कौन देता है सबसे शुद्ध पानी: UV Water Purifiers की कहानी

| May 18, 2017 | 8 Comments

भाई कमल जीत ने ‘VigyaanMag’ पर एक महत्वपूर्ण चर्चा शुरू की है “जल की बात”

इस चर्चा में कमल जीत लिखते हैं:

अब जरा एक मिनट RO की सुन लो, रिवर्स ओसमोसिस नाम तकनीक में एक बहुत महीन जाली अंदर से पानी को दबाव से निकाला जाता है,यहाँ तक बात बिलकुल सही है लेकिन घणे सयानों ने इसी तकनीक में UV लैंप नामक एक चीज और जोड़ दी है |

दरअसल अल्ट्रा वायलेट किरणे हरेक जीवित बैक्टीरिया को प्राणदंड देने में सक्षम हैं, लेकिन ये जब किसी बैक्टीरिया को मारती हैं तो उसके नन्हे शरीर में मौजूद डीएनए में म्यूटेशन करके प्रोटीन को डी नेचर ( स्वरुप बदल ) कर देती हैं | जब हम यह पानी पीते हैं तो हमारे पाचन तंत्र में मौजूद रिसेप्टर इन नए प्रकार की प्रोटीनों को पहचान नहीं पाते और शत्रु समझ कर एंटीबाडी बनानी शुरू कर देते हैं | बस यही कैंसर के सफर का स्टेप -1 है “ (Citation needed)

चूँकि चर्चा का यह विषय भारत देश एवं इसके नागरिको के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, अतः यहाँ देश हित में इस विषय से जुड़े कुछ वैज्ञानिक तथ्यों को आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ:

कौन देता है सबसे शुद्ध पानी: UV Water Purifiers की कहानी

इस लेख में सबसे पहले UV लैंप की चर्चा करूँगा, कि वास्तव में UV होती क्या है? और यह कैसे पानी में उपस्थित बैक्टीरिया  को मार देती है | वास्तव में होता क्या है जब UV किसी बैक्टीरिया के शरीर के ऊपर गिरती है ? क्या वास्तव में UV पानी में उपस्थित बैक्टीरिया इत्यादि को मार देती है? अगर हाँ, तो क्या यह पानी में उपस्थित Viruses को भी मार कर ‘सबसे शुद्ध पानी’ बना देती है? और अगर नहीं, तो ऐसे कौन से वैज्ञानिक तथ्य हैं जो आज तक आपको किसी बड़े वैज्ञानिक जर्नल ने बताने की जरुरत नहीं समझी |

क्या है UV?

प्रकृति में UV (Ultra Violet rays) अर्थात ‘पराबैंगनी किरणें’ सूर्य से आने वाले प्रकाश का ही एक हिस्सा होती हैं | सूर्य से आने वाले प्रकाश के विद्युत् चुम्बकीय स्पेक्ट्रम (Electromagnetic spectrum) में पराबैंगनी किरणें, दिखाई देने वाले प्रकाश (Visible light) एवं X-rays के बीच का स्पेक्ट्रम होती हैं और इनकी तरंग दैर्ध्य (Wave length) 100 से 400 नैनो मीटर (nm) के बीच होती है, जैसा कि नीचे चित्र में दिखाया गया है |

UV Spectrum explained

UV किरणों के इस स्पेक्ट्रम को भी इसकी तरंग दैर्ध्य के आधार पर, चार विभिन्न प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है |

Far UV (or ‘vacuum’): 100nm–200nm;
UVC: 200nm–280nm;
UVB: 280nm–315nm;
UVA: 315nm–400nm.

इनमें से UVC एवं UVB ज्यादा खास हैं क्योंकि यें UV किरणें ही विशेषतया पानी में disinfection के लिए प्रयोग की जाती हैं | उल्लेखनीय है कि प्रकृति में UVC एवं UVB टाइप की पराबैंगनी किरणें सूर्य से चलने के पश्चात पृथ्वी के बाहरी atmosphere में ही ओजोन परत के द्वारा वहीं रोक दी जाती हैं और बहुत कम मात्रा में पृथ्वी की सतह तक पहुँचती हैं |

वो अलग बात है कि आजकल ओजोन परत में भी छेद हो गए हैं, और अब ज्यादा UAB एवं UAC टाइप UV किरणें धरती तक पहुँच जा रही हैं, इसकी चर्चा फिर कभी |

पानी को pure करने के यंत्रों में यह UV लाइट एक विशेष प्रकार के बल्ब (UV Lamp) के माध्यम से produce की जाती है |

UV light के विषय में उपरोक्त तक कथन एक सिद्ध सत्य है एवं इसके ज्यादा वैज्ञानिक प्रमाणों की आवश्यक यहाँ पर नहीं है| समस्या शुरू तब होती है जब हम दावे करने लगते हैं कि UV पानी में उपस्थित सारे बैक्टीरिया को मार कर उसे ‘सबसे शुद्ध’ बना देती है |

UV किरणें बैक्टीरिया को कैसे मारती हैं, मारती भी हैं कि नहीं ?

UV किरणों के पानी को ‘सबसे शुद्ध’ कर डालने के दावों से एक बारगी तो ऐसा लगता है, कि UV किरणें शायद बैक्टीरिया के ऊपर गिरते ही उसके टुकड़े टुकड़े करके उसे मार डालती होंगी | या उसे जला डालती होंगी | जबकि ऐसा कुछ नहीं है |

वास्तव में UV किरणें जब किसी microorganism की कोशिका (Cell) के ऊपर गिरती हैं तो उसे पार करके (penetrate) उसके अन्दर घुस जाती हैं और उस microorganism के जेनेटिक मटीरियल डी एन ए (DNA) में एक विशेष प्रकार का परिवर्तन कर देती है जिसे pyrimidine dimerization कहा जाता है | अगर इस प्रकार के बहुत सारे pyrimidine dimers किसी कोशिका में एक साथ एकत्र हो जाएँ तो वह कोशिका बाद में अपनी प्रतिकृति (replication) बनाने में अक्षम हो जाती है अर्थात इस प्रकार की कोशिका का multiplication रुक जाता है और एक प्रकार से यह कोशिका inactive हो जाती है |अगर यह एक बैक्टीरिया है तो इसकी culturability (अर्थात किसी वृद्धि मीडिया में कल्चर हो सकने की क्षमता) ख़त्म हो जाती है | इसीलिये इसे मृत मान लिया जाता है |

अब सवाल यह उठता है कि क्या हम किसी बैक्टीरिया की वृद्धि मीडिया में कल्चर हो सकने की क्षमता (culturability) के ख़त्म हो जाने को उसकी मौत कह सकते हैं? और क्या इस प्रकार के पानी को बैक्टीरिया मुक्त ‘सबसे शुद्ध’ पानी कहा जा सकता हैं?

UV किरणों के द्वारा पानी का डिस-इन्फेक्शन – कुछ वैज्ञानिक खोजें जो UNCELEBRATED रह गयी

UV Water Purifiers के नाम पर ‘पराबैगनी किरणें’ कब आपके kitchen तक पहुँची, इसका सही-सही पता तो मुझे नहीं चल पा रहा है, किन्तु यह कोई 1998 या उससे एक दो साल पहले का समय ही रहा होगा |

जब औद्योगिक घरानों ने भारत में UV वाले पानी को ‘सबसे शुद्ध’ करने वाले इस संयत्र को आपके घरों में बेचना शुरू किया तो UV की महिमा में कसीदे पढ़े गए, किन्तु इसी दौरान इस सन्दर्भ में विज्ञान की कई खोजे uncelebrated रह गयी | इनकी बात किसी ने नहीं की, और इनको एक प्रकार से दबा दिया गया |

इनकी किसी बड़े जर्नल या अखबार नें ने चर्चा नहीं की (क्यों नहीं की, यह तो वो बड़े जर्नल ही जाने) | Commercial औद्योगिक संगठनो से तो इसकी उम्मीद की ही नहीं जा सकती थी |

क्या थी वो वैज्ञानिक खोजें?

वर्ष 2000 में Wilber एवं Oliver  नाम के दो वैज्ञानिको ने अमेरिका के Los Angeles में चल रही American Society of Microbiology की एक मीटिंग में एक शोध पत्र प्रस्तुत किया |

इस पत्र का शीर्षक था – Ultraviolet light induces the VBNC state in Salmonella typhimurium and Escherichia coli (1)

इस शोध पत्र में इन वैज्ञानिकों ने बताया था कि पानी में उपस्थित बैक्टीरिया UV के प्रभाव से nonculturable तो हो जाते हैं किन्तु वो मरते नहीं है अतः फिर से इन्फेक्शन का कारण बन सकते हैं |

Wilber एवं Oliver नें बताया कि यह अवस्था किसी बैक्टीरिया की एक विशेष अवस्था होती है जिसे उन्होंने VBNC (Viable but nonculturable) अवस्था का नाम दिया |

Wilber एवं Oliver के इस शोध पत्र की चर्चा किसी वाटर प्यूरिफायर बनाने वाले औद्योगिक घराने ने नहीं की |

Wilber and Oliver नें दिखाया था कि UV-treated Salmonella serotype Typhimurium एवं Escherichia coli – standard culture media में grow तो नहीं करते, परन्तु वो बाद में जब सही nutrient मिल जाता है अपने साइज़ में वृद्धि (cell elongation) कर लेते हैं |

इसी दौरान Caro एवं उसके साथ काम करने वाले अन्य वैज्ञानिकों ने बताया कि UV irradiation के कारण, VBNC की अवस्था में पहुँच गए ये बैक्टीरिया अपनी स्वशन (respiration) क्रिया जारी रखते हैं एवं इनकी membrane एवं DNA भी intact होता है | (2)

उल्लेखनीय है, कि पानी में प्रयोग किये जाने वाले UV radiation की वजह से DNA में सिर्फ pyrimidine dimer बनते हैं किन्तु वो रहता intact है | अगर इस प्रकार के pyrimidine dimer वाला एक भी बैक्टीरिया किसी भी कारण से बच निकले और शरीर में पहुँच जाये तो वो एक घायल शेर बन जाता है और ऐसा घमासान मचाता हैं जो सौ दो सौ नार्मल शेर भी नहीं मचा सकते | वास्तव में, pyrimidine dimer वाला यह बैक्टीरिया ही आगे चलकर एक से बढ़कर एक एंटीबायोटिक रेसिस्टेंट बैक्टीरिया की खतरनाक नस्लों को जन्म देता है |

वर्ष 2003 में फ्रांस के Andrea Villarino एवं उसके साथी वैज्ञानिको ने कन्फर्म किया कि VBNC की अवस्था में पहुंच गए यें बैक्टीरिया वास्तव में जीवित ही होते है | (3)

इतना ही नहीं, इन वैज्ञानिको नें  UV irradiation की मात्रा का भी बैक्टीरिया की विभिन्न जैविक  क्रियाओं पर विस्तृत अध्ययन किया |

इन वैज्ञानिकों ने बैक्टीरिया को 12-W के 254 nm रेंज की germicidal UV किरणें produce करने वाले लैम्प से निकलने वाली 4 milli Jule/cm2 (low UV dose) एवं 80 milli Jule/cm2 (high UV dose) की शक्ति वाली UV किरणों से irradiate किया |

इन वैज्ञानिको के अनुसन्धान की मुख्य उपलब्धियां निम्नलिखित थी :

1. Immediately following the UV treatment, no decrease in the total number of cells was observed.

अर्थात जब इन वैज्ञानिकों नें Low (4 milli Jule/cm2) एवं high 80 milli Jule/cm2 वाली UV किरणों की बौछार बैक्टीरिया पर भरी प्लेट पर की तो बौछार के तुरंत बाद उनकी संख्या जितनी थी, उतनी ही रही | UV purifier बनाने वाली किसी कंपनी नें इस बात को आपको नहीं बताया |

2. After both UV treatments the great majority of the population (≈ 108 cells/mL) became nonculturable on LB agar plates while a minor percentage remained culturable (0.001–0.0001%)

अर्थात UV irradiation के बाद ज्यादातर बैक्टीरिया nonculturable हो गए |

इतने हैवी रेडिएशन के बाद भी कुछ एक बैक्टीरिया ऐसे थे, जिनको कुछ भी नहीं हुआ और वो साफ़ बच निकले |

जिसका डर था वही हुआ….

हजारों में एक इन बच निकले बैक्टीरिया में के डीएनए में UV के कारण pyrimidine dimerization तो हो गया किन्तु वो पूर्णतया culturable रहे, जीवित रहे inactivate भी नहीं हुए |

UV purifier बनाने वाली किसी कंपनी नें इन बच निकले घायल शेरों की चर्चा कभी नहीं की | कभी नहीं बताया कि 0.001 % यें घायल शेर जब आपके पेट में जाते हैं तो ऐसा घमासान मचाते हैं जो सौ दो सौ नार्मल शेर भी नहीं मचा सकते |

3. During the first 24 h of incubation time without nutrients after UV1-irradiation, the proportion of total and UV-survivor cells remained constant. However, in the case of cells treated with the UV2 dose, a decrease of about 30% in the original total cell number indicated the existence of cell lysis. This decrease in the total cell number was followed by a small increase in the number of culturable cells, which, after 24 h of incubation, reached almost 0.1% of the initial value.

मतलब UV की मार पड़ने के 24 घंटे बाद, पहले तो इन बैक्टीरिया की संख्या घटती दिखाई दी, किन्तु उसके बाद जो culturable बैक्टीरिया बच गए थे, उन्होंने अपनी संख्या धीरे धीरे बढ़ाना शुरू कर दिया |

विज्ञान का स्थापित सिद्धांत है कि जब किसी सेल के DNA में pyrimidine dimerization हो जाता है, तो विभाजन के अगले राउंड में उसके डीएनए में ऐसे ऐसे उत्परिवर्तन (mutation) होते है जिनकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते |

इन उत्परिवर्तनों के कारण एक से एक खतरनाक बैक्टीरिया की नयी किस्मों का जन्म हो सकता है | वाटर प्युरिफायर मशीन के सन्दर्भ मे इस तथ्य की चर्चा कभी किसी प्रसिद्द जर्नल नें पब्लिक फोरम में नहीं की |

99.99 % बैक्टीरिया INACTIVATE होकर मर जायेंगे यह तो बताया (जो कि गलत था, क्योकि वो 99.99 % भी मरते नहीं सिर्फ nonculturable  हो जाते हैं) किन्तु जो 0.001 % UV से घायल होने के बाद भी बच जायेंगे वो किस प्रकार तूफ़ान मचाएंगे, यह तथ्य सब ने छिपा लिया |

इसके बाद इन वैज्ञानिकों ने यह जानने के लिए कि VBNC (Viable but nonculturable) की अवस्था में पहुँच गए  99.99% बैक्टीरिया किस हद तक inactivate हुए थे, उन्होंने इन बैक्टीरिया को रेडियो-एक्टिव कार्बन वाला ग्लूकोस  (14C-glucose) खिलाना शुरू किया | इस सन्दर्भ में उन्होंने पाया कि:

4. For untreated cells, glucose incorporation in the absence of catalase reached a steady state level of about 3.6 µmol [14C]glucose per µg protein after 4 h of incubation. UV1-treated cells incorporated 2.5 µmol [14C]glucose per µg protein corresponding to 69% of the glucose incorporated by untreated cells. However, for UV2-treated cells, a large decrease in the maximal glucose incorporation (0.6 µmol [14C]glucose per µg protein) was observed, corresponding to only 17% of the glucose incorporated by untreated cells (Fig. 2A). When the same experiments were carried out in the presence of catalase, an increase in glucose uptake of about 60% was observed (Fig. 2B) in untreated and UV1 and UV2-treated cells.

अर्थात, जैसे ही UV की मार झेल रहे इन बैक्टीरिया को सही nutrient वगैरा मिले (जो इनको आपके पेट में जाने के बाद मिलने ही हैं), इन्होने मजे से ग्लूकोस पीना शुरू कर दिया, जो इनके जीवित होने का प्रमाण था |

UV वाले वाटर प्युरिफायर बनाने वाली कंपनी नें तो यह नहीं बताया कभी! उल्टा वह अपने product मैन्युअल में यह लिखते रहे:

“When Penetrated into water, the UV radiation are absorbed by the DNA of pathogens. These UV rays alter the DNA of these pathogens in such a way that they loose the ability to reproduce, multiply and infect. Thus they are essentially killed and cannot cause infection.  This process of DNA modification is known as inactivation.”  (From the product manual of KENT MAXX water purifier) (4)

अब पूछना आपको है कि क्यों इन UV वाटर बनाने और बेचने वाले महा घरानों नें आपसे झूठ बोला कि “Thus they are essentially killed and cannot cause infection”. और अगर बोला तो क्यों इन पर झूठ फैलाने के अपराध में कन्सुमर कोर्ट में मुकदमा ना चलाया जाये ?

इस शोध पत्र के अंत में इन वैज्ञानिको ने यह निष्कर्ष निकला था :

“Cells were defined operationally as alive or dead depending on the method used to determine cell viability. For example, using the capacity of cell division or elongation as a criterion for bacterial life, cells treated with UV1 and UV2 doses could be diagnosed as dead cells. In contrast, if the capacity to transport or metabolize glucose is used as a criterion of bacterial life, cells treated with UV1 and UV2 doses could be diagnosed as living cells.”

अर्थात, बैक्टीरिया मर गए, बैक्टीरिया मर गए चिल्ला चिल्ला कर हम मरने की अपनी बनाई हुयी डेफिनिशन के हिसाब से खुश होते रहे किन्तु उन कथित मरे हुए बैक्टीरियाओं नें मौका मिलते ही रक्तबीज की तरह बाकायदा अपनी metabolic एक्टिविटीज को चालू कर दिया था |

और जो 0.०1% पूर्णतया जीवित किन्तु DNA damage वाले बैक्टीरिया बचे, वो आम आदमी के पेट में जाकर क्या क्या गुल खिला रहे हैं, इसकी चर्चा करना मेडीकल साइंस के कर्णधारों या फिर औद्योगिक घरानों की R&D labs ने मुनासिब नहीं समझा |

मैंने quick लिटरेचर सर्च किया तो पाया कि वर्ष 2015 में चाइना के वैज्ञानिको नें ACS group के reputed जर्नल में “UV Disinfection Induces a VBNC State in Escherichia coli and Pseudomonas aeruginosa” टाइटल से एक शोधपत्र छापा है |

इसमें इन्होने दुबारा से Wilber एवं Oliver तथा Andrea Villarino जैसे वैज्ञानिको के लगभग भुला या दबा दिए गए कार्य को दुबारा सिद्ध किया है

इन्होने अपने शोध पत्र में साफ़ साफ़ लिख  दिया है कि –  UV की मार के कारण VBNC की स्टेट में पहुंचे इन बैक्टीरिया में “gadA and oprL” नामक जीन highly expressed रहते हैं, जो सिद्ध करता है कि ये बैक्टीरिया अभी सिर्फ शांत हैं किन्तु इन्फेक्शन फ़ैलाने में सक्षम हैं | (5)

“Furthermore, the virulence genes gadA and oprL remained highly expressed, suggesting that the VBNC bacteria still displayed pathogenicity.”

इन वैज्ञानिको ने यह conclusion निकाला है कि:

“These results systematically revealed the potential health risks of UV disinfection”

इतना सब होने के बाद भे बड़े वज्ञानिक जर्नल अब तक मौन हैं (आपको पता ही होगा कौन है बड़े वैज्ञानिक जर्नल) और UV वाटर purifier से सबसे शुद्ध पानी बनाने वालों की तो बात ही क्या !

मै हैरान हूँ कि एथिकल committees and bio-safety concerns वाली authorities लैब में मॉडिफाई किये हुए बैक्टीरिया के लिए तो इतनी सजग है, हजारों रूल्स हैं, जो हम वैज्ञानिकों को फॉलो करने होते हैं –  और दशकों से हर घर में kitchen के अन्दर जो UV irradiation से बैक्टीरियल modifications हो रहे हैं वो कैसे होने दिए गए…….!! कैसे बोतल बंद पानी शान से लिखते है UV treated और मजे से उस पानी को हमारे गलों में उतार रहे हैं….

यह तो हुयी सीधी सीधी बात, जबकि सब कुछ बिलकुल स्टैण्डर्ड है

मतलब water purifier में प्रयोग UV लैंप बिलकुल स्वस्थ अवस्था में है, purifier का डिजाईन दुरुस्त है और लगातार NSF/ANSI द्वारा recommended 40 milli Jule/cm2 की शक्ति से पानी के बैक्टीरिया को irradiate कर रहा है ताकि पानी में उपस्थित बैक्टीरिया का कम से कम 4-log inactivation (अर्थात 99.99% inactivation) हो सके |
(जो अब हमें पता हैं कि यह 99.99% inactivation /removal नहीं होता वरन 99.99% बैक्टीरिया UV के कारण VBNC स्टेट में  पहुँच जाते है और मौका मिलते ही बाद में सब गुल खिलते हैं, जिसकी चर्चा ऊपर विस्तार से की गयी है ) |

अब आते हैं भारतीय जुगाड़ व्यवस्था पर:

Water purifiers में लगे यें UV लैंप समय के साथ कमजोर होने लगते हैं और इनकी irradiation पॉवर घटने लगती है | हम भारतीय तो इस प्रकार की टेक्निकल बातों को चकमा देने में माहिर है ही इसीलिये मैंने कई घरों में देखा है कि उनके water purifier के लैंप पांच दस साल तक बदले नहीं जाते, बस चलते रहते हैं, चलते रहते हैं |

इस प्रकार के अधकचरे irradiate किये हुए पानी में बैक्टीरिया केवल जीवित ही नहीं रहते वरन पेट में जाकर न जाने कितनी प्रकार की खतरनाक strains बना लेते होंगे, जो बाद में किसी भी एंटीबायोटिक से भी नहीं मरती |

ये तो हुयी बैक्टीरिया की बात – अब वायरस

वैज्ञानिक प्रयोगों से पता चला है कि जहाँ 99.99% बैक्टीरिया बाबू सिर्फ 22 milli Jule/cm2 शक्ति के UV irradiation inactivate (VBNC) हो जाते हैं, वहीं वायरस भाइयों का 99.99% inactivation करने के लिए 186 milli Jule/cm2 शक्ति का UV irradiation चाहिए

20, 30 या 40 milli Jule/cm2 की UV पॉवर से इनका कुछ नहीं बिगड़ता |

भारत में बिकने वाले अधिकतर Water Purifiers मुख्यतया तो उनकी milli Jule/cm2 power का जिक्र ही नहीं करते हैं और कोई करता भी होगा तो वह 40-50 milli Jule/cm2  से ज्यादा नहीं होती क्योकि बेस्ट ऑफ़ दी बेस्ट ‘क्लास A’ के वाटर purifier में 40 milli Jule/cm2 UV strength recommended है |

इस 40 milli Jule/cm2 से वायरस का कुछ भी नहीं होता उलटे वो आधे अधूरे irradiate होकर घायल शेर बन जाते हैं और पेट में जाकर नयी नयी किस्म के नए mutated वायरसों को जन्म देते हैं| जिसकी चर्चा फिर कभी |

सवाल यह है कि ‘सबसे शुद्ध’ पानी बेचने वाले यें औद्योगिक घराने कभी भी वायरस की बात क्यूँ नहीं करते ?

UV के अन्य खतरनाक खेल

लेख बड़ा हो रहा है, स्पेस लिमिटेड है (बड़े जर्नल्स की तरह ☺ ) इसलिए UV के अन्य खतरनाक खेल जैसे कि UV के प्रभाव से पानी में free radicals की उत्पत्ति, UV का पानी के अणुओं पर प्रभाव, inactivate होकर बाद में activate एवं mutate हो गए बैक्टीरिया एवं वायरसों  का घमासान इत्यादि पर चर्चा फिर कभी…..

आप सोच रहे होंगे कि मै अपने UV वाले ‘सबसे शुद्ध’ पानी बनाने वाले वाटर प्यूरीफायर का क्या करू?

क्या करोगे, बेच दो ओलक्स पर | हाँ, खरीदने वाले को इस लेख का लिंक मत भेज देना नहीं तो वो भी नहीं खरीदेगा !

आप चिंता तो करें पर ज्यादा न करें…..आगे आने वाले लेखो में हम और कमल भाई मिलकर निकालेंगे कुछ रास्ता…

हाँ, अगर आप इस और कमल जी के “जल की बात” वाले लेख को मिलाकर कम से कम हजार बार पब्लिक इंटरेस्ट में social media पर शेयर करें तो मैं अगले लेख में बताऊंगा कि मैंने अपने घर में वाटर purification के लिए कौन सा और किस ब्रांड का वाटर purifier लगाया है, जो मैंने विज्ञान की इन सब बातों को बिना पढ़े सिर्फ scientific common sense के आधार पर आज से तीन चार साल पहले बहुत ढूँढ-ढूँढ कर खरीद कर लगाया था, और जो आज भी इन सब बातों को जानने के बाद भी पूर्णतया सुरक्षित है | तो कीजिये शेयर देश हित में….फायदा आपका नुक्सान UV वालों का….जब दस हजार हो जाएँ तो बता देना नीचे कमेंट में…..

एक तरीका और है मुझसे यह बात मुझसे निकलवाने का  – You can Email subscribe (and activate) for free to receive the table of content from ‘VigyaanMag’ and ‘Vigyaan blogs’ and I will send you the answer on your registered email address.

डॉ सुनील कुमार वर्मा

Bibliography

1.
Wilber, L.A. & Oliver, J.D. (2000) Ultraviolet light induces the VBNC state in Salmonella typhimurium and Escherichia coli. Abstr. Gen. Meeting Am. Soc. Microbiol., p. 400. Los Angeles, CA, USA.
2.
Caro, A., Got, P., Lesne, J., Binard, S. & Baleux, B. (1999) Viability and virulence of experimentally stressed nonculturable Salmonella typhimurium. Appl. Environ. Microbiol. 65, 3229–3232.
3.
Villarino A, Rager M-N, Grimont PAD, Bouvet OMM. Are UV-induced nonculturable Escherichia coli K-12 cells alive or dead? [Internet]. European Journal of Biochemistry. Wiley-Blackwell; 2003. p. 2689–95. Available from: http://dx.doi.org/10.1046/j.1432-1033.2003.03652.x
5.
Zhang S, Ye C, Lin H, Lv L, Yu X. UV Disinfection Induces a Vbnc State inEscherichia coliandPseudomonas aeruginosa [Internet]. Environmental Science & Technology. American Chemical Society (ACS); 2015. p. 1721–8. Available from: http://dx.doi.org/10.1021/es505211e

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Dr Sunil Kumar Verma. कौन देता है सबसे शुद्ध पानी: UV Water Purifiers की कहानी. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/comments/735/. Retrieved September 23, 2017.

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About the Author ()

Dr Sunil Kumar Verma is an experienced Principal Scientist with a demonstrated history of working in the research industry for more than 20 years. Skilled in Molecular Medicine, Genetics, Translational Research and Wildlife Forensics, Dr Verma has done his doctorate from the University of Oxford. UK. He had been the inventor of 'Universal Primer Technology' (US Patent 7141364), which led to the establishment of India's first wildlife forensics cell in the LaCONES of CCMB to provide wildlife forensics services to the nation. He is also the recipient of several national and international awards and honours, including the 2008 CSIR Technology Award, the 2009 NRDC Meritorious Invention Award of Govt. of India and the 2009 BioAsia Innovation Award in recognition of his contribution to Indian science and technology.

Comments (8)

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  1. Hanif Khan says:

    Any research finding about the UV treated water causing cancer?

    • Prakash Vir Sharma says:

      Recent studies also suggest that the intake of water low in calcium (reverse osmosis water), may be associated with higher risk of fracture in children (Verd Vallespir et al. 1992), certain neurodegenerative diseases (Jacqmin et al. 1994), pre-term birth and low weight at birth (Yang et al. 2002) and some types of cancer (Yang et al. 1997; Yang et al. 1998). In addition to an increased risk of sudden death (Eisenberg 1992; Bernardi et al. 1995; Garzon and Eisenberg 1998), the intake of water low in magnesium seems to be associated with a higher risk of motor neuronal disease (Iwami et al. 1994), pregnancy disorders (so-called preeclampsia) (Melles & Kiss 1992), and some types of cancer (Yang et al. 1999a; Yang et al. 1999b; Yang et al. 1999c; Yang et al. 2000).

  2. Sandeep tomar says:

    I agree to one point that UV destroy the DNA of bacteria to make them inactive and avoids the possibility of multiply them in human body. UV rays are even ineffective on many strains of viruses so water is not pure as advertised.
    But I am not able to understand the phenomenon of developing antibodies. My background is not genetics but to my basic knowledge our gastric juices and gut flora will take care of these bacteria which enter the system. Antibodies are made when there is a attack on our system and not by inactive organisms. So please support your claim with studies related to Cancer.

    Editor’s response:

    Sandeep Tomar Ji – Kamal Jeet ji, who is a food technologist is working on this part of his article and will soon propose his hypothesis through another article. It is possible that we dont find many published papers on this hypothesis, but lets understand from him.

    Only one thing I can say, that having said and established through references, the DNA of the UV inactivated bacteria is actually an atom bomb. More dangerous than the DNA of native bacteria. When this atom bomb enter in our gut, how this DNA behaves there, it is a matter of research. Can such exposed DNA somehow integrate with normal microflora of gut to make new combinations and alterations? I am not sure if such studies are done. We need more understanding on this.

    Last part of your above comment, I dont agree with; Antibodies can be made against anything that is a good antigen and presented well by APCs. Many of the vaccines used are ‘Killed or inactive organisms only.

    There is big difference in pure water and safe water. Water need not be pure but safe for drinking and should not create illness after consuming.

    As falsely advertised TDS is never a culprit or harmful substance in water. I have personally visited many villages In Rajasthan where locals are consuming water with TDS higher than WHO recommend value 500 ppm and never visited a doctor in their lives.

    We need to remove only specific substances such as fluoride, heavy metal, toxins, bacteria and viruses if we are certain of their presence.

    All of these can be easily removed by proper filtration, activated carbon adsorption. So a filter with micron cartridge, activated carbon better silver impregnated to avoid generation of bacteria followed by ultra-filtration cartridge is enough for more than 90% of cases. Important is water storage where bacteria and viruses can breed. So you shall add some silver coins and copper strip or counts in storage tank.

    Personally I am against installation of RO unless necessary for very high TDS waters like TDS above 700 ppm and known harmful and toxic substances. But have doubts on the UV causes Cancer, may be it needs more long-term research to claim such statements.

    Editor’s response

    Water is a molecule, which is much more complicated than we originally anticipated. We still dont understand much of its chemistry. I may invite Dr D.P. Mishra my Biochemistry Professor, to comment on this. Do we know what happens to the molecules of water, when they absorb very high energy UV rays?

    Best of luck

    • Prakash Vir Sharma says:

      If you are using activated carbon filter, then you must know about its regeneration which need steam. Though cartridge filter is also a good option.

  3. DHARMENDRA SINGH HINDUSTANI says:

    VERY VERY KNOWLEDGEABLE ARTICLE, I think that you will give such type research able note from labs in your magazine….

  4. कौशल says:

    तो यह रहा औद्योगिक घरानों का साइंटिफ़िक डायलिमा । अच्छा हुआ हमने जल शुद्धि का पुराना तरीका ही अपनाया हुआ है यानी जल-क्वथन और तुलसी पत्र । शायद यह सबसे निरापद तरीका है । डीफ़्लोरीडेशन के लिए भी तुलसीपत्र का प्रभावकारी उपयोग राजस्थान विश्वविद्यालय के एक शोध में प्रमाणित हो चुका है ।

  5. शिशिर मिश्र says:

    आपने ढेर सारी तकनीकी जानकारी वाटर प्युरीफाइड की दी ।धन्यवाद ।पर यह आम जनता के सर के ऊपर से जानेवाली है। जनता को शुद्ध पानी का नुस्खा व उसका प्रमाण जानने की इच्छा है ।

  6. Muesh says:

    Worth reading article

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