हाँ, दर्द होता है !

| June 7, 2017 | 0 Comments

कई हजार साल पहले – ‘जियो और जीने दो’ का सन्देश महावीर स्वामी जैसे विद्वान् ने यूं ही तो नहीं दिया होगा | यूँ ही तो पौराणिक संस्कृति ‘जीवों पर दया करो’ की भावना से परिपूर्ण नहीं होगी | आज – जब भी कोई इक्का दुक्का पशुओं के प्रति दया भाव के इस विचार को व्यक्त करता है – तो एक विशेष तथाकथिक आधुनिक वर्ग तरह-तरह से इस विचार का खंडन कर देता है|

पशुओं को मीट इत्यादि के लिए पालना एवं बाद में काट कर खा लेना एक बात है – इसका विरोध ना तो किसी धर्म में लिखा है, ना विज्ञान में | वर्ग विशेष, इसे ‘खाने पीने की स्वतंत्रता’ की संज्ञा देता है | मैं इस बात का विरोध नहीं कर रहा हूँ, आपको जो उचित लगे, अगर आपकी कैपेसिटी में है, कानूनन तौर पर प्रतिबंधित नहीं है (जैसे आप ह्यूमन मीट नहीं खा सकते) – तो आप खा ही सकते हैं |

परन्तु जीते जी इन खाने के लिए पाले जाने वाले पशुओं पर अंतहीन अत्याचार, उनको नरक का जीवन भोगने के लिए मजबूर करना, कहाँ की स्वतंत्रता है?

नहीं, गाय की बात नहीं करूँगा – गाय तो evolutionary  tree में बहुत ऊपर आने वाला प्राणी है – जिसका अपना एक अस्तित्व होता है, एक व्यक्तित्व होता है | आज बात करते है दूसरे प्राणियों की –

छोटी छोटी चिड़ियों की – उन चिड़ियों की जिनको एक वर्ग विशेष जीवित प्राणी तक मानने से इनकार कर रहा है | उनका मानना है – कि मुर्गी जैसे जीवों को खेती की तरह मानना चाहिए – जैसे चाहो उगाओ, जैसे चाहो काट लो…..

उन भेड-बकरियों की, जिनकी तो बात भी कोई नहीं करता ! इन पर दयाभाव तो बहुत दूर की बात है|

ठीक है – यह प्लेटफार्म विज्ञान का प्लेटफार्म है | इसलिए हम सिर्फ विज्ञान की बात करेंगे |

बात करेंगे, कि जैसे आपकी फीलिंग्स हैं, इनकी भी फीलिंग्स हैं क्या?

बात करेंगे कि जैसे आपको दर्द होता है, ऐसे ही इनको भी दर्द होता है क्या?

हाँ, दर्द होता है !

इससे पहले कि इस लेख को आप आगे पढ़े – कृपया Yotube पर यह विडियो ध्यान से देखिये ! Youtube ने इस विडियो को छिपा दिया है – क्योंकि मनुष्य स्वयं अपनी करतूत को देख नहीं पा रहा है शायद !

https://www.facebook.com/PETAIndia/videos/10155385556661683

अगर आपको Youtube पर विडियो दिखाई ना दे – तो यहाँ देखिये मैंने इसको अपने फेसबुक पर भी अपलोड कर दिया है – शायद फेसबुक इसको ब्लाक ना करे!

Youtube has hidden this video- they say it shows violence against Nature! Who is doing Violence? Human…..Yes, we….and we ourselves cant see it! We hide it!Lets see………what we are doing…..!

Posted by डॉ श्री सुनील वर्मा on Tuesday, June 6, 2017

हाँ, दर्द होता है !

और यह बात – PETA का माधवन ही नहीं, वैज्ञानिक भी कह रहे हैं – आप यहाँ पढ़िए कि विज्ञान का topmost जर्नल- “Science” क्या कहता है:

‘Science’ के June 01, 2017 के अंक में एक शोध पत्र प्रकाशित हुआ है – शीर्षक है : Artificial intelligence learns to spot pain in sheep अर्थात – भेड़ों के दर्द को पढने की विधि

Sheep feel Pain

Artificial intelligence learns to spot pain in sheep

अर्थात वैज्ञानिक मानते हैं और जानते हैं, कि दर्द होता है – और इस दर्द को नापने की युक्ति भी अब वैज्ञानिकों ने खोज ली है !

आपने भी स्कूल की किताब में एक कहानी पढी होगी – जिसमें ‘Androcles’ को खूंखार भूखा शेर सिर्फ इसलिए नहीं मारता क्योंकि एक समय में ‘Androcles’ नें उसके पैर में चुभा कांटा निकाल दिया था ! अगर नहीं पढी है तो यहाँ पढ़ सकते हैं |

वह तो कहानी थी – और हम ‘विज्ञान’ प्लेटफार्म पर सिर्फ विज्ञान की बात करने के लिए प्रतिबद्ध हैं!

तो पढ़िए ‘Science’ के ही जून 05, 2017 के अंक में कि वैज्ञानिक बता रहे हैं कि किस प्रकार छोटी छोटी चिड़ियाएँ तक मनुष्य को उनके प्रति किये गए व्यवहार तक को ही नहीं, वरन उस मनुष्य तक को याद रखती हैं!

Ravens remember people who suckered them into an unfair deal

इससे पहले वैज्ञानिक डॉ संजीव कुमार वर्मा इसी प्लेटफार्म पर अपने ब्लॉग में लिख चुके है कि किस प्रकार छोटा सा काला कव्वा और उसका बड़ा परिवार ना जाने कितने वर्षों तक मुझे (Yes, I mean to me) सिर्फ इसलिए परेशान करता रहा क्योंकि मेरे और उन काले कव्वों के बीच एक misunderstanding हो गयी थी, जो बाद में एक तरफ़ा दुश्मनी में बदल गयी – और जब तक मैंने गाव को नहीं छोड़ा- काले कव्वे मेरे सर को लहुलुहान करते रहे !

इस लेख का उद्देश्य किसी धर्म विशेष या किसी पार्टी वशेष या वर्ग विशेष की विचारधारा को प्रमोट या डिमोट करना नहीं है – इसका उद्देश्य है आपको इस वैज्ञानिक तथ्य से अवगत कराना कि हाँ, दर्द होता है – और खूब होता है, वह दर्द याद भी रहता है और भुलाये नहीं भूलता!

चलिए – लेख का अंत अच्छे से विडियो से करते हैं – जहाँ आप इन छोटी-छोटी चिड़ियाओं को ठीक उसी तरह अपने आपको साफ़ करते हुए देख सकते है जैसे कोई पौराणिक सुन्दरी किसी चित्र में किसी नदी के किनारे बैठ कर अपना हाथ मुंह धो रही हो….यह विडियो मैंने खुद शॉट किया है कल ही- CCMB campus के अन्दर….

आपसे विशेष अनुरोध – ‘विज्ञान’ के इस नए Youtube चैनल को Subscribe करना ना भूले….यहीं पर भविष्य में विज्ञान से सम्बंधित अनोखे वीडियोस आपको देखने को मिलने वाले हैं !

डॉ सुनील कुमार वर्मा

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Dr Sunil Kumar Verma. हाँ, दर्द होता है !. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/skv/1033/. Retrieved September 23, 2017.

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About the Author ()

Dr Sunil Kumar Verma is an experienced Principal Scientist with a demonstrated history of working in the research industry for more than 20 years. Skilled in Molecular Medicine, Genetics, Translational Research and Wildlife Forensics, Dr Verma has done his doctorate from the University of Oxford. UK. He had been the inventor of 'Universal Primer Technology' (US Patent 7141364), which led to the establishment of India's first wildlife forensics cell in the LaCONES of CCMB to provide wildlife forensics services to the nation. He is also the recipient of several national and international awards and honours, including the 2008 CSIR Technology Award, the 2009 NRDC Meritorious Invention Award of Govt. of India and the 2009 BioAsia Innovation Award in recognition of his contribution to Indian science and technology.

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