रिफाइंड आयल की कहानी – एक फ़ूड टेक्नोलॉजिस्ट की ज़ुबानी

| May 17, 2017 | 6 Comments

Dear Dr Sunil Kumar Verma,

अजीज भाई आशीष भाटिया के ध्यान दिलवाने पर रिफाइंड तेल के बारे में फैक्ट्स एकत्र करने का मन किया |

वैसे तो मेरी प्रयोगशील माता जी ने आज से लगभग अठारह वर्ष पूर्व ही अपने अनुभवों के आधार पर रिफाइंड को किचन से बाहर कर दिया था और फिर हम सरसों के तेल और देसी घी के सहारे अपना काम चलाते रहे |

मैं हरियाणा कृषि विश्वविधालय से फ़ूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी पढ़ आया कसम से साइंस साइंस ले आया टेक्नोलॉजी वहीँ गाड आया क्यूंकि विश्वविधालय में गुरु जनों की कृपा और लाइब्रेरी में मुक्त अध्ययन से यह बात समझ आ गयी थी भारत देश की पारम्परिक फ़ूड टेक्नोलॉजी से बेहतर कुछ नहीं है | बस मैं ऊपर वाले का नाम ले कर आगे बढ़ता रहा और रास्ते मिलते चले गए | (कहानी लम्बी और दिलचस्प है सुनाने लगूंगा तो मुद्दा हाथ से खिसक जाएगा )

बात सन 1985 के आस पास की है जब रामायण के एपिसोड में मैंने सफोला करडी के तेल का विज्ञापन देखा जिसमें हार्ट अटैक होता आदमी और एम्बुलेंस के सायरन की आवाज सुनाई दी और यह दावा किया गया कि अब सफोला का तेल आ गया है और अब हार्ट अटैक नहीं होंगे |

लेकिन आप सभी जानते ही हैं सफोला के बाद उसका भाई , बाप , चाचे का लड़का बुआ का लड़का और सारे दुनिया भर के रिफाइंड मार्किट में आ लिए हमने बरत लिए लेकिन हार्ट अटैक कितने गुना बढ़ गये आप और हम सभी जानते हैं सब कोई न कोई अपना अजीज खोये बैठे हैं | खैर छोड़ो पहले मैं आपको इन बिमारियों के ओरिजिन की कहानी सुनाता हूँ|

पूरी दुनिया का बाबू मरीका सबसे ज्यादा सोयाबीन नामक फसल का उत्पादन करता है , खुद खाने की लिए नहीं हमें खिलाने के लिए भी नहीं अपने देश के सूरों (पिग्स ) को पलाने के लिए |

सूर भी भाई भोत एंडी हैं सीधे सोयाबीन थोड़ी ना खायेंगे उनको इसके केक चाहिए , सोया केक | तो लीजिये भाइयों बहनों मेरे जैसे पढ़े लिखे फ़ूड टेक्नोलॉजिस्टो ने जब प्रयोगशाला में सोया केक बनाया तो उनके हाथ केक के साथ तेल का एक कुआं भी लग गया |

और कुआं क्या लगा कसम से लाटरी लग गयी | दुनिया में मार्केटिंग और समान बेचने का एक सबसे पुराना हथियार है एक स्टोरी गढ़ना और फिर उस स्टोरी को बेचना |

तो जनाब एक स्टोरी गढ़ी गयी और हार्ट अटैक का डर दिखा कर “साल्वेंट एक्सट्रैक्शन विधि “ से तेल निकाल कर मशूहूरी के जरिये आपके रसोई घर में पहुँच गया रिफाइंड |

आइये पहले बात करें साल्वेंट एक्सट्रैक्शन प्रोसेस की , नाम सुनने में जितना आकर्षक काम उतना ही रद्दी

साल्वेंट को आप घोलक बोल सकते हैं , रिफाइंड तेल निकलने के लिए दुनिया में एक यूनिवर्सल घोलक का प्रयोग किया जाता है “एन हेक्सेन “

ये एन हेक्सेन पेट्रोलियम रिफाइनरी में पेट्रोलियम साफ़ करते समय एक बाय प्रोडक्ट के तौर पर बाहर निकलता है | हवा के संपर्क में आते ही यह गैस भी बन सकता है |

वर्ष 2001 से अमरीका में इसे खाने पीने के सामान बनाने के प्रोसेस से दूर रखने का हुकम सुनाया हुआ है क्यूंकि यह साबित हो चुका है कि इससे कैंसर होता है | इसकी हलकी मात्रा खाने में आ जाये तो निम्लिखित उपलब्धियां हो सकती हैं :

अनिद्रा , यूफोरिया , मस्कुलर डिसट्राफी , नर्वस कोर्डिनेशन में कमी

इनमें से कोई ना कोई सबके साथ लगा ही होता है |

अब मैं शोर्ट में आपको साल्वेंट एक्सट्रैक्शन विधि से रूबरू करवा देता हूँ

रिफाइंड तेल बनाने के लिए निम्नलिखित बीजों में से कोई एक बीज होना चाहिए अपने पास

Canola
Soybean
Corn
Sunflower
Safflower
Peanut

1. बीजों को छील-छाल कर, धूल मिटटी हटा कर पीसने के लिए तैयार कर लिया जाता है |

2. बीजों को पीस कर 110 से 180 डिग्री सेल्सिअस पर स्टीम बाथ देकर तेल निकालने के लिए रेडी किया जाता है

3. अत्त्याधिक दबाव और घर्षण वाले रास्ते से बीजों को गुजरा जाता है जिससे तेल पल्प से अलग होने की स्थिथि में आ जाता है

4. अब इस पिलपले पल्प को एन हेक्सेन जो कि लिक्विड अवस्था में पड़ा होता है के अंदर उपर से धीरे धीरे करके गिराया जाता है और एक सटीरर के जरिये इस मिश्रण को घुमाते रहते हैं |

पेट्रोलियम से अलग हुआ एन हेक्सेन अपने अंदर तेल को समाने के लिए बेकरार होता है और देखते ही देखते पल्प में से बूँद बूँद तेल सारा एन हेक्सेन के अंदर समा जाता है |

सेंट्रीफ्यूज विधि से एन हेक्सेन और पल्प को अलग कर लिया जाता है जो पल्प बचता है उसे सोया केक बनाने के के लिए छोड़ दिया जाता है और एन हेक्सेन में घुला हुआ तेल अब हमारी रसोई तक के सफ़र में आगे चल पड़ता है

5. अब वाटर डीगुममिंग (degumming) विधि के जरिये एन हेक्सेन में घुले हुए तेल में एक चिपचिपा पदार्थ होता है लेसिथिन उसे अलग करने के लिए घुले हुए मिक्सचर में पानी की धार मारी जाती है और सेंट्री फ्यूज प्रक्रिया से भी इस घुले हुए मिक्सचर और पानी को निकलते है इससे हाइड्रेटेड फासफयीड नीचे बैठ जाते हैं और कीचड की शक्ल में द्रव से अलग हो जाते हैं | इसी कीचड से बाद में लेसिथिन बनता है और आपकी प्यारी टोफियों का सामान

6. अब घुले हुए द्रव में कास्टिक सोडा (साबुन बनाने वाला ) और सोडियम कार्बोनेट आदि घोले जाते हैं ताकि इस द्रव में फैटी एसिड , फोस्फोलिपिड्स , पिगमेंट्स मोम आदि हो तो वो निकल आये जिससे आयल में आगे जा कर किसी प्रकार का ओक्सिडेशन या गन्दी स्मेल आदि ना उत्पन्न हो | इस प्रक्रिया को प्यार से न्युट्रालिज़ेशन कहते हैं एक बार फिर टैंक में नीचे कीचड जमा हो जाता है जिसमें उपरोक्त सभी पदार्थ जमे रहते हैं |

7. अब तेल को ब्लीच (रंग काट ) करने के लिए तुरंत गर्म किया जाता है और फुल्लर अर्थ ( एक प्रकार की मिटटी ) , एक्टिवेटिड कार्बोन और एक्टिवेटिड मिटटी पर गिराया जाता है जिससे तेल के अंदर मौजूद सभी प्रकार के रंग छूट जाते हैं और आपका तेल चमकदार अवस्था में दिखाई देने लगता है |

8. इस तेल में अभी भी एन हेक्सेन घुली हुई होती है इसमें सबसे पहले सिट्रिक एसिड मिलाते हैं ताकि ताम्बे और लोहे का कोई अंश मौजूद हो तो वो नीचे बैठ जाए उसके बाद इस तैलीय द्रव पदार्थ को 500 डिग्री मीलार्ड नोट किया जाए 500 डिग्री पर गर्म किया जाता है और एन हेक्सेन जो घुली होती हो वो बेताल के जैसे उड़ कर वापिस गैस अवथा में ऊपर उड़ जाती है और नीचे रिफाइंड तेल बच जाता है |

इस रिफाइंड आयल में फ्री रेडिकल्स बहुतायत मात्रा में मिलते हैं और ये ही फ्री रेडिकल्स हमारे शरीर में पहुँच कर भिन्न भिन्न प्रोटीन्स , लिपिड्स और शुगर्स के साथ मिल कर पता नहीं क्या क्या बनाते हैं और शरीर का थर्ड डिग्री ट्रीटमेंट अंदर से चालू रहता है |

American Pigs eating Soya Cake

File Photo: American Pigs eating Soya Cake. Source – Flickr. License Attribution Some rights reserved by LadyDragonflyCC

अब सवाल उठता है खाएं क्या

भाई कच्ची घानी सरसों का तेल हरियाणा पंजाब हिमाचल यू पी बिहार झारखण्ड राजस्थान एम् पी छत्तीस गढ़ के लोगों के लिए वरदान से कम नहीं है | सरसों के तेल की मिल हफैड़ ने नारनौल में लगायी हुई है जिसमें एक नंबर का तेल बनता है | इसके अलावा देसी घी बहुत अच्छा विकल्प है |

स्वयं बना हो , वीटा अमूल , वेरका , बाबा रामदेव ठीक ठाक हैं बाकी घर का बना हुआ मिल जाये तो भी बेहतर है |

साथियों जब से हम खाने पीने के मामले में जेंटलमैन बने हैं तभी से सारा कबाड़ा शुरू हुआ है | इस जेंटलमैन को छुट्टी भेजो और अपने अंदर के जंगली को जगाओ क्यूंकि उसे ही समझ है के शुद्ध खाना कहाँ से प्राप्त करना है |

खाने की खोज में गाँवों का रुख कीजिये ये चमकीले पैकेट बस देखने में ही अच्छे हैं |

आप जब गाँव में जाओगे तो सबकुछ इजी डे जैसा पड़ा नहीं मिलेगा वहां भी अज्ञानता की भसड पसरी पड़ी है

आपकी आधुनिक सोच और परम्परागत विज्ञानं के मेल से ही आगे की राह निकालनी हैं | बैंकिंग व्यवस्था सुधर रही है आज शहर और गाँव के बीच में पैसे का लेन देन बहुत आसानी से हो सकता है | हमें कुछ करना चाहिए |

साथियों आज गाँव और शहर की इस भावी दोस्ती और परस्पर निर्भरता और भाईचारे के नाम बाजण दो चिमटा

Best regards,

Kamal Jeet

Disclaimer: Copyright of this article is retained by author and ‘Vigyaan’ do not claim any copyright on this article and its content.

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Kamal Jeet. रिफाइंड आयल की कहानी – एक फ़ूड टेक्नोलॉजिस्ट की ज़ुबानी. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/letter/677/. Retrieved September 23, 2017.

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About the Author ()

Kamal Jeet is a trained Food Technologist with Masters in Food Science and Technology from Chaudhary Charan Singh Haryana Agriculture University (CCSHAU), Hisar, Haryana. Kamal Jeet is currently pursuing his LLM at Maharshi Dayanand University (MDU), Rohtak. Kamal Jeet had been a worker @Grassroot at Haryana Heritage and is also involved in Promoting the Natural Foods and Organic Farming in the country.

Comments (6)

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  1. डॉ. के. के. मिश्र says:

    हम शुरू से रिफ़ाइंड तेल के विरोधी रहे हैं और अपने रोगियों को इससे बचने की सलाह देते रहे हैं किंतु रोगियों का तर्क रहता है कि उन्हें मार्केट में इसका कोई विकल्प नहीं मिलता। सारे तेल रिफ़ाइण्ड हैं । वास्तव में सरकार को रिफ़ाइण्ड तेलों को खाद्य पदार्थों की सूची में से निकाल बाहर करना चाहिये । यह लेख बहुत उपयोगी है । काश ! इसे सरकार समझ पाती !

  2. Sanjeev Ojha says:

    वाह बिल्कुल सही।

  3. Susheel Sharma says:

    What a concrete analysis. Liked this article

  4. Bhoj R Singh says:

    Good Information.
    India is also the 5th Largest Producer of Soybeans (1) and it is one of the most favorite food items in North Eastern Regions of India. One of the best Probiotics, Axone, is made from it (2, 3)

    Soybean originated in India or China, most probably in NEH region. Soybean is one of the best legumes. However, as far as refined oils are concerned they are all made in the same way and equally dangerous.

    1. http://www.globalsoybeanproduction.com/
    2. https://goo.gl/2BsRQo
    3. https://goo.gl/V9cD99

  5. A k Rai(food tech 85 batch) says:

    Good article. Presentation excellent.

  6. Dr Manoj Kumar Singh says:

    If possible add information like how oil separated from solvent? How much residual solvent in oil (as per scientific literature)? These information add value to article.

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