Illuminating India: 5000 Years of Science and Innovation
Celebration of India’s contribution to science, technology and mathematics during last 5000 years begins in London

| October 23, 2017 | 0 Comments

The Science Museum at Exhibition Road, South Kensington, London SW7 2DD is Celebrating 5000 years of Science and Innovation from India. The exhibition “Illuminating India: Exhibition of 5000 Years of Science and Innovation” is open for public during 4 October 2017 – 31 March 2018

London के सुप्रसिद्ध साइंस म्युसियम में इन दिनों एक खास प्रदर्शनी लगी हुयी है | इस प्रदर्शनी का नाम है “Illuminating India: Exhibition of 5000 Years of Science and Innovation” 

The Bakhshali manuscript contains the first known use of zero as numeral. Source: nature

यह प्रदर्शनी पिछले पांच हजार साल के इतिहास में भारत के विश्व को योगदान को प्रदर्शित करती है| सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिका nature के 18 October 2017 के issue में इस प्रदर्शनी के विषय में एक महत्वपूर्ण सारगर्भित लेख भी प्रकाशित हुआ है | भारत के ज्ञान विज्ञान को प्रदर्शित करने वाला यह विज्ञान उत्सव, किसी भी भारतीय के लिए एक गर्व का विषय है |

इस प्रदर्शनी में भारत के 5000 वर्ष की विज्ञान की कहानी से लेकर धर्म, दर्शन, गणित, मध्ययुगीन खगोल शास्त्र, आधुनिक भौतिकी, कंप्यूटर क्रांति और अंतरिक्ष अन्वेषण तक को प्रभावशाली ढंग से सूत्रों के साथ दिखाया गया है |

लगभग AD 200–400 तक पुरानी Bakhshali manuscript भी यहाँ प्रदर्शित की गयी है, जिसमें भारत की विश्व को  देंन ‘जीरो‘ से लेकर अन्य कई वैज्ञानिक खोजो का प्रथम वर्णन मिलता है |

भारतीय वैज्ञानिक J.C. Bos (1858-1937) नें Marcony से भी पहले अपने बनाये यंत्र से दिखाया था कि किस प्रकार माइक्रोवेव एवं रेडियो तरंगे दूर तक भेजी जा सकती हैं | J.C. Bos की यह खोज आधुनिक वायरलेस टेक्नोलॉजी का आधार है, किन्तु इसका पेटेंट इटली के वैज्ञानिक Guglielmo Marconi (मार्कोनी) ने अपने नाम करा लिया था – इसका भी इस प्रदर्शनी में सन्दर्भ सहित उल्लेख है |

JC Bos Radio Wave

सर J.C. Bos का यंत्र (1890)

लगभग 500 BC के भारतीय शल्य चिकित्सा के ग्रन्थ सुश्रुत संहिता में वर्णित शल्य चिकित्सा में प्रयोग होने वाले विभिन्न औजारों को भी इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया गया है |

भारत के महान गणितज्ञ ‘रामानुजन’ के जीवन एवं योगदान को भी इस प्रदर्शनी में विस्तार से दिखाया गया है | इनमे श्रीनिवास रामानुजन का सन 1820 में लिखा वो पत्र भी है जिसमे उन्होंने गणित के मोक थीटा फंक्शन को बताया था, किन्तु इस फंक्शन को समझने में आधुनिक वैज्ञानिको को पुरे अस्सी साल लगे और वर्ष 1900 में जाकर इस function को पूर्णतया समझा जा सका|

श्रीनिवास रामानिजन का पत्र

श्रीनिवास रामानुजन का  1820 में लिखा गया पत्र

इस प्रदर्शनी का सबसे अनोखा exhibit है भारत का ऑटो | जी हाँ, तीन पहियों वाला ऑटो जिसको भारत की  आधुनिकतम खोजो में स्थान मिला है |

ऑटो इंडिया

भारत की जुगाड़ टेक्नोलॉजी ” ऑटो”

वैज्ञानिक पत्रिका Nature भारत के ऑटो के विषय में लिखती है कि, “There is a bright orange auto-rickshaw (a hybrid of an electric scooter and cycle rickshaw), the centrepiece of the ‘Innovation’ gallery and a symbol of India’s frugal innovation, or jugaad”

भारतीय वैज्ञानिक सत्येन्द्र नाथ बोस की खोज “बोसॉन” के इतिहास को भी इस प्रदर्शनी में साक्ष्यो के साथ दिखाया गया है | Nature पत्रिका में “James Poskett” लिखते हैं कि –

“A collection of letters reminds us that the boson has its origin in India. In the 1920s, the young Bengali physicist Satyendra Nath Bose struck up a correspondence with Albert Einstein. Together, the duo laid the foundations of quantum statistics and predicted the existence of undiscovered fundamental particles. Today, we call those particles bosons in honour of S. N. Bose. ”

इस प्रदर्शनी के विषय में और जानकारी लन्दन के साइंस म्यूजियम की वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है|

कुल मिलकर यह विज्ञान प्रदर्शनी भारत के वैज्ञानिक इतिहास का विश्व के समक्ष गौरवशाली प्रस्तुतीकरण है जो भारत के हर नागरिक के लिए गर्व का विषय है |

Image Courtesy: Website of the Science Musium, London

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Dr Sunil Kumar Verma. Illuminating India: 5000 Years of Science and Innovation
Celebration of India’s contribution to science, technology and mathematics during last 5000 years begins in London
. In: विज्ञान संग्रह. vigyaan.org. Access URL: http://vigyaan.org/blogs/skv/1459/. Retrieved December 14, 2017.

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About the Author ()

Dr Sunil Kumar Verma is an experienced Principal Scientist with a demonstrated history of working in the research industry for more than 20 years. Skilled in Molecular Medicine, Genetics, Translational Research and Wildlife Forensics, Dr Verma has done his doctorate from the University of Oxford. UK.

He had been the inventor of ‘Universal Primer Technology’ (US Patent 7141364), which led to the establishment of India’s first wildlife forensics cell in the LaCONES of CCMB to provide wildlife forensics services to the nation.

He is also the recipient of several national and international awards and honours, including the 2008 CSIR Technology Award, the 2009 NRDC Meritorious Invention Award of Govt. of India and the 2009 BioAsia Innovation Award in recognition of his contribution to Indian science and technology.

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