं फल वाली फसलों के फफूंद के रोगों (fungal infections) को भी ठीक कर देते हैं |

बेल के पत्तों की पुलटीश (Poultice) – आँख एवं त्वचा की बीमारियों में प्रयोग की जाती है |

इसकी पत्तियों को घी में तल कर एक पेस्ट बनाया जाता है – जिसे घाव, कट इत्यादि में लगाने पर घाव ठीक हो जाता है |

बेल के पत्तों का जूस – डायबिटीज (antidiabetic) की बीमारी में दिया जाता है |

अगर अधिक शराब पीने से लीवर सड गया हो (alcoholic hepatitis) तो बेल की पत्तियों का सेवन कराया जाता है |

बेल की टेंडर लीव्स (पत्तियां) पेचिस के इलाज़ में भी उपयोगी हैं |

बेल की छाल एवं पत्तियां – मलेरिया (intermittent fever) के इलाज़ के लिए रामबाण सिद्ध है |

और तो और पशुओं की विभिन्न व्याधियों बीमारियों के निवारण हेतु भी बेल का प्रयोग बताया गया है |

बेल के फलों का काढ़ा – पशुओं के tympany (distanted abdomen) के निराकरण के लिया किया जाता है | इसे मुह के द्वारा पशु को पिलाया जाता है |

बेल के पत्तियों का जूस – मुहपका-खुरपका (foot-and-mouth disease) में दिया जाता है |

हड्डी टूटने पर इसकी पिसी हुयी पत्तियों का लेप करके बांधा जाता है |

बेल की पत्तियों की राख – पशुओं के घावों के कीड़ों को मारने के लिए उपयोगी है |

फोड़े (boils, blisters, ulcers and wounds) होने पर पत्तियों का पेस्ट हल्दी में मिला कर लगाया जाता है |

इसके अलावा – इसकी पत्तियों का पेस्ट पशुओं के कॉर्निया के अन्ध्पन के इलाज़ के लिए eyedrop की तरह प्रयोग किया जाता है |

Coix lacryma-jobi एवं बेल की पत्तियों का जूस मिलाकर ‘रेचक’ (purgative) की तरह उपयोग में लाया जाता है |

अगर जन्म के समय पशु की जेर (प्लेसेंटा) फ़स जाये तो Vitex negundo एवं बेल की पत्तियों को पानी में उबाल कर, गुनगुना करके मुंह के द्वारा पिलाया जाता है, retained placenta निकल आती है|

इसके अलावा – इसके फलों के गूदे, ताने की छाल एवं जड़ों को मछली मारने के लिए जहर की तरह भी उपयोग किया जाता है |

अब कैथ

चर्चा शुरू हुयी थी “कैथ” से – इसलिए कैथ की बात किये बिना यह सम्पादकीय टिप्पणी अधूरी होगी –

तो सुनिए आप –

भारत में कोस-कोस पर बदले पानी, कोस-कोस पर बानी वाली पंक्ति तो आपने सुनी होगी – ऐसा ही कुछ फलो, पौधों के लोकल नामों के विषय में भी सच है:

निम्नलिखित पौधों, पेड़ों, फलों को ‘कैथ’ कहा गया है:

  • All species of Agave are known as ‘Kaitha’ in India
  • Dobera glabra is also named as ‘kikaitha’ in kenya
  • Feronia limonia is also known as kaith, kaith bel, kaitha, kanith, kothu, vilam in India
  • Limonia acidissima is known as ‘Kaith’ or ‘Kaitha’ in India. In Pakistan it is known as ‘kaith bel’
  • Miliusa tomentosa is known as ‘kanakaitha’ in India
  • Neptunia oleracea is known as ‘ishing-ikaithabi’ in India
  • Pandanus furcatus is also known as kaida-tsjeria, kaidatsjerria or kaitha in India
  • Pandanus luzonensis is known as kaita, kaitakam, kaitha, kattu kaitha or kaittakam in India
  • Agave americana is known as ‘seemakaitha’ in India
  • Butea superba is known as ‘kaithi’ in India
  • Ferula kuhistanica is also known as ‘kaith’ in India

तो जो भी फल पत्थर जैसा दिख जाये – उसे कैथ बोलिए, वुड एप्पल बोलिए – सब allowed है |

नामों में इन्ही गड़बड़ियों का चाइना जैसे देश फायदा उठा रहे हैं – Artemisia Annua से  artemisinin निकाल कर मलेरिया की दवाई के रूप में प्रयोग करने के लिए पिछले साल चाइना को नोबेल पुरस्कार दिया गया | यह भारत की इन्ही नामों की गड़बड़ियों के कारण हो गया | मैंने इसका अपने स्तर पर पुरजोर विरोध किया था (1)(2)(3)  – वैज्ञानिक तथ्य दिए थे, पर अकेला चना भाड कैसे फोड़ता? इसकी चर्चा फिर कभी —

तो यह तो थी बेल गाथा |

इस टिप्पणी की एक-एक लाइन के लिखित साक्ष्य मेरे पास है – जो 1753 में लिखी हुयी ‘Species Plantarum’ ; 1798 में लिखी गयी – Pl. Coast Corom एवं सन 1800 में प्रकाशित ‘Transactions of the Linnean Society of London’ तक जाते हैं| इसके अलावा भी कई साक्ष्य उपलब्ध है – किन्तु आप उसकी ज्यादा चिंता अभी ना करें |

हाँ, अगर कोई पूछे तो – बेल के किसी उपयोग का वर्णन करने के लिए ‘विज्ञान’ के इस लेख का सन्दर्भ आप जरुर दे सकते हैं |

डॉ सुनील कुमार वर्मा

Aegle marmelos

Fig: Aegle marmelos (भारतीय बेल)

Cite this Article


Dr Sunil Kumar Verma. Editorial Comment On भारतीय बेल – Aegle marmelos
भारतीय बेल संहिता: कुछ तथ्य
. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/comments/1007/. Retrieved November 17, 2017.
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About the Author ()

Dr Sunil Kumar Verma is an experienced Principal Scientist with a demonstrated history of working in the research industry for more than 20 years. Skilled in Molecular Medicine, Genetics, Translational Research and Wildlife Forensics, Dr Verma has done his doctorate from the University of Oxford. UK.

He had been the inventor of ‘Universal Primer Technology’ (US Patent 7141364), which led to the establishment of India’s first wildlife forensics cell in the LaCONES of CCMB to provide wildlife forensics services to the nation.

He is also the recipient of several national and international awards and honours, including the 2008 CSIR Technology Award, the 2009 NRDC Meritorious Invention Award of Govt. of India and the 2009 BioAsia Innovation Award in recognition of his contribution to Indian science and technology.

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